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Stay आदेश का उल्लघंन कर मस्जिद की जमीन बेचने व खरीदने वालों को नोटिस, 9 दिसंबर को सुनवाई

इलाहाबाद HC ने मांगी सफाई क्यों न की जाय अवमानना कार्यवाही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यथास्थिति (Stay) कायम रखने के आदेश की अवहेलना कर मेरठ की एक मस्जिद की जमीन बेचने के आरोपियों मोहम्मद अशरफ व अन्य को अवमानना नोटिस जारी की है और स्पष्टीकरण मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न की जाय. याचिका की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी. यह आदेश जस्टिस दिनेश पाठक ने अब्दुल वहाब की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

Stay आदेश का उल्लघंन कर मस्जिद की जमीन बेचने व खरीदने वालों को नोटिस, 9 दिसंबर को सुनवाई

याचिका पर अधिवक्ता सैयद वाजिद अली ने बहस की. उनका कहना था कि विपक्षी ने अन्य विपक्षियों के पक्ष में मस्जिद की जमीन का बैनामा व विक्रय करार किया है. जबकि हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ द्वितीय अपील की सुनवाई करते हुए यथास्थिति (Stay) कायम रखने का आदेश दिया है.

सैयद वाजिद अली का यह भी कहना है कि हालांकि विपक्षी एक द्वितीय अपील में पक्षकार नहीं है, फिर भी अंतरिम आदेश (Stay) उस पर भी बाध्यकारी है. क्योंकि विपक्षी मस्जिद एरिया में पड़ोसी हैं. विवाद व अंतरिम आदेश (Stay) की उसे जानकारी है.

यह भी तर्क दिया कि तीसरे पक्ष जो वाद में पक्षकार नहीं हो के खिलाफ भी अवमानना याचिका पोषणीय है यदि उसने आदेश का उल्लघंन किया हो. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला भी दिया. बता दें कि याची के पिता चंदा खान ने 1978 में इस्लाम व अन्य के खिलाफ मुंसिफ मवाना, मेरठ की अदालत में सिविल वाद दायर किया था जो 2 मई 90 को वादी के पक्ष में डिक्री हो गया.

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हाईकोर्ट ने 18 जून 2002 को यथास्थिति (Stay) कायम रखने का आदेश दिया था

इस आदेश के खिलाफ दो अपीलें दाखिल की गई. एक श्रीमती बुंदी व अन्य व दूसरी मदरसा इस्लामिया व अन्य ने दायर किया. अपील मंजूर करते हुए अपीलीय अदालत ने मुंसिफ कोर्ट के आदेश को रद कर दिया और सिविल वाद खारिज कर दिया. जिसे मूल वादी के बेटे ने हाईकोर्ट में द्वितीय अपील में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने 18 जून 2002 को यथास्थिति (Stay) कायम रखने का आदेश दिया है. इसके बावजूद विपक्षी ने दो अन्य विपक्षियों को बैनामा व विक्रय करार करके हाईकोर्ट के आदेश की अवज्ञा की है.

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