Lockdown के दौरान का भरण पोषण भत्ता जारी करने पर फैसला लें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना Lockdown वर्ष 2020 – 21 के दौरान जीवन यापन भरण पोषण भत्ता 4 महिने का 4 हजार रूपये के भुगतान पर छः हफ्ते में सक्षम प्राधिकारी को नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है. इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को चार हफ्ते में सक्षम अधिकारी को जरूरी दिशा-निर्देश जारी करें. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने मथुरा के चूना कंकड़ गली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चन्द्र अग्रवाल की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है.
याची का कहना था कि कोरोना Lockdown में सरकार द्वारा जारी 26 मार्च 2020 के शासनादेश के अनुसार फुटपाथ, फेरी, ढ़केल, नाई, मोची आदि को गुजारे के लिए 1000 हजार रूपये महिने भरण पोषण भत्ता दिए जाने की घोषणा की गई थी. जिसमें लिखा है कि किसी भी प्रकार का आवेदन नहीं लिया जायेगा जिससे अनावश्यक रूप से आम जन को लॉकडाउन से बाहर निकलना नहीं पड़े.
शासनादेश के बिन्दु संख्या 6 पर लिखा है कि सहायता देने के बाद भी ऐसे व्यक्ति बच सकते हैं जिनके पास परिवार की भरण पोषण भत्ता की सुविधा नहीं है. ऐसे व्यक्तियों लाभार्थियों की सूची जिलाधिकारी अनुमोदन करेंगे. क्योंकि याची Lockdown में फुटपाथ पर किताब नहीं बेचने से जीवन यापन करने से वंचित हो गया था.
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राहत आयुक्त कार्यालय की बेवसाइट पर याची का नाम प्रकाश चन्द्र अग्रवाल लाभार्थियों की सूची में दर्ज है. याची चार महीने का चार हजार रुपए पाने का हकदार हैं. दिलाया जाय. हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी मथुरा को याची के दावे का निस्तारण 3 माह में करके भरण पोषण भत्ता का भुगतान करने का आदेश दिया था.
जवाब में जिलाधिकारी मथुरा ने कहा, मथुरा जनपद को 205.25 लाख रुपए आवंटित किया गया है जो आवंटित धनराशि शासन को वापस समर्पित की जा चुकी है और सहायता धनराशि याची प्रकाश चन्द्र अग्रवाल के खाते में अन्तरित नहीं हो सकी है. याची ने जिलाधिकारी मथुरा के आदेश 02 सितंबर 2022 की चुनौती दी थी. जिसपर कोर्ट ने भत्ते के भुगतान पर आदेश पारित करने का निर्देश दिया है.
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