शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को मिली सशर्त Anticipatory Bail, 27 फरवरी को सुरक्षित था आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग बटुकों से यौन शोषण मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की Anticipatory Bail मंजूर कर ली है. जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने बुधवार 25 मार्च को यह आदेश सुनाया. इससे पहले कोर्ट ने 27 फरवरी को Anticipatory Bail याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया था.
यह फैसला आज सुनाया गया. कोर्ट ने कहा है कि यदि आवेदकों को उपरोक्त मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो व्यक्तिगत मुचलके और 50 हजार रूपये की दो प्रतिभूतियों पर रिहा किया जायेगा. बुधवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने इस प्रकरण को लेकर मीडिया में चल रही बयानबाजी को भी संज्ञान लिया.
कोर्ट ने Anticipatory Bail के लिए आवेदन करने वालों के साथ ही उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने वाले और पीड़ित बटुकों को निर्देश दिया है कि वह मीडिया में इस केस को लेकर कोई बयान न दें. इस कड़ी शर्त के साथ ही कोर्ट ने कई अन्य शर्तें भी लगाई हैं. कोर्ट में शर्तों का उल्लंघन किये जाने पर जमानत निरस्त (Anticipatory Bail) करने के लिए अर्जी दाखिल करने की छूट दी है.
शर्तों का उल्लंघन किये जाने पर Anticipatory Bail निरस्त करने के लिए अर्जी दाखिल करने की छूट
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ प्रयागराज जनपद के झूंसी थाने में पाक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है. झूंसी थाने में यह रिपोर्ट आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) के आदेश के क्रम में दर्ज की गयी है. पुलिस इस प्रकरण की जांच शुरू कर चुकी है. पीड़ितों के साथ ही आरोपितों के बयान भी दर्ज कराये जा चुके हैं.
झूंसी थाने में दर्ज करायी गयी प्रथम सूचना रिपोर्ट के मुताबिक घटना माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के प्रयागराज में आयोजन के दौरान नाबालिग बटुकों के साथ कुकर्म का आरोप है. कोर्ट को पीड़ितों के तथ्य तथा बयानों में विसंगतियां मिलीं. बचाव पक्ष ने पीड़ितों को कथित घटना के समय (जनवरी 2025 से फरवरी 2026) के बीच वयस्क बताया.
इस क्रम में वर्ष 2024 में मप्र के नरसिंहपुर व उत्तराखंड के बद्रीनाथ में एक हमले में पीड़ित की उम्र शैक्षिक प्रमाणपत्र के अनुसार एक अगस्त 2006 बताई. बताया गया कि पीड़ितों का संबंध स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम से नहीं है. पीड़ित हरदोई जिले के संस्कृत विद्यालय के छात्र हैं. इन दोनों पीड़ितों का मेडिकल भी कराया जा चुका है. मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ितों के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं बतायी गयी है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यौन उत्पीड़न से नकारा नहीं जा सकता और एफएसएल रिपोर्ट की मांग की गई है, जो यह दर्शाती है कि डाक्टर ने ठोस निष्कर्ष नहीं दिया है. चिकित्सा परीक्षण नहीं किया गया है जो यौन उत्पीड़न के मामलों में आवश्यक है. कोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई कि आशुतोष ब्रह्मचारी को पीड़ितों के साथ अपराध की सूचना तब मिली जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मेला प्रशासन के बीच संगम में स्नान करने को लेकर विवाद था.
कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों ने आशुतोष ब्रह्मचारी को 18 जनवरी 2026 को अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी थी. आशुतोष ब्रह्मचारी की तरफ से यह जानकारी 24 जनवरी को पुलिस को दी गयी थी. पुलिस को सूचना देने में छह दिन की देरी क्यों हुई, इसके जवाब में बताया गया कि आशुतोष ब्रह्मचारी “पूजा/यज्ञ” में व्यस्त थे. दूसरी तरफ यह भी बताया गया कि 21 जनवरी 2026 को उन्होंने अन्य कथित घटना के संबंध में आवेदन दाखिल किया था. इससे उनका पूजा यज्ञ का तर्क कोर्ट में मजबूती से खड़ा नहीं हो पाया.
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कोर्ट में यह भी बताया गया कि दोनों पीड़ित पूर्व से ही आशुतोष ब्रह्मचारी के संपर्क में थे. इससे भी उनकी भूमिका संदेह के दायरे में आ जाती है. कोर्ट को याची के अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़ितों के मीडिया में बयान हुए. पाक्सो एक्ट व किशोर न्याय अधिनियम की स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए मीडिया में साक्षात्कार दिया गया.
कोर्ट ने कहा, पीड़ितों द्वारा प्राकृतिक अभिभावक को घटना के बारे में न बताना और अज्ञात सूचनाकर्ता (आशुतोष ब्रह्मचारी) को बताना ‘सामान्य मानव व्यवहार नहीं है. इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों आरोपितों की Anticipatory Bail को मंजूरी दे दी.