Deceased Dependent Quota से भर्ती एसआई को मिलेगी ट्रेनिंग पीरिएड की फुल सैलरी, 2 माह में आदेश देने का निर्देश
हाईकोर्ट ने दिया आदेश, प्रमोशन में भी जुड़ेगा ट्रेनिंग का पीरिएड

उत्तर प्रदेश पुलिस के Deceased Dependent Quota के तहत वर्ष 2010-11 बैच में भर्ती दरोगाओं/इंसपेक्टरों ने याचिका दाखिल कर उनकी ट्रेनिंग की अवधि की सैलरी देने के सम्बन्ध में एवं ट्रेनिंग की अवधि को उनकी सेवाओं में जोड़ते हुये वेतनवृद्धि प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में हाई कोर्ट इलाहाबाद में गुहार लगायी थी.
यह आदेश जस्टिस अजीत कुमार ने रामचन्द्र दूबे पुलिस इंस्पेक्टर एवं 60 अन्य पुलिस इंस्पेक्टरों (Deceased Dependent Quota से भर्ती) द्वारा सामुहिक रूप से दाखिल की गई याचिका पर दिया है.
Deceased Dependent Quota से भर्ती SI के समकक्ष के अन्य दरोगाओं को ट्रेनिंग के पीरियड की अवधि के वेतन एवं भत्ते प्रदान किये गये
याचिका पर बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि याचियों (Deceased Dependent Quota से भर्ती) के समकक्ष के अन्य दरोगाओं व इंस्पेक्टरों को ट्रेनिंग के पीरियड की अवधि के वेतन एवं भत्ते प्रदान किये गये हैं जबकि याचियों को प्रशिक्षण की अवधि में स्टाईपेण्ड प्रतिमाह प्रदान किया गया है. याचीगणों (Deceased Dependent Quota से भर्ती) की ट्रेनिंग की अवधि को उनकी सेवाओं में नहीं जोड़ा गया है और न ही याचीगणों को अतिरिक्त वेतनवृद्धि ट्रेनिंग का पीरियड जोड़ते हुये प्रदान की गयी है.

याचियों के वरिष्ठ अधिवक्ता की दलील थी कि उक्त प्रकरण में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पेशल अपील आलोक कुमार सिंह व अन्य में यह विधि का सिद्धान्त प्रतिपादित किया है कि सीधी भर्ती एवं मृतक आश्रित कोटे (Deceased Dependent Quota से भर्ती) के तहत भर्ती द्वारा चयनित दरोगाओं को भी ट्रेनिग की पीरियड की अवधि में सैलरी दी जायेगी.
विशेष अपील में पारित आदेश दिनांक 08.09.2021 के विरुद्ध राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी योजित की थी जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गयी तत्पश्चात् उप्र शासन लखनऊ के आदेश दिनांक 29-03-2022 द्वारा याचीगणों के समकक्ष के दरोगाओं एवं इंस्पेक्टरों को प्रशिक्षण की अवधि की सैलरी प्रदान किये जाने की अनुमति प्रदान की गयी एवं तत्पश्चात् याचीगणों के समकक्ष के लोगों को ट्रेनिंग के पीरियड की सैलरी प्रदान कर दी गयी है, जबकि याचीगणों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है.
याचीगणों का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लालबाबू शुक्ला व अन्य के केस में यह विधि की व्यवस्था प्रतिपादित की है कि ट्रेनिंग का पीरियड जोड़ते हुये प्रमोशनल पे स्केल व वेतनवृद्धि पुलिस कर्मियों को प्रदान की जायेगी. याचीगणों (Deceased Dependent Quota से भर्ती) को ट्रेनिंग के पीरियड में स्टाईपेण्ड प्रतिमाह प्रदान किया गया जबकि याचीगणों को ट्रेनिंग के पीरियड की अवधि के पूर्ण वेतन व भत्ते दिये जाने चाहिये थे तथा उनके ट्रेनिंग के पीरियड की अवधि सेवा की अवधि में जोड़े जानी थी.