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‘काल्पनिक’ Advocate, ‘जाली’ हस्ताक्षर की FSL  जांच के आदेश, सुनवाई 6 जनवरी को

'काल्पनिक' Advocate, 'जाली' हस्ताक्षर की FSL  जांच के आदेश, सुनवाई 6 जनवरी को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका मामले में प्रथम दृष्टया विसंगतियां सामने आने के बाद रिकॉर्ड में दर्ज Advocate के कई हस्ताक्षरों की फोरेंसिक (FSL) जांच का निर्देश दिया है. FSL को एक महीने के भीतर एक “स्पष्ट रिपोर्ट” प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है जिसमें यह दर्शाया गया हो कि क्या सभी दस्तावेजों पर ‘अशरफ अली/ए. अली’ के हस्ताक्षर एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए थे. कोर्ट ने कहा कि क्या याचिका वापसी आवेदन पर प्रतिवादी संख्या पांच के Advocate के हस्ताक्षर उसके वकालतनामे पर किए गए हस्ताक्षरों से मेल खाते हैं. प्रकरण में अगली सुनवाई छह जनवरी को होगी.

चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने Advocate पारिजात श्रीवास्तव (मामले में प्रतिवादी संख्या पांच) की ओर से धारा 379 बीएनएसएस के तहत दायर आवेदन पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया है. इसमें आरोप है कि याची ने झूठा हलफनामा और जाली दस्तावेज दिया है. इसमें उसके Advocate के हस्ताक्षर भी हैं.

Advocate द्वारा काल्पनिक पहचान बनाई गई है

याची के Advocate अशरफ अली, अमित प्रताप सिंह (‘एपी सिंह) Advocate द्वारा काल्पनिक पहचान बनाई गई है और उक्त Advocate की पहचान का उपयोग धोखाधड़ी वाले मामले दर्ज करने के लिए भी किया जाता है. यह आवेदन प्रतिवादी संस्था फतेह मेमोरियल इंटर कॉलेज तमकुही, कुशीनगर के प्रबंधक के पुत्र के हलफनामे द्वारा समर्थित है.

जिसमें कहा गया है कि याची संगीता श्रीवास्तव ने वर्तमान याचिका को वापस लेने के लिए आवेदन दायर करते समय Advocate पारिजात श्रीवास्तव के जाली हस्ताक्षर किए और धोखाधड़ी कर उनके द्वारा इसे वापस लेने के आवेदन की प्रति भी दिखाई.

मुकदमे से जुड़े तथ्य के अनुसार संगीता गुप्ता ने जनहित याचिका में 2023 में हुए कालेज प्रबंध समिति के चुनाव को चुनौती दी थी. याची ने पारिजात के आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिवादी संख्या पांच के Advocate को व्यक्तिगत रूप से केस वापसी आवेदन सौंपा था. जनहित याचिका में केवल चुनाव को चुनौती दी गई थी. पारिजात ने प्रत्युत्तर में दावा किया कि उनके वकील ने याची से कभी मुलाकात तक नहीं की थी.

बेंच ने बार-बार ऐसे उदाहरणों पर भी ध्यान दिया जहां अलग-अलग व्यक्ति ‘अशरफ अली’ होने का दावा करते हुए दिखाई दिए हैं. कोर्ट ने पाया कि 20 अगस्त 2025 को जिस ‘अशरफ अली’ के रूप में उपस्थित व्यक्ति को आदेश पत्र पर पीठ सचिव के समक्ष अपने हस्ताक्षर करने का निर्देश दिया गया था, उसका हस्ताक्षर  रिट याचिका, वापसी आवेदन और कूरियर डिलीवरी शीट पर मौजूद हस्ताक्षरों से भिन्न था. 

न्यायालय ने रजिस्ट्री की वह रिपोर्ट भी दर्ज की जिसमें बताया गया था कि 23 जनहित याचिकाएं संगीता गुप्ता द्वारा अशरफ अली और एपी सिंह के Advocate के रूप में, अशरफ अली द्वारा एपी सिंह के वकील के रूप में, या स्वयं एपी सिंह द्वारा दायर की गई थीं.

हलफनामे में कहा गया है कि याची व याची के अधिवक्ता अशरफ अली प्रकरण की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों के बावजूद, उपस्थित नहीं हुए. केवल एपी सिंह ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए और खुद को अशरफ अली बताया. कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को सम्बंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी सुरक्षित रखते हुए एफएसएल को भेजने का निर्देश दिया है.

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