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MD समेत PVVNL के 2 अभियंताओं के विरुद्ध Bailable warrant, 3 अप्रैल को हाजिर होने का निर्देश

MD समेत PVVNL के 2 अभियंताओं के विरुद्ध Bailable warrant, 3 अप्रैल को हाजिर होने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PVVNL के MD रवीश गुप्ता, मुख्य अभियंता (वितरण), मेरठ गुरजीत सिंह और अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल अभिषेक सिंह के खिलाफ bailable warrant जारी किया है और तीन अप्रैल को हाजिर होने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने भूमि इंटरप्राइजेज मेरठ की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

मेरठ निवासी निखिल त्यागी की फर्म भूमि एंटरप्राइजेज द्वारा मेरठ में डीजल गाड़ियों और ड्राइवर की आपूर्ति हेतु पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा जारी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए  याचिका दायर की गई. हाईकोर्ट ने 12 सितंबर25 को  संपूर्ण टेंडर प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी. इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया जारी है. जिसपर यह अवमानना याचिका दायर की गई है.

फर्म के अधिवक्ता रजत ऐरन एवं राज कुमार सिंह ने पक्ष रखते हुए कहा कि अवमानना नोटिस जारी हो जाने एवं रोक के बावजूद विपक्षी  अधिकारी टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे है और भुगतान भी कर रहे है. नोटिस की तामील हो जाने के बावजूद न तो आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया गया और न ही  अधिकारियों की और से कोई अधिवक्ता उपस्थित हुए है.

सभी के विरुद्ध Bailable warrant जारी कर दिए है

जो कि न्यायालय की घोर अवमानना की श्रेणी में आता है. हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मेरठ को 3 अप्रैल को तीनों अधिकारियों की उपस्थिति हाईकोर्ट के समक्ष सुनिश्चित करने के आदेश देते हुए सभी के विरुद्ध Bailable warrant जारी कर दिए है.

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चेक अनादर के फर्म के खिलाफ आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेसर्स यौशाना इंटरप्राइजेज व अन्य के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट झांसी में विचाराधीन चेक अनादर के आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और शिकायतकर्ता मुकेश अहिरवार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है. याचिका की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी.

यह आदेश जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला ने याची फर्म के याचिका पर अधिवक्ता चंद्र केश मिश्र को सुनकर दिया है. इनका कहना था कि कामर्शियल विवाद है. चेक अनादर हुआ है जिसकी भरपाई के लिए सिविल वाद दायर कर वसूली की जा सकती है. आपराधिक केस का औचित्य नहीं है. कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना.

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