ठोस Evidence के अभाव में केवल दुश्मनी के आधार पर किसी को 396 IPC का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, HC ने रद की उम्र कैद की सजा

कोर्ट ने कहा, अभियोजन की जिम्मेदारी थी कि वह बिजली विभाग के कर्मचारी को गवाह (Evidence) के रूप में पेश करता जो यह सत्यापित करता कि गांव सकरवा को किस फीडर से बिजली मिलती थी. ऐसा होता तो वह बता सकता था कि घटना के समय गांव में बिजली थी या नहीं. कोर्ट ने इसे Evidence की महत्वपूर्ण कमी माना.
कहा अपराध के मामले में अभियोजन को अपना मामला संदेह से परे साबित करना होता है. अभियोजन की Evidence की इस कमी से मामला कमजोर होता है. अभियोजन गवाहों ने कहा है कि सभी अभियुक्तों ने अपने चेहरे को ढंके बिना बिजली की रोशनी में डकैती की, जो मानव प्रकृति के विरुद्ध है.
कोर्ट ने कहा, यह जगजाहिर तथ्य है कि डकैत आमतौर पर रात के अंधेरे में अपराध करते हैं और चेहरे को ढंकते हैं ताकि उनकी पहचान न हो सके. लेकिन इस मामले में अभियुक्तों ने पोहप सिंह के घर में डकैती की जो वादी मुकदमा टीका राम का भाई है वह भी रात में बिजली की रोशनी में चेहरे को ढंके बिना.
गवाह (Evidence) के रूप में पेश नहीं किया जाना अभियोजन के खिलाफ गया
पोहप सिंह को भी गवाह (Evidence) के रूप में पेश नहीं किया जाना अभियोजन के खिलाफ गया. मथुरा के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्तों अमर सिंह, प्रकाश उर्फ ओम प्रकाश, हरदयाल, बहोरी और बीरी सिंह को आईपीसी की धारा 396 के तहत 22 दिसंबर 1987 को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी. डकैती की यह घटना 10/11 नवंबर 1985 की रात को लगभग दो बजे हुई थी. अंधाधुंध गोलीबारी में सुफहा जाटव के पुत्र सुमेरा की मौत हो गई थी जबकि कुछ लोग घायल हुए थे.
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