22 महीने की सजा पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप, Maintenance न देने पर जेल भेजे गए पति की तत्काल रिहाई का आदेश

जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी ने यह राहत देते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि व्यक्ति सिविल कारावास में है, इसलिए उसकी रिहाई के लिए जमानत बांड या जमानतदार की आवश्यकता नहीं है. मामले में पति (ताहिर उर्फ बबलू) को झांसी के फैमिली कोर्ट ने पत्नी को 22 महीने तक भरण-पोषण (Maintenance) राशि न देने पर जेल भेज दिया था.
वह 3 दिसंबर 2025 से जेल में बंद था. पत्नी ने करीब 2.64 लाख रुपये Maintenance की बकाया राशि की वसूली के लिए आवेदन दिया था. फैमिली कोर्ट ने यह मानते हुए कि हर महीने के लिए अलग आवेदन जरूरी नहीं है, एक ही आवेदन पर 22 महीने की सजा सुना दी थी.
भरण-पोषण (Maintenance) न देने पर अधिकतम एक महीने की सजा ही दी जा सकती है
हाईकोर्ट में दायर याचिका में दलील दी गई कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(3) के अनुसार, भरण-पोषण (Maintenance) न देने पर अधिकतम एक महीने की सजा ही दी जा सकती है. अदालत ने इस तर्क पर विचार करते हुए नोटिस जारी किया और जेल प्रशासन को आदेश भेजकर पति को तुरंत रिहा करने के निर्देश दिए.
हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि बकाया राशि की वसूली के लिए संपत्ति कुर्क करने जैसे वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते हैं न कि लंबे समय तक कारावास. मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी.
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