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Minor के परिवार की नाराजगी से घर से भागकर किसी के साथ 67 दिन रहने मात्र से अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने अपहरण के आरोप में आपराधिक केस कार्यवाही रद की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि माता पिता की फटकार के बाद Minor के स्वयं घर छोड़कर प्रेमी से मिलने और नेपाल जाकर 67 दिन साथ रहने के Minor पीड़िता के बयान को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि उसका अपहरण किया गया था. कोर्ट ने कहा Minor के अपनी मर्जी से घर से भागकर किसी के साथ रहने मात्र से अपराध नहीं बनता.

Minor के परिवार की नाराजगी से घर से भागकर किसी के साथ 67 दिन रहने मात्र से अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने अपहरण के आरोप में आपराधिक केस कार्यवाही रद की

कोर्ट अपहरण के आरोप में विशेष जज अपर सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थनगर द्वारा जारी सम्मन आदेश सहित आपराधिक केस कार्यवाही रद कर दी है. यह आदेश जस्टिस अनिल कुमार ने सुनील की अपील पर दिया है. जिसमें संज्ञान लेने व सम्मन जारी करने सहित केस कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी.

अपील पर अधिवक्ता दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बहस की. इनका कहना था कि पीड़िता 17 साल की Minor है. माता-पिता की डांट फटकार के कारण उसने घर छोड़ दिया और अपीलार्थी से आ मिली. इसके बाद दोनों साथ रहे. कुछ दिनों के लिए वे नेपाल भी गयी और घूमकर आए. वापस लौटने पर भी वह अपने पिता के घर नहीं गई.

Minor पीड़िता ने कोर्ट में बयान दिया कि वह पिछले चार साल से अपीलार्थी से बातचीत कर रही है. दोनों एक दूसरे को भली भांति जानते हैं. वह पिता की डांट से नाराज होकर गयी थी. इसके बाद दोनों घूमने के लिए नेपाल गये और साथ में रहे लेकिन इस दौरान उसके साथ कोई गलत काम नहीं हुआ.

Minor पीड़िता ने कोर्ट में बयान दिया

उसने अपने बयान में कहा कि वह खुद घर छोड़कर गयी थी, उसे कोई भगा कर नहीं ले गया था. इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि मामला अपहरण का नहीं है. इसी के चलते कोर्ट ने केस की कार्यवाही रद किये जाने का फैसला सुनाया.

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