प्रमुख सचिव गृह बतायें एक जैसे मामले में कई FIR एकीकृत क्यों नहीं की जा रही?
एकीकृत करने के उठाए गए कदमों की मांगी जानकारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह उ प्र लखनऊ से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि एक समान अपराध की कई FIR दर्ज होने पर सभी को एकीकृत करने के बारे में क्या कदम उठाए हैं. याचिका की अगली सुनवाई 20जून को होगी. यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर तथा न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने विशाल खुराना व एक अन्य की याचिका पर अधिवक्ता ए के ओझा को सुनकर दिया है.
इनका कहना है कि एक समान अपराध को लेकर याची के खिलाफ कई FIR दर्ज है.जिन्हें एकीकृत किया जाय.कोर्ट ने डीजीपी से जानकारी मांगी थी.कि ऐसे मामले एकीकृत क्यों नहीं किए जा रहे. सरकारी वकील ने डी जी पी द्वारा जारी सर्कुलर की गाइडलाइंस पेश की. जिसमें एक अपराध में कई FIR का जिक्र किया गया है किन्तु एकीकृत करने का उल्लेख नहीं है.जिसपर प्रमुख सचिव गृह से हलफनामा दाखिल कर जानकारी मांगी है.
पचास केसों में मिली जमानत पर एक बंध पत्र व एक लाख की दो प्रतिभूति लेकर रिहा करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 50 आपराधिक मामलों में जमानत पर रिहाई आदेश के बावजूद सभी में एक बंध पत्र व दो प्रतिभूति जमा करने में असमर्थता को देखते हुए बड़ी राहत दी है.
कोर्ट ने आरोपी याची को सभी केसों में जमानत पर रिहाई के लिए एक बंध पत्र व एक लाख की दो प्रतिभूति जमा करने की अनुमति दी है. यह आदेश न्यायमूर्ति एस के पचौरी की एकलपीठ ने कानपुर नगर के सुमित अवस्थी की याचिका पर अधिवक्ता ए के ओझा को सुनकर दिया है.
सोसल मीडिया में विज्ञापन देकर ठगी करने के आरोपी को सशर्त जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिलायंस थर्मल पावर कंपनी में नौकरी दिलाने का सोसल मीडिया मे फर्जी विज्ञापन प्रसारित कर ठगने के आरोपी को सशर्त जमानत दे दी है. यह आदेश जस्टिस राजबीर सिंह की बेंच ने आरोपी देशबंधु गौतम की जमानत अर्जी पर दिया.
शाहजहांपुर जिले के रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र में दर्ज FIR के अनुसार देशबंधु गौतम ने सोशल मीडिया पर एक फर्जी विज्ञापन डाला, जिसमें रिलायंस थर्मल पावर कंपनी में नौकरी देने का वायदा किया गया था. इस झांसे में आकर 49 लोगों ने आवेदन किया और हर व्यक्ति से 316 रुपये आवेदन शुल्क के रूप में लिए गए. इस तरह कुल करीब 15,000 रुपये की ठगी की गई. पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. आरोपी को सत्र अदालत से राहत नहीं मिली तो उसने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की.
याची का कहना था कि उसे केवल मोबाइल नंबर के आधार पर फंसाया गया है और उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है. साथ ही आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है,ठगी में शामिल होने का उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं है और वह लंबे समय से जेल में बंद है. याची का कहना था कि गबन धोखाधड़ी षड्यंत्र के आरोप में एक समान अपराध को लेकर बिठूर थाने में उसके खिलाफ पचास FIR दर्ज की गई है. अपराध स्वीकार करने के आधार पर केस चल रहा है
उसके खिलाफ केवल मोबाइल फोन के अलावा अन्य साक्ष्य नहीं है.वह 11 मई 15 से जेल में बंद हैं. 15 अप्रैल 25 को उसे आखिरी जमानत मिली है.वह गरीब है. हर केस में बंध पत्र व दो प्रतिभूति जमा करने में असमर्थ हैं. सभी केस एक अदालत में विचाराधीन है. इसलिए सभी केसों के लिए एक बंध पत्र व दो प्रतिभूति लेकर रिहा किया जाय. जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.
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