कोलेजियम सिस्टम सही, राज्य, केंद्र सरकार और एजेंसियों के इनपुट से ही होती हैं नियुक्तियां: CJI
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में कांस्टीट्यूशन एंड कांस्टीट्यूशनलिज्म: द फिलास्फी ऑफ डॉ. बीआर अम्बेडकर विषय पर हुआ सेमिनार

चीफ जस्टिस आफ इंडिया जस्टिस (CJI) बीआर गवई ने कोलेजियम सिस्टम को सही ठहराते हुए कहा कि इस व्यवस्था में नियुक्तियों में राज्य सरकार और केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों के इनपुट शामिल होते हैं और इसके आधार पर ही न्यायमूर्तियों की नियुक्ति होती है. CJI ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा संविधान में निहित है. कई देशों में केंद्र और राज्यों में अलग-अलग संविधान कार्य करते हैं, लेकिन भारत में एक की संविधान राज्यों और केंद्र के लिए कार्य करता है.
जिला स्तर से न्यायिक व्यवस्था प्रारंभ होकर हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक जाती है. इससे सभी को न्याय की अवधारणा संभव हो पाई है. नेपाल, बाग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के अस्थिर लोकतंत्र का उदाहरण देते हुए CJI ने कहा कि भारत में संविधान के कारण ही लोकतंत्र की नीव मजबूत है.
CJI शनिवार को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ‘कांस्टीट्यूशन एंड कांस्टीट्यूशनलिज्म : द फिलोस्फी ऑफ डॉ. बी आर अम्बेडकर’विषय पर आयोजित सेमिनार को चीफ गेस्ट के तौर पर सम्बोधित कर रहे थे. प्रोग्राम की शुरुआत गेस्ट्स के दीप प्रज्जवल से हुई. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की 15 यूपी एनसीसी बटालियन ने अतिथियों को गार्ड आफ ऑनर दिया. इसके बाद विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया. सेमिनार में CJI बीआर गवई को सम्मानपत्र प्रदान किया गया.
प्रोग्राम को सम्बोधित करते हुए CJI ने कहा कि डा. अंबेडकर के कारण भी भारतीय संविधान में एकल नागरिकता को स्वीकर किया गया. उसने प्रयासों से ही देश की शक्ति संरचना को तीन चारणों यानी विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में समांतर रूप से विभाजित किया जा सका. उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जोर दिया. CJI ने आर्टिकल 32 को संविधान की आत्मा बताया और कहा कि इसके बिना संविधान निर्जीव है. राज्यों एवं केंद्र के बीच शक्ति संतुलन बहुत जरूरी है.

संविधान से प्रदत्त मौलिक अधिकारों का जिक्र करते हुए CJI जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि जीने के अधिकार में भोजन, स्वच्छ हवा-पानी और शिक्षा का अधिकार निहित है. अनेकता में एकता ही भारत की आत्मा है और विविधता, सामुदायिक भाईचारा और समानता से ही देश समृ़द्ध होगा. सामाजिक समानता और उदारवादिता के मध्य सामंजस्य से ही देश की प्रगति संभव है.
CJI ने कहा कि डा. अंबेडकर के सामाजिक क्रांति के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक न्याय संभव हो सका है. भारतीय संविधान के लिए सभी समान हैं, कोई उच्च या निम्न नहीं है. भारतीय संविधान पन्नों में नहीं बल्कि भारत के लोगों में ही निहित है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि डा. भीमराव रामजी अंबेडकर भारतीय संविधान के निर्माता थे. उन्हांने उदारवाद और सामाजिक न्याय के विचार को जन्म दिया. कोई भी व्यक्ति भारतीय संविधान से ऊपर नहीं है. डा. अंबेडकर समाज में व्याप्त जाति, लिंग और समाज आधारित भेदभाव को समाप्त करने के पक्षधर थे. उन्होंने ही सभी के लिए सुलभ न्याय की अवधारणा को संविधान के जरिए रखा. उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई का कार्यकाल युवाओं के लिए प्रेरणा देता रहेगा.
इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरूण भंसाली ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के जीवन और कार्यों ने वर्तमान भारत की नींव रखी. हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉ. आंबेडकर का दृष्टिकोण केवल एक कानूनी दस्तावेज़ का मसौदा तैयार करने तक सीमित नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व से परिपूर्ण देश के निर्माण का एक नैतिक वादा था.

बाबासाहेब के लिए, संविधान समाज में व्याप्त असमानता और अस्पृश्यता को दूर करने का एक महत्वपूर्ण साधन था. डॉ. आंबेडकर की संविधान की समझ कानून के लिखित प्रावधानों से कहीं आगे तक जाती है. बाबासाहेब का मानना था कि भारत में लोकतंत्र की सफलता संवैधानिक नैतिकता के विकास पर निर्भर करती है.
वाइस चांसलर प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि CJI का इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आना गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारत में शिक्षा का चौथा सबसे पुराना स्तंभ है. यूनिवर्सिटी ने देश को कई प्रतिभाओं से नवाजा है. शिक्षा ही सही मायने में देश का निर्माण कर सकती है.
उन्होंने कहा कि इविवि वर्तमान में सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से तीसरा सबसे ज्यादा लोकप्रिय विश्वविद्यालय है. उन्होंने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया. डा. सोनल शंकर ने स्वागत भाषण दिया और सेमिनार के महत्व पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे.
CJI ने किया यूनिवर्सिटी में नवनिर्मित तीन नए भवनों का इनॉगरेशन
चीफ जस्टिस आफ इंडिया (CJI) बीआर गवई, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरूण भंसाली और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने यूनिवर्सिटी में तीन नवनिर्मित भवनों लोकार्यपण किया. इसमें न्यू कैमेस्ट्री बील्डिंग, लेक्चर थियेटर कांप्लेक्स और केन्द्रीय पुस्तकालय का रीडिंग हाल शामिल है.
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