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शिकायतकर्ता की गैर मौजूदगी में जातिसूचक अपमान (Caste-based insult) एससीएसटी एक्ट के दायरे में नहीं

आरोपी को राहत, विशेष कानून के तहत आपराधिक केस कार्रवाई रद, शेष अपराधों पर चलेगा केस

शिकायतकर्ता की गैर मौजूदगी में जातिसूचक अपमान (Caste-based insult) एससीएसटी एक्ट के दायरे में नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता की गैर मौजूदगी में जातिसूचक अपमानजनक गाली (Caste-based insult) देने के मामले में एससीएसटी एक्ट के तहत आपराधिक केस को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना है और इस एक्ट के तहत आपराधिक केस कार्यवाही रद कर दी है. हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय दंड संहिता या बीएनएस की धाराओं में केस जारी रहेगा. कोर्ट ने कहा एफआईआर व गवाहों के दर्ज बयान से स्पष्ट नहीं कि आरोपी ने दुर्भावनावश जातिगत अपमानित (Caste-based insult) किया है. लगता है व्यक्तिगत विवाद को आपराधिक कलर दिया गया है. एससीएसटी एक्ट (Caste-based insult) के अपराध का मूल तत्व गायब है.

यह आदेश जस्टिस मदन पाल सिंह ने थाना मुहम्मदाबाद, जिला मऊ के पत्रकार संजीव राय की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है. तत्कालीन डीप्टी एसपी अब एयरपोर्ट आजमगढ़ मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने 26 फरवरी 25 को एफआईआर कराई. आरोप लगाया कि आरोपी ने स्थानीय पुलिस को भयभीत कर अपने अनैतिक कार्य का समर्थन मांगा. फेसबुक पर लिखा अब हवाई जहाज उड़ेगी. 8 नवंबर 25 को जब वह एक स्कूल के समारोह में थे तो आरोपी ने चमारिया सियारिया (Caste-based insult) कह गालियां दी.

जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणी (Caste-based insult) से गरिमा को ठेस पहुंचाने पर अपराध

आरोपी का कहना था कि घटना स्थल को लेकर गवाहों के बयान में विरोधाभास है. शिकायतकर्ता मौके पर मौजूद ही नहीं था तो जातिसूचक अपमानजनक (Caste-based insult) नहीं हुआ. कहा गया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के तबादले का क्रेडिट ले रहा था और गाली दे रहा था. कोर्ट ने कहा विशेष कानून पब्लिक प्लेस पर जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणी (Caste-based insult) से गरिमा को ठेस पहुंचाने पर अपराध माना जाता है. इस मामले में यह मूल तत्व मौजूद नहीं है. इसलिए एससीएसटी का (Caste-based insult) केस चलने लायक नहीं है.

गैंगस्टर्स एक्ट केस  कार्यवाही पर रोक, राज्य सरकार व‌ शिकायतकर्ता से कोर्ट ने मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद शेबु उर्फ मोहम्मद शेबु के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की केस  कार्यवाही पर रोक लगा दी है और शिकायतकर्ता व राज्य सरकार से जवाब मांगा है. यह आदेश जस्टिस संजय कुमार पचौरी ने दिया है. यह मामला थाना फूलपुर, जनपद प्रयागराज से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई की गई है.

याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता चार्ली प्रकाश ने बहस किया कि गैंग चार्ट केवल एक पुराने मामले (गौकशी अधिनियम, केस क्राइम संख्या 588/2020) के आधार पर तैयार किया गया है. जिसमें गैंगस्टर एक्ट नियमावली की धारा 17, 22(2), 26 की धाराओं के भी उल्लंघन किया गया है.  कोर्ट ने मामला विचारणीय माना तथा गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत चल रही केस कार्यवाही पर रोक लगा दिया.

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नाबालिग के अपहरण दुष्कर्म के आरोपी को एक हफ्ते की मिली पे रोल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 22 से जेल में सजा काट रहे मोहम्मद परवेज उर्फ विक्की की बहन की शादी में हिस्सा के लिए एक हफ्ते की पे रोल मंजूर कर ली है. किंतु कुछ शर्तें लगाई है जिनका पालन करना होगा. कोर्ट ने सीजेएम को 10 अप्रैल से याची की रिहाई करने तथा उसे 17 अप्रैल को समर्पण करने का निर्देश देते हुए कहा है कि इस दौरान वह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त नहीं होगा, शांति से रहेगा और उसके साथ 24 घंटे एक पुलिस गार्ड मौजूद रहेगा.

कोर्ट ने सीजेएम गाजीपुर से आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी है. यह आदेश जस्टिस तेज प्रताप तिवारी ने मोहम्मद परवेज की सजा के खिलाफ अपील में दाखिल पे रोल अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है. अर्जी में कहा गया था कि बेटी की शादी में हिस्सा लेने के लिए पे रोल पर रिहा किया जाय. उसके खिलाफ नाबालिग के अपहरण व बलात्कार का आरोप है. पाक्सो एक्ट भी लगाया गया है.

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गाजीपुर की कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस चार्जशीट पर मिली सजा को अपील में चुनौती दी है. अर्जी देकर कहा 13 अप्रैल को शादी है. जिससे विवेचना अधिकारी ने भी माना किंतु कहा बेटी नहीं बहन की शादी है. कोर्ट ने कहा शादी है, इससे इंकार नहीं है. इसलिए शार्ट टर्म बेल यानि पे रोल पर रिहा किया जाय.

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