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‘संविधान का Article 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका अभ्यास करने और प्रचार करने का समान अधिकार देता है’

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि निजी परिसर या निजी संपत्ति में धार्मिक आयोजन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता

‘संविधान का Article 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका अभ्यास करने और प्रचार करने का समान अधिकार देता है’

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान का Article 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका अभ्यास करने और प्रचार करने का समान अधिकार देता है. Article 25 प्रत्येक नागरिक को निजी परिसर या निजी संपत्ति में पूजा या धार्मिक आयोजन करने का भी अधिकार है. इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता बशर्ते उससे लोक व्यवस्था या शांति भंग न होती  हो. यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने संभल में नमाजियों की संख्या सीमित करने को लेकर दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है.

कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें नमाजियों की संख्या को केवल 20 तक सीमित करने की बात कही गई थी. कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूजा करने वालों की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. कानून-व्यवस्था का हवाला देकर किसी के धार्मिक अधिकार को सीमित करना उचित नहीं है. कोर्ट ने अपने आदेश में Article 25 की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि यह अधिकार किसी विशेष धर्म के लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध आदि) के लिए समान है.

Article 25 के तहत मिली स्वतंत्रता किसी को भी दूसरे धर्म के खिलाफ उकसाने या नफरत फैलाने की अनुमति नहीं देती

कोर्ट ने कहा कि भारत की सुंदरता इसकी विविधता में है. सदियों से यहां विभिन्न धर्म और भाषाएं शांति के साथ सह-अस्तित्व में रही हैं.  कोर्ट ने आदेश में चेतावनी भी दी कि Article 25 के तहत मिली स्वतंत्रता किसी को भी दूसरे धर्म के खिलाफ उकसाने या नफरत फैलाने की अनुमति नहीं देती. यदि प्रार्थना की आड़ में लोक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जाता है तो अपराधी को कानून की पूरी कठोरता का सामना करना होगा.

कोर्ट ने टिप्पणी किया कि Article 25 धर्म-निरपेक्ष है. यह न केवल आस्तिकों को  बल्कि एक नास्तिक को भी यह अधिकार देता है कि वह तर्क और विज्ञान के आधार पर अपनी बात रखे कि ईश्वर नहीं है. कोर्ट ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी व्यक्ति के निजी स्थान पर होने वाली प्रार्थना में कोई बाहरी व्यक्ति या समूह हस्तक्षेप न करे.

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यदि ऐसी कोई आपत्ति आती है तो प्रशासन को पूजा स्थल और श्रद्धालुओं को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए. कोर्ट ने  इस आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव गृह को भेजने का निर्देश दिया, ताकि इसे राज्य के निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके और इसका अनुपालन सुनिश्चित हो.

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