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Child marriage के आरोप में आपराधिक केस कार्यवाही पर लगाई रोक, राज्य सरकार से 6 हफ्ते में कोर्ट ने मांगा जवाब

Child marriage के आरोप में आपराधिक केस कार्यवाही पर लगाई रोक, राज्य सरकार से 6 हफ्ते में कोर्ट ने मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Child marriage के आरोप में बाल कल्याण समिति के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कर दाखिल पुलिस चार्जशीट व केस कार्यवाही की अधिकारिता की चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से छ हफ्ते में जवाब मांगा है और एसीजे एम बुलंदशहर की अदालत में चल रहे आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है. यह आदेश जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने सुरेश व चार अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

याचिका पर अधिवक्ता अभय प्रताप सिंह ने बहस की. इनका कहना है कि बाल कल्याण समिति को पुलिस को Child marriage के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जारी करने का क्षेत्राधिकार नहीं है और Child marriage के आरोप में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देकर बाल कल्याण समिति बुलंदशहर ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है.

Child marriage के आरोप में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देकर बाल कल्याण समिति बुलंदशहर ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया

बाल कल्याण समिति बुलंदशहर द्वारा जारी किया गया एफआईआर दर्ज करने का निर्देश उसकी शक्ति के दायरे से बाहर है. इसलिए कानून के विपरीत है और इस प्रकार पुलिस आरोपपत्र को रद्द किया जाना चाहिए. कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और विपक्षियों से याचिका पर जवाब मांगा है.

हत्या मामले में आरोपी गोविंद सिंह की सशर्त जमानत मंजूर, रिहाई का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जालौन, उरई के थाना कोंच में दर्ज हत्या मामले में आरोपी  गोविंद सिंह की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. दो सह अभियुक्तों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और याची पर आरोप सामान्य प्रकृति का होने के कारण कोर्ट ने जमानत स्वीकार कर ली.और रिहाई का निर्देश दिया है. वह 16 अगस्त 25 से जेल में बंद हैं. यह आदेश जस्टिस समित गोपाल ने गोविंद सिंह के वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस मिश्र व अभिषेक मिश्र को सुनकर दिया है.

मालूम हो कि 9 अगस्त 25 को नितिन कुमार को उनके पिता के मोबाइल फोन से काल आई कि उनके पिता जितेंद्र कुमार अस्पताल में भर्ती हैं. परिवार सहित शिकायतकर्ता अस्पताल पहुंचे तो देखा अमन सिंह उर्फ मिक्की व एक अज्ञात ने कार से उनके पिता को अस्पताल में छोड़ा. डाक्टर ने मृत घोषित किया. कहना था कि पिता की लाश पर केवल अंडरवियर थी. अन्य कपड़े नहीं थे. जब उनके फोन की जांच की तो पता चला हत्या के पहले शाम 4.52 बजे राम प्रसाद विधायक की काल आई थी. अमन व अमित ने उन्हें बुलाकर गाली-गलौच किया था.

याची का कहना था कि वह एफआईआर में नामित नहीं है, सह अभियुक्त के बयान पर झूठा फंसाया गया है. चश्मदीद गवाह चंद्र पाल सिंह ने उसका नाम नहीं लिया. अमन व सलीम का नाम लिया है. जांच पूरी हो चुकी है. सह अभियुक्त अमित कुमार व अजय सिंह उर्फ पंकज को जमानत मिल चुकी है. राजा को पुलिस ने अपराध में लिप्त न होने का सबूत न होने पर छोड़ दिया है. याची का आपराधिक इतिहास नहीं है. इसलिए उसे भी जमानत पर रिहा किया जाए.

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