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केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे Terms of Respect क्यों नहीं? हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के अपर मुख्य सचिव गृह से मांगा जवाब

केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे Terms of Respect क्यों नहीं? हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के अपर मुख्य सचिव गृह से मांगा जवाब

प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उचित सम्मानसूचक शब्द (Terms of Respect) जोड़े जाएं

इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही शिकायतकर्ता ने मंत्री का उल्लेख इस तरह किया हो लेकिन पुलिस का दायित्व था कि एफआईआर दर्ज करते समय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उचित सम्मानसूचक शब्द (Terms of Respect) जोड़े जाएं. अदालत ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें आपराधिक धमकी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े आरोपों को चुनौती दी गई और उसी एफआईआर में संबंधित केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल है.

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हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश दिया कि वह यह निर्देश 48  घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं. मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी. हाईकोर्ट ने यह आदेश हर्षित शर्मा व दो अन्य की तरफ से दाखिल याचिका पर दिया है. मामला मथुरा का है.

लोकतंत्र सेनानी की विधवा को पेंशन देने पर निर्णय लेने का जिलाधिकारी को निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकतंत्र सेनानी की विधवा को पेंशन देने पर जिलाधिकारी बांदा को चार हफ्ते में निर्णय लेने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा याची नये सिरे से नियमानुसार फार्मेट में अर्जी दे और जिलाधिकारी उप्र फाइटर्स आफ डेमोक्रेसी आनर एक्ट के तहत निर्णय लेकर हाईकोर्ट में दाखिल करें.

कोर्ट ने कहा याची को जिलाधिकारी के नकारात्मक आदेश के चलते दुबारा हाईकोर्ट न आना पड़े इसलिए याचिका लंबित रखी जा रही. अगली सुनवाई 7 मई को होगी. यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने श्रीमती राकेश कुमारी की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस मिश्र व चंद्र केश मिश्र ने बहस की.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का कहना है कि याची लोकतंत्र सेनानी अर्जुन सिंह की विधवा है. उसके पति आपातकाल में मीसा के अंतर्गत बंद किए गए थे. नियमानुसार वह 26 हजार रूपये प्रतिमाह पेंशन पाने की हकदार हैं. उसने जिलाधिकारी को अर्जी दी थी. वहां कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की.

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यहां से भी उसे कोई पॉजिटिव रिस्पांस नहीं मिला तो उसने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करके लोकतंत्र सेनानी की पेंशन दिलाने की गुहार लगायी. सरकारी वकील ने कहा याची की अर्जी फार्मेट में नहीं थी. जिसके कारण विचार नहीं किया गया. इस पर कोर्ट ने याची को तय फार्मेट में अर्जी देने और जिलाधिकारी को उसे तय करने का निर्देश दिया है.

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