डेट आफ बर्थ करेक्शन के 3 प्रयास करने वाले Minor को राहत, पिता की मंशा की जांच करेगी क्राइम ब्रांच
प्राइमाफेसी कोई अपराध हुआ है तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज करके कार्रवाई करे: हाई कोर्ट

Minor बेटे की डेट आफ बर्थ को चेंज कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले माइनर की गुजारिश तो कोर्ट ने तथ्यों को परखने के बाद मान ली लेकिन पिता पर कार्रवाई की तलवार भी लटका दी. कोर्ट ने आधार कार्ड बनाने और उसकी देखरेख करने वाली UIDAI को निर्देश दिया है कि वह Minor की डेट आफ बर्थ करेक्ट करने के लिए उचित कदम उठावे. लेकिन, कोर्ट ने यह भी यह भी कह दिया कि Minor याचिकाकर्ता के पिता के काम को कोर्ट ने अनदेखा कर दिया तो वह धोखे और मनगढ़ंत डॉक्यूमेंट्स को बढ़ावा दे रहा होगा.
इसलिए मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर पुलिस की क्राइम ब्रांच डॉक्यूमेंट की शुरुआती जांच करे. शुरुआती जांच के बाद उसे यह लगता है कि डॉक्यूमेंट बनाने से जुड़ा कोई अपराध हुआ है तो वह माइनर के पिता जय नारायण और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करके कानून के अनुसार कार्रवाई करे.
यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने माइनर के पिता जय नारायण की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है. मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से जुड़ा हुआ है. पिटीशन आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 5.6.2013 की जगह 5.6.2012 करने के लिए फाइल की गई थी.
इस मामले में कोर्ट ने प्रिंसिपल, गुरुदेव पब्लिक स्कूल, दरौता लालपुर, जिला फतेहपुर की ओर से कोर्ट में दाखिल वकालतनामा को रिकॉर्ड में ले लिया. प्रिंसिपल ने खुद कोर्ट में पेश होकर ओरिजिनल रिकॉर्ड पेश किया. इसमें पिटीशनर Minor की जन्मतिथि 5.6.2012 दर्ज मिली.
प्रिंसिपल की तरफ से पेश वकील ने कहा कि प्रिंसिपल, गुरुदेव पब्लिक स्कूल, दारौता लालपुर का जारी किया गया सर्टिफिकेट 17.11.2022 का है, जिसमें पिटीशनर Minor की जन्मतिथि 2.7.2014 दर्ज है, जो एक नकली डॉक्यूमेंट है.
कोर्ट ने माना कि डॉक्यूमेंट्स देखने पर ऐसा लगता है कि पिटीशनर की जन्मतिथि कई थी. इसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट के जरिए यूनियन ऑफ इंडिया से एक्सप्लेनेशन मांगा गया था, जो UIDAI पोर्टल को मेंटेन करता है जो आधार कार्ड बनाता है.
Minor का आधार कार्ड पहली बार साल 2020 में स्कूल ID कार्ड का इस्तेमाल करके बनाया गया था

पिटीशनर Minor ने 11.7.2025 को आधार पोर्टल पर एक रिक्वेस्ट डाली थी कि आधार में जन्म की तारीख 5-6-2013 की जगह 5-6-2012 कर दी जाए. पिटीशनर Minor का आधार कार्ड पहली बार साल 2020 में स्कूल ID कार्ड का इस्तेमाल करके बनाया गया था, जबकि आधार में जन्म की तारीख 2.7.2014 दी गई थी.
बाद में को पिटीशनर ने UIDAI स्टैंडर्ड फॉर्मेट का इस्तेमाल करके आधार में अपनी जन्म की तारीख 2.7.2014 से बदलकर 5.6.2013 कर ली. इस तरह UIDAI पोर्टल पर जन्मतिथि में दो बार सुधार किया गया.
क्योंकि जन्मतिथि दो बार सुधारी जा चुकी थी, इसलिए 27.6.2024 को जन्मतिथि अपडेट करने की तीसरी रिक्वेस्ट को पोर्टल ने रिजेक्ट कर दिया. इसके बाद, 2.5.2025 और 19.5.2025 को पिटीशनर Minor ने फिर से जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके 5.6.2013 से 5.6.2012 तक आधार में अपनी जन्मतिथि अपडेट करने की कोशिश की, लेकिन अपडेट के समय सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म जमा न करने के कारण उसे फिर से रिजेक्ट कर दिया गया.
पिटीशनर Minor की जन्मतिथि को लेकर कन्फ्यूजन एक ही स्कूल के दो डॉक्यूमेंट्स की वजह से था, एक मिनिस्ट्री ने दिया था जो गुरुदेव पब्लिक स्कूल का बताया जा रहा है जो पिटीशनर की जन्मतिथि 2.7.2014 सर्टिफाई करता है और उसी स्कूल से जुड़ी पिटीशन के दूसरे एनेक्सर में दी गई तारीख से पता चलता है कि पिटीशनर की जन्मतिथि 5.6.2012 है.
कोर्ट ने माना कि ग्राम पंचायत दरौता लालपुर द्वारा जारी पिटीशनर Minor का जन्म सर्टिफिकेट, 5.6.2012 की तारीख दिखाता है जबकि इसे 6.6.2025 को रजिस्टर किया गया है और 6.6.2025 को जारी भी किया गया है. बर्थ सर्टिफिकेट में दी गई तारीख, गुरुदेव पब्लिक स्कूल के एडमिशन के ओरिजिनल रजिस्ट्रेशन और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दी गई जन्म तारीख से मेल खाती है.
ओरिजिनल जन्म तारीख 5.6.2012 होने पर शक करने की कोई ज़रूरत नहीं है. इसी के आधार पर कोर्ट ने पिटीशन को मंजूरी देते हुए निर्देश दिया है कि UIDAI, 17.9.2025 के निर्देशों के पैराग्राफ 7 में दिए गए SOP के अनुसार पिटीशनर की जन्मतिथि में सुधार करे.
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