Fraud से नियुक्त अध्यापकों पर क्या हुआ एक्शन, अपर निदेशक बेसिक शिक्षा 31 मार्च को तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर निदेशक बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश प्रयागराज को 31 मार्च को स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है और पूछा है कि Fraud से नियुक्त विपक्षी 7 से 12 तक के अध्यापकों की नियुक्ति की जांच रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की. कोर्ट आदेश की अवहेलना करने के अपने आचरण पर भी सफाई दे. यह आदेश जस्टिस मंजू रानी चौहान ने प्रबंध समिति महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक महाविद्यालय की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.
विपक्षी अध्यापकों की नियुक्ति (Fraud) की वैधता की शिकायत की बेसिक शिक्षा सचिव ने जांच की और रिपोर्ट पेश की. जिसमें कहा गया कि पद स्वीकृत नहीं फिर भी नियुक्ति की गई है और सरकारी खजाने से वेतन भुगतान किया जा रहा है. 15 जुलाई 2011 की सचिव की जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. अधिवक्ता के शाही ने बताया कि बीएसए के बाबू संजय कुमार नियुक्ति दस्तावेज लेकर 2009 में कोर्ट आये थे. 2011 में दस्तावेज उन्हें वापस कर दिए गए थे. अब रिकॉर्ड नहीं है.
Fraud से नियुक्त अध्यापकों पर ऐक्शन लेने का निर्देश दिया
कोर्ट ने कहा सचिव की जांच की तो रिपोर्ट पर कार्रवाई होनी चाहिए. कोर्ट ने अपर निदेशक बेसिक शिक्षा को रिपोर्ट पर Fraud से नियुक्त अध्यापकों पर ऐक्शन लेने का निर्देश दिया. किंतु कोई जवाब नहीं आया. सरकारी वकील शैलेन्द्र सिंह ने बताया अपर निदेशक को आदेश की जानकारी है किन्तु कोई जवाब नहीं आया.
विपक्षी अध्यापकों के अधिवक्ता को नियुक्ति के मूल दस्तावेज सहित जवाब दाखिल करने को कहा गया. अगली तिथि पर न जवाब आया न वकील ही हाजिर हुए. इसपर कोर्ट ने कहा कि अपर निदेशक को तलब करने के अलावा अन्य विकल्प नहीं बचा. याचिका की सुनवाई 31 मार्च को होगी.
राज्य सूचना आयुक्त को अपील तय करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयुक्त गोमतीनगर लखनऊ को ग्राम पंचायत बेटावर, जमानियां, गाजीपुर के सचिव से विकास मद में मिली राशि की जानकारी न देने के खिलाफ दायर अपील को दो माह में तय करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने मनोज कुमार राय की याचिका पर अधिवक्ता घनश्याम मौर्य को सुनकर दिया है.
अधिवक्ता का कहना था कि जन सूचना अधिकार कानून के तहत याची ने सचिव से केंद्र व राज्य सरकार से मिली विकास कार्य के लिए राशि का विवरण मांगा. कोई जानकारी नहीं दी गई तो अपील दाखिल की. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई तो राज्य सूचना आयोग को द्वितीय अपील की गई. उस पर भी कोई ऐक्शन न होने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी.