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2005 की रेडियो आपरेटर भर्ती में कट आफ से अधिक अंक पाने वाले Candidates को नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए: हाई कोर्ट

आंसर की में त्रुटि के चलते कम अंक पाकर Candidates बाहर हो गये थे, पुनर्मुल्यांकन से बढ़ गये नंबर

2005 की रेडियो आपरेटर भर्ती में कट आफ से अधिक अंक पाने वाले Candidates को नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए: हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने  पुलिस विभाग की असिस्टेंट ऑपरेटर (रेडियो) भर्ती 2005 में शामिल हुए उन Candidates को बड़ी राहत दी है जिन्होंने संशोधित परिणाम में कट-आफ से अधिक अंक प्राप्त किया है. कोर्ट ने कहा है कि जिन Candidates ने संशोधित परिणाम में कट-आफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं उन्हें भर्ती में नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए. यह फैसला जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने विभव सिंह एवं विक्रांत कुमार यादव की याचिकाओं पर दिया है. याचीगण के लिए अधिवक्ता पंकज कुमार गुप्ता तथा विजयभान सिंह ने पैरवी की.

याचीगण के अधिवक्ताओं का कहना था कि लिखित परीक्षा में आंसर की की त्रुटियों के कारण उन्हें (Candidates) कम अंक मिले, लेकिन पुनर्मूल्यांकन के बाद उनके अंक बढ़ गए और वे चयन के पात्र हो गए. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि संशोधित परिणाम में याचीगण (Candidates) के अंक कट-आफ से अधिक थे, फिर भी उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई.

कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचीगण (Candidates) दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करें. इसके बाद प्राधिकारी दस्तावेजों की जांच कर कानून के अनुसार नियुक्ति सुनिश्चित करेंगे. अन्य समान स्थिति वाले Candidates को भी कोर्ट ने अभ्यावेदन देने की छूट दी है, जिस पर संबंधित अधिकारी नियमानुसार निर्णय लेंगे.

अन्य विभागों में कार्यरत याचीगण (Candidates) को नियुक्ति लेने से पहले पद से इस्तीफा देना होगा

कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान में अन्य विभागों में कार्यरत याचीगण (Candidates) को नियुक्ति लेने से पहले पद से इस्तीफा देना होगा. साथ ही, उन्हें पूर्व अवधि का वेतन नहीं मिलेगा, लेकिन वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों पर अलग से विचार किया जाएगा. ध्यान रहे कि वर्ष 2005 की यह भर्ती प्रक्रिया अनियमितताओं के चलते पहले निरस्त कर दी गई थी. इसके खिलाफ कई Candidates ने हाई कोर्ट का रुख किया था. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह दोषी और निष्पक्ष अभ्यर्थियों को चिह्नित करे.

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मुख्य लिखित परीक्षा में Candidatesविभव सिंह ने 167 अंक और साक्षात्कार में सात अंक प्राप्त किए थे. विक्रांत कुमार यादव को मुख्य लिखित परीक्षा में 163 अंक और साक्षात्कार में नौ अंक मिले थे. पुनर्मूल्यांकन में विभव सिंह को लिखित परीक्षा में 174.94 व विक्रांत कुमार यादव के 169.88 अंक हो गए.

इस प्रकार, विभव के कुल अंक सामान्य श्रेणी में 181.94 हो गए और विक्रांत सिंह यादव के 178.88 हो गए. यह प्राप्तांक  दोनों याचीगण की श्रेणी में कट-आफ  से अधिक थे.कुल 329अभ्यर्थियो को संदिग्ध माना गया जिसमें से 11हट गये या ज्वाइन नहीं किया.318ही दागी पाये गये. जिसके बाद पुनरीक्षित प्रणाम घोषित हुआ.

जिला विद्यालय निरीक्षक व क्षेत्रीय समिति को अध्यापकों के वेतन भुगतान पर निर्णय लेने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के एक विद्यालय की प्रबंध समिति के चुनाव और शिक्षकों के सेवा संबंधी मामलों पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया है. कृषक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिसई की प्रबंध समिति ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा 27  जनवरी 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी थी. इस आदेश में कुछ शिक्षकों (Candidates) के वेतन भुगतान को लेकर निर्देश दिए गए थे. साथ ही यह भी कहा गया था कि वर्तमान में प्रबंध समिति अस्तित्व में नहीं है. यह आदेश जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है.

दलील दी गई कि जिला विद्यालय निरीक्षक को यह टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है कि प्रबंध समिति अस्तित्व में है या नहीं. अब नई प्रबंध समिति का चुनाव हो चुका है और संबंधित दस्तावेज जिला विद्यालय निरीक्षक तथा क्षेत्रीय समिति को भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

कोर्ट ने इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया कि प्रबंध समिति के चुनाव से जुड़े दस्तावेजों पर जिला विद्यालय निरीक्षक 15 दिनों के भीतर निर्णय लें. इसके अलावा, जिन शिक्षकों के खिलाफ सेवा समाप्ति का प्रस्ताव भेजा गया है, उस पर भी संबंधित अधिकारी तीन सप्ताह के भीतर सभी पक्षों को सुनकर अंतिम निर्णय लें.

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वेतन भुगतान के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि यह अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा. यदि प्रबंध समिति विधिवत वेतन बिल भेजती है तो सिंगल ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होगी और भुगतान प्रक्रिया जारी रह सकती है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा समाप्ति के प्रस्ताव और प्रबंधन समिति के अधिकार क्षेत्र से जुड़े सभी कानूनी प्रश्न संबंधित प्राधिकारी के समक्ष उठाए जा सकते हैं. इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया है.

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