समय से कराया जाय Panchayat Election, हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव कार्यक्रम की मांगी जानकारी, सुनवाई 25 मार्च को

याचिकाकर्ता ने अदालत को अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसके अनुसार इनका पांच साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. कोर्ट को बताया गया कि पंचायत चुनावों (Panchayat Election) को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीखों में कई बार संशोधन किया है. पहले यह प्रक्रिया दिसंबर 2025 में पूरी होनी थी, जिसे बढ़ाकर मार्च 2026 और अब नवीनतम अधिसूचना के माध्यम से 15 अप्रैल 2026 कर दिया गया है.
याचिकाकर्ता ने चिंता जताई कि मतदाता सूची के फाइनल होने के बाद निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण की प्रक्रिया में भी काफी समय लगेगा, जिससे (Panchayat Election) पंचायत चुनाव समय पर संपन्न होने में बाधा आ सकती है. इसी तरह की स्थिति पहले भी ‘विनोद उपाध्याय’ मामले में उत्पन्न हुई थी जब चुनाव समय पर न होने के कारण प्रशासकों की नियुक्ति करनी पड़ी थी.
कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की शक्तियों के टकराव पर भी पुरानी मिसालों का हवाला दिया. ‘प्रेम लाल पटेल’ मामले के निर्णय का जिक्र करते हुए कोर्ट ने दोहराया कि (Panchayat Election) पंचायत चुनाव की तारीखें तय करने और पूरी प्रक्रिया के अधीक्षण व नियंत्रण का अधिकार संवैधानिक रूप से राज्य निर्वाचन आयोग के पास है. अदालत ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या पूर्व में घोषित किए गए कुछ संशोधनों की संवैधानिक स्थिति अब भी प्रभावी है.
इसे भी पढ़ें….Criminal Conviction को केवल संभावना या संदेह के आधार पर कायम नहीं रखा जा सकता
अंततः हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह बताना होगा कि क्या 15 अप्रैल तक (Panchayat Election) पंचायत चुनाव की मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद 26 मई 2026 तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराना संभव है.
कोर्ट ने अपेक्षा की है कि अगली सुनवाई की तारीख, यानी 25 मार्च 2026 तक, (Panchayat Election) पंचायत चुनाव का चुनाव का पूरा विस्तृत कार्यक्रम रिकॉर्ड पर लाया जाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने महाधिवक्ता या किसी अपर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है.
ग्राम पंचायत (Panchayat) मनजीत का बीएलओ हटा, नये की तैनाती के कारण याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ जिले के रानीपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत (Panchayat) मनजीत में भी एल ओ राम परवेश राम को हटाने की मांग में दाखिल याचिका दूसरे बी एल ओ प्रदुम्न मिश्र की तैनाती के बाद अर्थहीन करार देते हुए खारिज कर दी है. यह आदेश चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की बेंच ने मनीष कुमार की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.
याचिका पर अधिवक्ता परवेज इकबाल अंसारी ने बहस की. इनका कहना था कि बीएलओ राम परवेश राम मनमानी पर उतारू था. शिकायत पर उसका तबादला कर दिया गया. किंतु जिसे उसके स्थान पर लाया गया उसने कार्यभार नहीं संभाला तो विपक्षी को ही दुबारा तैनात कर दिया गया. जिस पर यह याचिका दायर की गई. कोर्ट ने सरकार व जिला प्रशासन से जानकारी मांगी तो बताया गया नया बीएलओ तैनात कर दिया गया है. याचिका अर्थहीन होने के कारण खारिज कर दी गई.