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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, अपराध में Evidence के अभाव में बरी तो विभागीय जांच नहीं होगी प्रभावित, अध्यापक पर 4 छात्राओं से अश्लील हरकत करने का है आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, अपराध में Evidence के अभाव में बरी तो विभागीय जांच नहीं होगी प्रभावित, अध्यापक पर 4 छात्राओं से अश्लील हरकत करने का है आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि आपराधिक केस में evidence के अभाव के कारण आरोप है बरी कर दिया गया है तो इससे विभागीय जांच कार्यवाही प्रभावित नहीं होगी. कोर्ट ने कहा अपराध मुक्ति सम्मानजनक होनी चाहिए, evidence की कमी से बरी होने से यह नहीं कहा जा सकता कि विभागीय कार्यवाही भी समाप्त की जाय. कोर्ट ने बारहवीं की चार छात्राओं से छेड़छाड़ गंदी हरकत व अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में अध्यापक के खिलाफ चल रही विभागीय जांच कार्यवाही की चुनौती याचिका खारिज कर दी है.

यह आदेश जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने जगतपुर इंटर कॉलेज वाराणसी के विषय विशेषज्ञ अध्यापक संतोष कुमार शर्मा की याचिका पर दिया है. अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने याचिका का विरोध किया. मालूम हो कि चार छात्राओं ने याची के खिलाफ सेक्सुअल भाषा इस्तेमाल करने की शिकायत की. कारण बताओ नोटिस जारी कर याची को निलंबित किया गया किंतु जिला विद्यालय निरीक्षक ने निलंबन का अनुमोदन नहीं किया.

इसके बाद चार्जशीट दी गई. अश्लील हरकत करने, छेड़छाड़ करने, दुपट्टा व गाल खींचने, गंदी बातें करने का आरोप लगाया गया. जांच अधिकारी ने दोषी करार देते हुए रिपोर्ट दी. प्रबंध समिति ने याची को कारण बताओ नोटिस दी. जिसका जवाब दिया गया. प्रबंध समिति ने निरीक्षक को प्रस्ताव भेजा .जिसे अस्वीकार कर दिया कि रिपोर्ट पीड़िता के बयान पर आधारित है. साक्ष्य नहीं है.

Evidence के अभाव में अपराध साबित न कर पाने के कारण याची को बरी कर दिया गया

जिसे प्रबंध समिति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट ने निरीक्षक का 8 अगस्त 12 के आदेश को रद कर कहा पेपर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को दिए जाय. सचिव निर्णय लेंगे. एक पीड़िता ने एफआईआर भी दर्ज की थी. केस में अभियोजन के Evidence के अभाव में अपराध साबित न कर पाने के कारण याची को बरी कर दिया गया. कहा प्रबंधक से वैमनस्यता के कारण केस दर्ज कराया गया.

इसके बाद याचिका दाखिल कर कहा गया कि अपराध में बरी किए जाने के बाद विभागीय कार्यवाही भी समाप्त की जानी चाहिए. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों पर विचार किया और कहा आपराधिक कार्यवाही में Evidence के अभाव में बरी होने से विभागीय जांच कार्यवाही प्रभावित नहीं होगी, यदि सम्मानजनक दोषमुक्त न किया गया हो. कोर्ट ने विभागीय जांच कार्यवाही पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी.

गैंगस्टर एक्ट के तहत जावेद की गिरफ्तारी पर रोक, याचिका पर राज्य सरकार व शिकायतकर्ता से कोर्ट ने मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जावेद के खिलाफ थाना इज्जतनगर,बरेली में दर्ज गैंगस्टर एक्ट केस की विवेचना जारी रखने तथा याचिका लंबित रहने तक पुलिस रिपोर्ट पेश न करने का निर्देश दिया है. साथ ही आरोपी जावेद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने शिकायतकर्ता इंचार्ज इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह को नोटिस जारी की और राज्य सरकार सहित शिकायतकर्ता से याचिका पर जवाब मांगा है.

यह आदेश जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ल की खंडपीठ ने याची के वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस मिश्र व चंद्र केस मिश्र को सुनकर दिया है. इनका कहना है कि गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही अवैध होने के कारण रद की जाय. कोई ठोस आधार नहीं है. निराधार आरोपों (Evidence) को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है. कोई दस्तावेजी Evidence नहीं है जिसके आधार पर गैंगस्टर एक्ट का केस चलाया जा सके. कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना. याचिका की सुनवाई 28 अप्रैल को होंगी.
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