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कर्मचारियों के आश्रितों की भर्ती नियम, 1974 के तहत Compassion नियुक्ति योजना का उद्देश्य दुखी परिवार को तुरंत मदद देना है

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति योजना का मुख्य उद्देश्य उस दुखी परिवार को तुरंत मदद देना है जो घर चलाने वाले की असमय मृत्यु के कारण वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. जहां आवेदन पर विचार करने से पहले पात्रता की शर्तों में बदलाव होता है या जहां बाद की घटनाओं से परिवार की वित्तीय स्थिति में काफी बदलाव आता है, तो उसे भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. सिर्फ मृत्यु के समय मौजूद तथ्यों पर यांत्रिक या बहुत ज्यादा तकनीकी रूप से निर्भर रहना योजना के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देगा.

कर्मचारियों के आश्रितों की भर्ती नियम, 1974 के तहत Compassion नियुक्ति योजना का उद्देश्य दुखी परिवार को तुरंत मदद देना है

यह आदेश जस्टिस मंजू रानी चौहान ने फर्रूखाबाद नगर पालिका परिषद कर्मचारी के बेटे की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गयी थी जिसके तहत याचिकाकर्ता की अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया गया है. याचिकाकर्ता के पिता 1991 से नगर पालिका परिषद, फर्रुखाबाद में सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रहे थे. 20.05.2023 को काम के दौरान उनकी मृत्यु हो गई. वह अपने पीछे पत्नी और एक बेटा छोड़ गये थे.

याचिका उनके बेटे की तरफ से दाखिल की गयी थी. याचिकाकर्ता ने 11.07.2023 को अनुकंपा (Compassion) के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन दिया. चूंकि याचिकाकर्ता के पिता एक पुरानी बीमारी से पीड़ित थे इसलिए उनकी माँ जो ग्राम पंचायत दिलावरपुर में सफाई कर्मचारी के रूप में भी काम कर रही थीं, को अपने पति की देखभाल के लिए छुट्टी लेनी पड़ी.

पति की मृत्यु के बाद पत्नी ने अपनी सेवा फिर से शुरू की तो उन्हें कथित अनधिकृत अनुपस्थिति के लिए परेशान किया गया और इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया. मजबूरी में उन्होंने इस्तीफा दे दिया जिसे 31.05.2025 को स्वीकार कर लिया गया. याचिकाकर्ता की अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति का मामला अभी भी लंबित था इसलिए उसने 31.05.2024 को प्रतिवादी प्राधिकरण के समक्ष एक आवेदन दिया, जिसमें उसकी माँ के इस्तीफे के कारण उत्पन्न वित्तीय संकट का उल्लेख किया गया था. उक्त परिस्थितियों पर विचार किए बिना याचिकाकर्ता के अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति के दावे को मनमाने तरीके से खारिज कर दिया गया.

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति का उद्देश्य मृतक कर्मचारी के शोक संतप्त परिवार को सहायता प्रदान करना है, जिसे एकमात्र कमाने वाले की अचानक मृत्यु के कारण सदमा लगा है और वह वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. कई मामलों में अदालतों ने ऐसे परिवारों के वित्तीय संकट को दूर करने और अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति के दावे पर विचार करने के लिए पद सृजित करने में हस्तक्षेप किया है.

उन्होंने कहा कि याची के आवेदन पर उस समय विचार नहीं किया गया था और याचिकाकर्ता की माँ के इस्तीफा देने के बाद, जो दावा विचाराधीन था, उसे केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि याचिकाकर्ता की माँ एक सरकारी कर्मचारी थीं. इससे विवादित आदेश कानून की नजर में खराब, अनुचित और न्यायोचित नहीं है.

याचिकाकर्ता के वकील द्वारा तर्क दिया गया कि राहत से इनकार करने वाला तकनीकी दृष्टिकोण उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की भर्ती नियम, 19742 के तहत अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति योजना के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देगा, जिसका उद्देश्य शोक संतप्त परिवार को गरीबी से बचाने के लिए तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करना है.

सुनवाई के दौरान यह तथ्य पेश किया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमेश कुमार नागपाल बनाम हरियाणा राज्य और अन्य 3 के मामले में स्पष्ट रूप से कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य शोक संतप्त परिवार को वित्तीय संकट से बचाने के लिए तत्काल सहायता प्रदान करना है. लागू किया जाने वाला परीक्षण परिवार की वित्तीय स्थिति है, न कि अत्यधिक तकनीकी विचार.

इसी तरह, केनरा बैंक और अन्य बनाम एम. महेश कुमार 4  के मामले में न्यायालय ने दोहराया कि योजना की व्याख्या इस तरह से की जानी चाहिए जो इसके उद्देश्य को आगे बढ़ाए और आश्रितों की वित्तीय कठिनाई को कम करे.

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता के पिता की 2023 में ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी. कर्मचारी की मृत्यु के समय याचिकाकर्ता की माँ सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रही थीं, लेकिन यह निर्विवाद है कि बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जिससे परिवार के पास आजीविका का कोई पक्का साधन नहीं बचा.

ऐसी परिस्थितियों में, सिर्फ इस आधार पर कि मृत्यु के समय माँ नौकरी करती थी, याचिकाकर्ता की अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति की मांग को खारिज करना पूरी तरह से गलत है और अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति को नियंत्रित करने वाले स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है.

अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति देने के लिए तय शर्तों की जांच सिर्फ मृतक कर्मचारी की मृत्यु की तारीख को मौजूदा स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उस तारीख को मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में भी की जानी चाहिए, जिस तारीख को सक्षम अधिकारी आवेदन पर विचार करता है. अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति योजना का मुख्य उद्देश्य उस दुखी परिवार को तुरंत मदद देना है जो घर चलाने वाले की असमय मृत्यु के कारण वित्तीय संकट का सामना कर रहा है.

इसलिए, जहां आवेदन पर विचार करने से पहले पात्रता की शर्तों में बदलाव होता है, या जहां बाद की घटनाओं से परिवार की वित्तीय स्थिति में काफी बदलाव आता है, तो उसे भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. सिर्फ मृत्यु के समय मौजूद तथ्यों पर यांत्रिक या बहुत ज़्यादा तकनीकी रूप से निर्भर रहना योजना के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देगा.

अगर याचिकाकर्ता की माँ के इस्तीफे से पहले याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करते हुए विवादित आदेश पारित किया गया होता, तो मामला अलग होता, लेकिन याचिकाकर्ता की माँ के इस्तीफ़े के बाद आवेदन पर विचार करने से स्थिति अलग हो जाती है, जिसमें याचिकाकर्ता के अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति के दावे पर विचार किया जाना चाहिए था.

परिस्थितियाँ बदल गई हैं, तो Compassion appointment से इनकार नहीं किया जा सकता

सिर्फ यह तथ्य कि एक आश्रित नौकरी पर था निर्णायक नहीं है और अगर रोजगार वित्तीय संकट को कम करने के लिए अपर्याप्त था या अगर परिस्थितियाँ बाद में बदल गई हैं, तो अनुकंपा (Compassion) नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता है. कानून के उपरोक्त स्थापित सिद्धांत को देखते हुए, 1974 के नियमों के तहत की गई नियुक्ति का उद्देश्य और प्रयोजन 26.07.2025 के विवादित आदेश से विफल हो जाता है, इसलिए इसे रद्द किया जाता है.

मामला प्रतिवादी नंबर 3 को वापस भेजा जाता है ताकि वह याचिकाकर्ता की अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर इस आदेश में की गई टिप्पणियों और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार करे कि वर्तमान में याचिकाकर्ता की माँ अब किसी सरकारी सेवा में नहीं हैं.

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