Transgender के शैक्षिक दस्तावेजों में नाम और लिंग बदलने से इंकार का आदेश रद, 6 हफ्ते में नाम परिवर्तित कर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर (Transgender) के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने माध्यमिक शिक्षा परिषद बरेली के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें याची शरद रोशन सिंह के शैक्षिक दस्तावेजों में नाम और लिंग परिवर्तन की मांग ठुकरा दी गई थी. याची ने लिंग परिवर्तन (महिला से पुरुष) सर्जरी के बाद जिला मजिस्ट्रेट से पहचान और जेंडर परिवर्तन (Transgender) प्रमाण-पत्र प्राप्त किया था.

इसके बाद अपने शैक्षिक प्रमाण-पत्रों में नाम और लिंग परिवर्तन का अनुरोध किया. परिषद ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि नाम सुधारने में अत्यधिक देरी करने की कोई प्रक्रिया नहीं है और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 इस पर लागू नहीं होता. याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी.
याची अधिवक्ता अश्वनी कुमार शर्मा व आकाश कुमार शर्मा ने दलील दी कि याची (Transgender) का उनके दस्तावेज में नाम न बदलना ट्रांसजेंडर (Transgender) अधिनियम का उल्लंघन है. कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने अधिनियम, 2019 की धारा 20 की अवहेलना की है, जो एक विशेष कानून है और अन्य सभी कानूनों पर वरीयता रखता है.
साथ ही, अधिनियम के नियम 5(3) और उसके अनुसंलग्नक-1 के तहत ट्रांसजेंडर (Transgender) व्यक्ति को शैक्षिक प्रमाण-पत्रों सहित सभी आधिकारिक दस्तावेजों में नाम, लिंग और फोटो बदलने का अधिकार प्राप्त है.
सरकार की निष्क्रियता से Transgender के समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव के संवैधानिक अधिकारों का हनन
कोर्ट ने कहा कि सरकार की निष्क्रियता से ट्रांसजेंडर (Transgender) के समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव के संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है. कोर्ट ने 8 अप्रैल 2025 के विवादित आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार व बोर्ड को निर्देश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के शैक्षिक दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन कर नए प्रमाण-पत्र जारी करें.
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