22 अप्रैल 2025 को पहलगाम घटना पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाली Folk singer नेहा राठौर को अग्रिम जमानत देने से HC ने किया इंकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद आपत्तिजनक पोस्ट करने की आरोपित folk singer नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है. जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने देखा कि folk singer नेहा सिंह राठौर द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गयी पोस्ट भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ है. पोस्ट में प्रधानमंत्री के नाम का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है. कोर्ट ने कहा कि संविधान का आर्टिकल 19 बोलने की आजादी की गारंटी देता है लेकिन यह पब्लिक ऑर्डर, शालीनता या नैतिकता के लिए उचित पाबंदियों के अधीन है.
कहा गया कि folk singer नेहा राठौर ने एक्स पर यह पोस्ट उस जरूरी समय पर किए, जब 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी. यह आदेश लगभग 2.5 महीने बाद आया है जब हाईकोर्ट ने इस मामले में folk singer नेहा सिंह राठौर की एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी. इसमें उन पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने समेत कई आरोप थे.
Folk singer नेहा राठौर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आरोप है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर भारत विरोधी बयान दिए. सरकार ने दलील दी कि ऐसे समय में जब सरकार पाकिस्तान से बदला लेने की तैयारी कर रही थी और उसने सख्त पाबंदियां लगा दी थीं Folk singer नेहा राठौर आपत्तिजनक पोस्ट कर रही थीं. इसे देश की एकता और अखण्डता पर बुरा प्रभाव छोड़ने वाला बताया गया. आरोप है कि इन पोस्ट का मकसद लोगों को धर्म और जाति के आधार पर एक-दूसरे के खिलाफ अपराध करने के लिए उकसाना था.
Folk singer नेहा राठौर की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट पूर्णेंदु चक्रवर्ती ने दलील दी कि एफआईआर सिर्फ वीडियो क्लिप और एक्स पर किये गये पोस्ट पर आधारित थी जो सरकार के खिलाफ असहमति की आवाज थे. उन्होंने कहा कि असहमति जताना देश के खिलाफ अपराध करने या देशद्रोह करने के बराबर नहीं है.
उन्होंने इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए तर्क दिया कि विचारों और नजरिए को जाहिर करने की आजादी के बिना भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत गारंटी वाली इज्जतदार जिंदगी जीना नामुमकिन है.
स्टेट की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता वीके सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट उनके मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश (अक्टूबर, 2025 में पास) को देखते हुए मौजूदा मामले के तथ्यों और कानूनी पहलुओं को नहीं समझ सकता है, जिसमें राठौर को चार्ज तय करते समय ये सभी मुद्दे उठाने के लिए कहा गया.
उन्होंने कहा कि यह निर्देश संविधान के आर्टिकल 141 के तहत हाईकोर्ट के लिए मानना जरूरी है. अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद भी वह सहयोग करने के पहले के निर्देशों के बावजूद Folk singer नेहा राठौर पुलिस जांच से बच रही हैं. वह किसी भी राहत की हकदार नहीं हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि Folk singer नेहा राठौर राठौर ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री जैसे उसके नेता के खिलाफ गलत इरादे दिखाए और दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करने की कोशिश की. उनके पोस्ट पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर सर्कुलेट हुए जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ नैरेटिव सेट करने के लिए किया गया.
Folk singer को अंकित भारती बनाम स्टेट ऑफ यूपी में हाईकोर्ट की फुल बेंच के फैसले के अनुसार पहले सेशंस कोर्ट जाना चाहिए था
शुरू में राज्य ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी के बारे में यह तर्क देते हुए शुरुआती आपत्ति जताई कि Folk singer नेहा राठौर को अंकित भारती बनाम स्टेट ऑफ यूपी में हाईकोर्ट की फुल बेंच के फैसले के अनुसार पहले सेशंस कोर्ट जाना चाहिए था. हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया और यह देखते हुए Folk singer नेहा राठौर को सीधे हाईकोर्ट जाने की इजाजत दी कि वह बिहार की रहने वाली हैं लखनऊ की नहीं. लोकल जूरिस्डिक्शन के बाहर उन पर अरेस्ट का खतरा है.
मेरिट के आधार पर हाईकोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले ऑर्डर से उसके हाथ बंधे हुए हैं. उसने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह ऑब्जर्वेशन कि राठौर चार्ज फ्रेम करने के स्टेज पर ये सभी मुद्दे उठा सकती हैं, भारत के संविधान के आर्टिकल 141 के अनुसार उस पर बाइंडिंग है. हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस स्टेज पर Folk singer नेहा राठौर के खिलाफ चार्ज बनाए गए या नहीं इस पर कोई राय नहीं दे सकता. कोर्ट ने एंटी सेपेट्री बेल अप्लीकेशन खारिज करते हुए उन्हें कानून के तहत उपलब्ध लीगल रेमेडी लेने की आजादी दी.