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डीके बसु केस की Guideline की अवहेलना पर SHO और अन्य पुलिस कर्मचारियों को आपराधिक अवमानना नोटिस

डीके बसु केस की Guideline की अवहेलना पर SHO और अन्य पुलिस कर्मचारियों को आपराधिक अवमानना नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु केस के दिशा-निर्देश (Guideline) की अवहेलना करने को लेकर दाखिल आपराधिक अवमानना याचिका पर तत्कालीन एसएचओ कल्याणपुर रमा शंकर सरोज, चौडगर पुलिस चौकी इंचार्ज मनोज कुमार, कांस्टेबल बृजेंद्र सिंह व कांस्टेबल दुर्गेश सिंह को नोटिस जारी की है और पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की जाय. याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 20 जनवरी 26 नियत की गई है. यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच ने शैलेन्द्र सिंह की आपराधिक अवमानना याचिका पर दिया है.

याची की तरफ से कोर्ट में उसका पक्ष रखने वाले अधिवक्ता का कहना है कि 16 सितंबर-2025 को फतेहपुर जनपद के कल्याणपुर थाने के अंतर्गत आने वाले ग्राम पहुर निवासी शैलेन्द्र सिंह को थाना थानाध्यक्ष रमा शंकर सरोज, चौकी प्रभारी चौडगरा मनोज कुमार सिंह एवं उनके साथी पुलिस कर्मियों ने थाना कल्याणपुर में शिकायत करने जाने पर देर शाम तक गैरकानूनी ढंग से पुलिस अभिरक्षा में रखकर प्रताड़ित किया गया.

Guideline का उल्लंघन किया

पुलिस का यह कृत्य सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा डीके बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य केस में दिए गए दिशा निर्देशों (Guideline) का उल्लंघन किया. जिस पर याची ने महाधिवक्ता के समक्ष आपराधिक अवमानना याचिका दायर करने की अनुमति अर्जी दी. किन्तु जब लंबे समय तक महाधिवक्ता द्वारा कोई आदेश नहीं दिया गया तो हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अनुमति मांगी. जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और आपराधिक अवमानना याचिका विपक्षी पुलिस अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर सफाई मांगी है.

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मेरठ के ठेकेदार बालेश त्रिपाठी के खिलाफ भ्रष्टाचार केस की कार्यवाही रद, बाकी आरोपितों पर चलेगा केस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहन एक्सपोर्ट प्रा. लि. के डायरेक्टर बालेश त्रिपाठी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मेरठ की अदालत में चल रहे आपराधिक केस में संज्ञान आदेश को गलत मानते हुए रद कर दिया है और कहा है कि इस आदेश का फायदा अन्य अभियुक्तों जिनपर केस चल रहा है को नहीं मिलेगा. यह आदेश जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने अदालत के याची के खिलाफ बिना सबूत लिए गये संज्ञान आदेश की वैधता की चुनौती याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है.

याचिका पर अधिवक्ता प्रखर शुक्ल ने बहस की. इनका कहना था कि याची कांट्रैक्टर है. डा भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा ने कुछ काम कराया.काम की प्रक्रिया का पालन न करने अनियमितता बरतने को लेकर थाना हरिपर्बत, आगरा में एफआईआर दर्ज हुई. पुलिस ने चार्जशीट दायर की और विशेष अदालत मेरठ ने संज्ञान लिया.

याची का कहना है कि उसे प्रक्रिया तय करने का अधिकार नहीं था, न ही काम की उसकी जवाबदेही थी. अवैध प्रक्रिया अपनाने में उसकी कोई भूमिका नहीं थी. उसे बिना सबूत लपेटा गया है. उसके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनाता. वह ठेकेदार था. एफआईआर में उसके काम में कोई खामी नहीं बताई गई है. काम से विश्वविद्यालय संतुष्ट हैं. प्रक्रिया की गलती से उसका कोई लेना देना नहीं है. इसलिए केस कार्यवाही रद की जाय.

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