बिना कैदी से अधिकृत सजा के खिलाफ नियम विरुद्ध दाखिल हो रही Criminal Appeal, 10 दिन में दें जवाब
जेल प्राधिकारी पालन नहीं कर रहे अपना विधिक दायित्व, हाईकोर्ट ने जेल प्राधिकारी व महानिबंधक कार्यालय से मांगी सफाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महानिबंधक कार्यालय से दस दिन में जवाब मांगा है कि बिना वकालतनामा या पावर आफ एटार्नी के कैदी की तरफ से पर्चा लगाकर दाखिल Criminal Appeal (आपराधिक अपील) किस नियम के तहत स्वीकर की है. साथ ही वरिष्ठ अधीक्षक सेंट्रल जेल आगरा से भी हलफनामा मांगा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश व जेल मैनुअल के उपबंधो के बावजूद समय से कैदी की सजा के खिलाफ जेल अपील (Criminal Appeal) क्यों दाखिल नहीं की गई. अपील की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी.
यह आदेश जस्टिस सीडी सिंह और जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ल की बेंच ने मुनेश की सजा के खिलाफ 3824 दिन की देरी से दाखिल आपराधिक अपील (Criminal Appeal) की सुनवाई करते हुए दिया है. कोर्ट ने कहा अपीलार्थी 22 मई 2015 से जेल में बंद हैं. उसकी Criminal Appeal या जेल अपील दाखिल नहीं की गई.
जेल प्राधिकारी जेल अपील (Criminal Appeal) दाखिल करने की सारी सुविधाएं मुहैया करायेंगे
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्राधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि रिश्तेदार या एजेंट के मार्फत कैदी का वकालतनामा लेकर अपील दाखिल नहीं करता तो जेल प्राधिकारी जेल अपील (Criminal Appeal) दाखिल करने की सारी सुविधाएं मुहैया करायेंगे, यह उनकी संवैधानिक ड्यूटी है.
सजा होते ही फैसले की प्रति जेल प्राधिकारी के मार्फत कैदी को दी जायेगी और अपील करना चाहता है तो Criminal Appeal दाखिल करने के लिए वकील सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध करायेंगे. यह जेल प्राधिकारी का संवैधानिक दायित्व है. इस मामले में वे अपना दायित्व निभाने में विफल रहे.
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कोर्ट ने कहा जेल मैनुअल के प्रस्तर 77 में रिश्तेदार या एजेंट को कैदी की तरफ से Criminal Appea दाखिल करने का अधिकार दिया गया है. जिसके लिए कैदी का जेल अधीक्षक या जेलर या डिप्टी जेलर के सत्यापन से अपील दाखिल की जा सकती है. किंतु नियमो के विपरीत बिना कैदी से अधिकृत हुए अपील पर्चा पर दाखिल हो रही और महानिबंधक कार्यालय स्वीकार कर रहा है. इस पर कोर्ट ने महानिबंधक कार्यालय व जेल प्राधिकारी से सफाई मांगी है.