यूपी बार कौंसिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दी जानकारी, ‘History Sheet’ वकीलों के लाइसेंस सस्पेंड किये जाएंगे
क्रिमिनल एक्टिविटीज में इनवाल्व होने के चलते थाने में हिस्ट्रीशीटर (History Sheet) के तौर पर दर्ज वकीलों का लाइसेंस बार कौंसिल उत्तर प्रदेश सस्पेंड करेगी. यह जानकारी बार कौंसिल की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गयी है. जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच वकील मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस मामले में कोर्ट ने पहले डीजीपी को स्टेट लेवल पर क्रिमिनल एक्टिविटीज में इनवाल्व वकीलों का डेटा इकट्ठा करने का निर्देश दिया. बाद में मदद करने के लिए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को इस मामले में शामिल किया था.

अधिवक्ता मोहम्मद कफील के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं. इसमें फ्रॉड, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश के मामले शामिल हैं. इसी के आधार पर उनकी क्राइम हिस्ट्रीशीट (History Sheet) तैयार की गयी है और मुकदमा कायम है. मो. कफील ने एडिशनल सेशंस जज, इटावा के आदेश को चुनौती देने के लिए आर्टिकल 227 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ उनकी शिकायत खारिज कर दी गई.
उन्होंने आरोप लगाया कि 26 नवंबर, 2025 को रेलवे स्टेशन के पास पुलिस आरक्षी ने उन पर हमला किया. उनकी तरफ से हमले के साक्ष्य रखे गये तो स्टेट का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं ने मो. कफील की क्रिमिनल हिस्ट्री (History Sheet) की चर्चा कोर्ट में की. क्राइम रिकॉर्ड का डिटेल कोर्ट में शेयर किया गया.
इसके बाद कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में रजिस्टर्ड वकीलों के खिलाफ पेंडिंग आपराधिक मामलों का राज्यव्यापी डेटा मांगा था. सुनवाई के दौरान, यूपी बार काउंसिल के वकील अशोक कुमार तिवारी ने काउंसिल का एक प्रस्ताव रिकॉर्ड पर रखा, जिसमें उन वकीलों के प्रैक्टिस लाइसेंस को सस्पेंड करने का सर्वसम्मत फैसला लिया गया जिनके खिलाफ पुलिस ने क्रिमिनल एक्टिविटीज में इनवाल्व होने के चलते हिस्ट्रीशीट (History Sheet) खोल रखी है या उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है.
स्टेट का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं ने मो. कफील की क्रिमिनल हिस्ट्री (History Sheet) की चर्चा कोर्ट में की
बार काउंसिल ने उन वकीलों की एक लिस्ट भी सौंपी, जिनके खिलाफ फिलहाल अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही है. कोर्ट ने काउंसिल को क्रॉस-रेफरेंस के लिए उन सभी वकीलों का विवरण वाली एक पेन ड्राइव पेश करने का समय दिया जिन्हें प्रैक्टिस सर्टिफिकेट जारी किए गए. इसके अलावा कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ मामलों की जिलेवार सूची के साथ राज्य सरकार का कंप्लायंस एफिडेविट भी रिकॉर्ड पर लिया.
- जस्टिस दिवाकर ने आदेश दिया कि सभी थानों के एसएचओ, अपने संबंधित सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के माध्यम से, तीन खास बिंदुओं को प्रमाणित करने के लिए एक व्यक्तिगत अंडरटेकिंग फाइल करें:
- 1. वकीलों के खिलाफ मामलों की पूरी सूची हाई कोर्ट को दी गई.
- 2. कुछ भी महत्वपूर्ण छिपाया नहीं गया.
- 3. उनके पुलिस स्टेशन में किसी भी वकील के खिलाफ बताए गए मामलों के अलावा कोई अन्य मामला पेंडिंग नहीं है.
“अपराध विचार से शुरू होता है और विचार आचरण को प्रभावित करता है. इसलिए जब गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति कानूनी सिस्टम के भीतर प्रभावशाली पदों पर होते हैं तो यह एक वैध चिंता है कि वे पेशेवर वैधता की आड़ में काम करते हुए पुलिस अधिकारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं पर गलत तरीके से प्रभाव डाल सकते हैं.”
बेंच ने की टिप्पणी
कोर्ट ने निर्देश दिया कि “पुलिस स्टेशन के हिसाब से” एक नई लिस्ट दी जाए. बता दें कि पिछले महीने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया था कि कुछ आपराधिक तत्व बार एसोसिएशन में अथॉरिटी के पदों पर काबिज हैं.
जस्टिस दिवाकर ने कहा कि जब तक दोष साबित नहीं हो जाता, हर व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है, लेकिन एक वकील का पिछला रिकॉर्ड निस्संदेह व्यक्तिगत और पेशेवर ईमानदारी दोनों पर असर डालता है. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कानूनी सिस्टम को अपनी ताकत सिर्फ कानूनी प्रावधानों से नहीं, बल्कि इसकी निष्पक्षता और ईमानदारी में जनता के भरोसे से मिलने वाली नैतिक वैधता से मिलती है.