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Exam में शामिल होना संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया छात्रा के लिए 15 दिन में सेमेस्टर Exam कराने और रिकॉर्ड अपडेट करने का आदेश

Exam में शामिल होना संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान

Exam में शामिल होना संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान है, और जब याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं है, तो केवल तकनीकी कमियों के कारण उसके भविष्य को खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए. इस कमेंट के साथ इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने अंतरिम उपाय के तौर पर यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के लिए शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के बीएससी (बायोलॉजी) पहले सेमेस्टर कोर्स की विशेष परीक्षा (Exam) आयोजित करे और उचित समय अवधि के भीतर Exam का परिणाम प्रकाशित करे ताकि याचिकाकर्ता अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सके.

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि यूनिवर्सिटी याचिकाकर्ता के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उचित समय अवधि के भीतर अपने रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता के रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए सभी उचित कदम उठाएगी. प्रकरण की अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी. इस बीच कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता को जवाबी हलफनामा दाखिल करके यह बताने को कहा है कि जब यूनिवर्सिटी को वेब पोर्टल पर अपडेट करने में असमर्थता के बारे में जानकारी मिलती है तो यूनिवर्सिटी द्वारा क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है.

प्रकरण प्रयागराज जिले के हंडिया कस्बे में स्थित उर्मिला देवी पीजी कालेज रासर बतौर का है. यह कॉलेज प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) यूनिवर्सिटी प्रयागराज से सम्बद्ध है. याचिकाकर्ता श्रेया पांडेय ने शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के लिए कॉलेज में बीएससी (बायोलॉजी) कोर्स में एडमिशन लिया था. 16.7.2025 को उसने कॉलेज में फीस जमा की थी और वहीं से पढ़ाई की थी.

यूनिवर्सिटी Exam में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड जारी नहीं कर सकी

Exam की घोषणा हुई तो उसे एडमिट कार्ड जारी नहीं किया गया. इस पर उसने 27 नवंबर 2025 को कॉलेज के प्रिंसिपल के माध्यम से यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को एक रिप्रेजेंटेशन दिया तो पता चला कि उसके रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी के पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाए थे, हालांकि उम्मीदवारी/आवेदन पोर्टल पर ड्राफ्ट फॉर्म में था. यूनिवर्सिटी की ओर से कोर्ट को बताया ​गया कि याचिकाकर्ता से संबंधित रिकॉर्ड निर्धारित तारीख के भीतर ‘समर्थ पोर्टल’ पर अपडेट नहीं किए गए थे. ‘समर्थ पोर्टल’ पर याचिकाकर्ता के रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण, यूनिवर्सिटी Exam में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड जारी नहीं कर सकी.

कॉलेज को रीप्रजेंट कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे छात्र थे जिनके रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए थे और इसके लिए कॉलेज ने 27.10.2025 को यूनिवर्सिटी को जानकारी भेजी थी. इस जानकारी पर 30 में से 25 छात्रों के नाम अपडेट किए गए थे, लेकिन किसी तरह यूनिवर्सिटी याचिकाकर्ता और चार अन्य के रिकॉर्ड अपडेट करने में विफल रही.

तथ्यों को परखने पर कोर्ट ने पाया कि याची कॉलेज बीएससी (बायोलॉजी) प्रथम वर्ष की छात्रा है और समर्थ पोर्टल पर उसका आवेदन ड्राफ्ट रूप में था. गलती को देखते हुए, कॉलेज ने 30 छात्रों के बारे में लिखापढ़ी की थी जिनके रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए गए थे, जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल थी. इसके बाद 25 छात्रों के रिकॉर्ड अपडेट किए गए.

कोर्ट ने कहा कि पार्टियों के संबंधित वकीलों द्वारा दिए गए तर्कों से यह स्पष्ट है कि यूनिवर्सिटी को याचिकाकर्ता के रिकॉर्ड अपडेट न होने की जानकारी थी और इसके अलावा यह ड्राफ्ट रूप में मौजूद था, लेकिन ऐसा लगता है कि यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया. यूनिवर्सिटी के वकील ने यूनिवर्सिटी द्वारा अपनाई जाने वाली किसी भी प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी नहीं दी, जब ऐसी तकनीकी गलती उनके संज्ञान में आती है या उन्हें सूचित किया जाता है, जैसा कि इस मामले में हुआ है.

रिट-सी नंबर 43756 ऑफ 2025, श्रेया पांडे बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

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