अदालतों पर Online abuses हद पार कर रहीं’ इलाहाबाद हाईकोर्ट की सोशल मीडिया यूजर्स को कार्रवाई की सख्त चेतावनी

कोर्ट ने गहरी चिंता के साथ यह टिप्पणी की कि बोलने की आजादी की आड़ में आपराधिक अवमानना के मामले (Online abuses) आजकल “सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा हैं”. मामला बस्ती डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में वकील हरि नारायण पांडेय के खिलाफ आपराधिक अवमानना का है.
Online abuses के बहुत सारे मामलों पर ज्यूडिशियल ध्यान दे रही है

हालांकि कोर्ट ने पांडेय की बिना शर्त माफी मान ली, लेकिन कहा कि बोलने की आज़ादी के नाम पर सोशल मीडिया का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. बहुत सारे मामले हैं, जो हद पार (Online abuses) करते हैं. ये बातें कहने का मौका तब आया, जब हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि क्रिमिनल कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट होना “रोजमर्रा की बात” बन गई है. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के वकील की चिंता निश्चित रूप से गलत नहीं थी और इसमें बहुत समझदारी थी.
कहा कि हालांकि वह इस मुद्दे पर ज्यूडिशियल नोटिस नहीं ले रही है लेकिन वह सोशल मीडिया पर क्रिमिनल कंटेम्प्ट (Online abuses) के बहुत सारे मामलों पर ज्यूडिशियल ध्यान दे रही है. कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि मीडिया पर की गई गाली-गलौज (Online abuses) किसी भी तरह से सही कमेंट या किसी फैसले की सोची-समझी आलोचना के दायरे में नहीं आ सकती.
“हम लोगों को भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी देना चाहते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर ऐसे शब्द सर्कुलेट होते हैं जो बहुत साफ तौर पर अपमानजनक होते हैं. जिसके लिए अवमानना की सजा मिल सकती है, जिसे कोर्ट देने में संकोच नहीं करेगी.”
कोर्ट ने कहा