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एग्रोटेक कंपनी Fraud की विवेचना की प्रगति रिपोर्ट एक माह में पेश करने का निर्देश, सुनवाई 25 मार्च को  

सहायक पुलिस कमिश्नर सोरांव से दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कार्यवाही की मागी जानकारी

एग्रोटेक कंपनी Fraud की विवेचना की प्रगति रिपोर्ट एक माह में पेश करने का निर्देश, सुनवाई 25 मार्च को  

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मात्र पित्र सहयोग एग्रोटेक कंपनी सिविल लाइंस प्रयागराज के निवेशकों के साथ धोखाधड़ी (Fraud) मामले में पुलिस विवेचना अधिकारी सौरभ पांडेय को निर्देश दिया है कि पीड़ितों का बयान दर्ज कर एक माह में प्रगति रिपोर्ट पेश करें साथ ही सहायक पुलिस कमिश्नर सोरांव को इस मामले में लापरवाही के दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की कार्यवाही रिपोर्ट मांगी है.

कोर्ट ने कंपनी के एजेंट मोहम्मद वसीम को मिली अंतरिम जमानत अगली सुनवाई की तिथि तक बढ़ा दी है. अर्जी की सुनवाई 25 मार्च को होगी. यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने मोहम्मद वसीम की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है. कोर्ट के निर्देश पर 27 फरवरी को विवेचना अधिकारी सौरभ पांडेय व एसीपी सोरांव, श्यामजीत प्रमिला सिंह ने कोर्ट में हाजिर होकर Fraud मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी दी.

Fraud में एक डायरेक्टर श्याम जी विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया गया

विवेचना अधिकारी ने बताया कि कंपनी रजिस्ट्रार  से कंपनी का डाटा प्राप्त हुआ है. अतुल कुमार शर्मा, श्याम जी विश्वकर्मा व राजेश कुमार सिंह कंपनी के डायरेक्टर थे. जिन्होंने 31 नवंबर 2008 को अपना डिन नंबर समर्पित कर दिया है. मात्र पित्र सहयोग एग्रोटेक कंपनी का गठन 24 जून 14 को किया गया था. Fraud में एक डायरेक्टर श्याम जी विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया गया है.

विवेचना जारी है, एक माह में पूरी कर ली जाएगी. सहायक पुलिस कमिश्नर सोरांव ने बताया कि एक माह में लापरवाही बरतने के दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जायेगी. जिसपर कोर्ट ने विवेचना अधिकारी को अन्य पीडितो का बयान दर्ज करने का आदेश दिया.

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वक्फ काम में हस्तक्षेप न करने के आश्वासन पर मदरसा प्रबंधक के खिलाफ याचिका निस्तारित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वक्फ करीमुद्दीनपुर, तहसील घोसी जनपद मऊ के  कार्य में नसीम अहमद और दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा समशूल उलूम के प्रबंधक के वक्फ में हस्तक्षेप न करने के आश्वासन के बाद याचिका निस्तारित कर दी है.

याचिका मुतवल्ली मोहम्मद हमीदुल हक द्वारा दाखिल की गई थी. विपक्षी पर कोर्ट की यथास्थिति कायम रखने की निषेधाज्ञा के बावजूद वक्फ काम में हस्तक्षेप करने का आरोप था. यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने दिया है. याची के अधिवक्ता सुधीर कुमार सिंह की बहस की.

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने अपने आदेश की गलत व्याख्या और दुरूपयोग करने वालों के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही प्रारम्भ करने की चेतावनी दी, तो नसीम अहमद और मदरसा के प्रबंधक के अधिवक्ता अंशु चौधरी और श्याम सुंदर मिश्रा ने अपने मुवक्कील की ओर से वकफ के कार्य में हस्तछेप न करने का आश्वासन दिया. कहा वक्फ कार्य में वे हस्तक्षेप नहीं करेंगे. इस पर कोर्ट ने किसी आदेश की आवश्यकता न समझते हुए, याचिका को निस्तारित कर दिया.

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