ट्रांसजेंडर और समलैंगिक जोड़े को live in relation में रहने की अनुमति, कोर्ट ने कहा, ऐसे संबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन नहीं करते

मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र से जुड़ा मामला है. कोर्ट में पेश किये गये तथ्यों के अनुसार दोनों याची बालिग हैं और उन्होंने स्वेच्छा से Liv-in Relation में रहने का फैसला लिया है. याचियों का कहना था कि परिवार से ही उनकी जान-माल को खतरा है. स्थानीय पुलिस से सुरक्षा की मांग की किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट की शरण ली.
जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है और परिवार या समाज इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2018) मामले का हवाला दिया, जिसमें समलैंगिक संबंधों को मान्यता देते हुए आईपीसी की धारा 377 समाप्त कर दिया था.
कोर्ट ने कहा कि ऐसे संबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन नहीं करते. अकांक्षा बनाम यूपी राज्य (2025) मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने पुष्टि की कि शादी न होने या शादी न कर पाने की स्थिति में भी जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार सुरक्षित रहते हैं.
“एक बार जब कोई बालिग व्यक्ति अपना जीवन साथी चुन लेता है, तो परिवार या किसी अन्य को उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है. राज्य का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन स्वतंत्रता की रक्षा करे.”
कोर्ट ने स्पष्ट किया
live in relation में शांतिपूर्ण जीवन में कोई बाधा आती है, तो वे पुलिस कमिश्नर या एसएसपी से संपर्क करें
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर याचिकाकर्ताओं के शांतिपूर्ण जीवन में कोई बाधा आती है, तो वे पुलिस कमिश्नर या एसएसपी से संपर्क करें. पुलिस तुरंत सुरक्षा प्रदान करेगी. अगर दस्तावेजी सबूत न हों, तो पुलिस ऑसिफिकेशन टेस्ट या अन्य कानूनी प्रक्रिया अपनाकर उम्र सत्यापित कर सकती है. अगर कोई अपराध दर्ज नहीं है तो पुलिस जबरन कोई कार्रवाई नहीं करेगी.