निठारी कांड 2006: सुरेंद्र कोली की curative petition मंजूर

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निठारी कांड के मुख्य आरोपित सुरेन्द्र कोली की curative petition को मंजूर कर लिया. Petition में सुरेन्द्र कोली की तरफ से मौत की सजा को चुनौती दी गयी थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा curative petition मंजूर करने के साथ ही सुरेन्द्र कोली के स्वतंत्र होने का रास्ता साफ हो गया है क्योंकि इससे जुड़े अन्य केसेज में वह पहले ही बरी हो चुका है. यह आदेश चीफ जस्टिस आफ इंडिया जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने सुनाया है. तीन जजों की बेंच ने कोली की याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की थी.
उत्तर प्रदेश के नोएडा जिले में निठारी हत्याकांड का खुलासा 29 दिसंबर, 2006 को हुआ था. व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने के साथ हुआ था. यह तथ्य सामने आने के बाद देश भर में चर्चा शुरू हो गयी थी. इस केस का मीडिया ट्रायल भी खूब हुआ था.
petition मंजूर
इसके चलते फैसले के प्रभावित होने की बात भी उठी थी. उस वक्त यह तथ्य दब गया था लेकिन मंगलवार को सुनाये गये फैसले में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने इसे कोट किया है. बेंच ने सीबीआई की लचर जांच पर भी सवाल खड़े किये हैं.

आरोपित सुरेन्द्र कोली को नोएडा के निठारी गाँव में 15 साल की एक लड़की के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था. कोर्ट ने उसे सजा ए मौत मुर्करर्र की थी. ट्रायल कोर्ट के फैसले को पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी थी. फरवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सजा बरकरार रखी थी.
उसकी पुनर्विचार याचिका 2014 में खारिज कर दी गई थी. जनवरी 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी मर्सी पिटीशन पर फैसले में अत्यधिक देरी के कारण उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया.
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी के कई अन्य मामलों में कोली और सह-आरोपी पंढेर को बरी कर दिया और 2017 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को पलट दिया. कोर्ट ने कोली को 12 मामलों में और पंढेर को दो मामलों में बरी कर दिया. बाद में सीबीआई और पीड़ित परिवारों ने इन बरी करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में petition दाखिल कर चुनौती दी लेकिन शीर्ष अदालत ने इस साल 30 जुलाई को सभी 14 अपीलों को खारिज कर दिया.
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