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Deceased employee का कानूनी प्रतिनिधि हमेशा मृतक की संपत्ति के माध्यम से पारिवारिक पेंशन सहित अंतिम देय राशि का दावा करने का हकदार, सम्पूर्ण लाभ का 1 महीने में भुगतान करने का आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो जजों की बेंच ने रद किया सिंगल बेंच का फैसला, कहा, तीन साल की देरी मुद्दा ही नहीं था

Deceased employee का कानूनी प्रतिनिधि हमेशा मृतक की संपत्ति के माध्यम से पारिवारिक पेंशन सहित अंतिम देय राशि का दावा करने का हकदार, सम्पूर्ण लाभ का 1 महीने में भुगतान करने का आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो जजों की बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि Deceased employee का कानूनी प्रतिनिधि हमेशा मृतक की संपत्ति के माध्यम से पारिवारिक पेंशन सहित अंतिम देय राशि का दावा करने का हकदार हो सकता है. इस कमेंट के साथ जस्टिस इन्द्रजीत शुक्ला और जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह की बेंच ने कहा कि मूल याचिकाकर्ता के ऐसे दावे के अधिकार के संबंध में किसी भी विवाद के अभाव में सिंगल बेंच का यह अवलोकन कि मूल याचिकाकर्ता को ऐसे लाभ का दावा करने का कोई अधिकार नहीं था, स्पष्ट रूप से गलत है.

बेंच ने सिंगल बेंच द्वारा 10 अक्टूबर 2025 को दिये गये आदेश को रद्द करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया है. बेंच ने आदेश दिया है कि प्रतिवादी जल्द से जल्द, हो सके तो आज से एक महीने के अंदर, उचित तर्कसंगत आदेश पारित करें और याचिकाकर्ता को सभी परिणामी लाभ दें.

यह प्रकरण प्रयागराज जिले के डीएवी इंटर कॉलेज से जुड़ा हुआ है. यहां सहायक शिक्षक के रूप में तैनात रहे त्रिलोक नाथ तिवारी (Deceased) की 2022 में मृत्यु हो गयी. वह 2014 में सेवानिवृत्त हो गये थे. रिकॉर्ड में उल्लिखित नियमितीकरण की तारीख 30 दिसंबर 2000 के खिलाफ Deceased employee ने उस समय इसके खिलाफ प्रतिनिधित्व किया था.

उक्त प्रतिनिधित्व पर क्षेत्रीय नियमितीकरण समिति की बैठक में विचार किया गया. बैठक में यह संकल्प लिया गया कि याचिकाकर्ता के पति स्वर्गीय त्रिलोक नाथ तिवारी (Deceased) के नियमितीकरण की तारीख 30.12.2000 से बदलकर 07.08.1993 कर दी जाए.

याचिकाकर्ता के Deceased पति पेंशनभोगी थे

पति की मौत के बाद पत्नी ने इस प्रकरण को आगे बढ़ाया और राहत की मांग में हाई कोर्ट का रुख किया. इस प्रकरण की सुनवाई सिंगल बेंच ने की और माधुरी तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 4 अन्य केस में 10 अक्टूबर 2025 को आदेश सुनाया. इसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता के पति (Deceased) एक पेंशनभोगी थे.

उनकी मृत्यु 21 जुलाई 2022 को हो गई. याचिकाकर्ता ने अब इस न्यायालय से संपर्क किया है कि 28 दिसंबर 2018 के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता के पति के नियमितीकरण पर 1993 से विचार किया जाए. यह याचिकाकर्ता का मामला नहीं है कि उसके पति (Deceased) को उक्त आदेश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और यह स्वीकार किया है कि उन्होंने अपनी सेवा अवधि के दौरान या सेवानिवृत्ति के बाद या अपनी मृत्यु से पहले इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया. पति (Deceased) द्वारा स्वीकार किए गए दावे को उनकी मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता द्वारा उनकी ओर से नहीं उठाया जा सकता है.

याचिकाकर्ता के पास ऐसे लाभ का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है. सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर रिव्यू एप्लीकेशन को भी 2025 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया है.

इसके बाद हाई कोर्ट में स्पेशल अपील दाखिल की गयी. इसी स्पेशल अपील पर दो जजों की बेंच सुनवाई कर रही थी. अपील में मांग की गयी थी 28 दिसंबर 2018 के डिविजनल रेगुलराइजेशन कमेटी के फैसले को लागू करने का निर्देश दिया जाय जिसके तहत यह तय किया गया था कि Deceased त्रिलोकनाथ तिवारी (सेवानिवृत्त सहायक शिक्षक, डीएवी इंटर कॉलेज, प्रयागराज) का नियमितीकरण 07 अगस्त 1993 से प्रभावी किया जाए और तदनुसार उनके सेवा रिकॉर्ड को संशोधित करते हुए देय वेतन, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों की पुनर्गणना की जाए.

नियमितीकरण की संशोधित तिथि से उत्पन्न वेतन, पेंशन और अन्य परिणामी वित्तीय लाभों का बकाया याचिकाकर्ता (मृत कर्मचारी के कानूनी उत्तराधिकारी) को एक निश्चित समय सीमा के भीतर प्रदान किया जाय. बकाया और पेंशन लाभों के विलंबित भुगतान पर, जिस तारीख से राशि देय हुई थी, उस तारीख से वास्तविक भुगतान की तारीख तक उचित दर पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया जाए.

स्पेशल अपील की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सिंगल बेंच के आदेश में इस हद तक गलती हो गई है कि, यह ध्यान नहीं दिया गया कि याचिकाकर्ता अपने पति (Deceased) को सहायक शिक्षक के रूप में सेवा में नियमित करने की तारीख को संशोधित करने के लिए कोई नया दावा नहीं कर रही थी.

यह भी तर्क दिया गया कि सिंगल बेंच द्वारा बताई गई देरी के संबंध में, स्पष्ट रूप से सिद्धांत में एक त्रुटि हुई है, क्योंकि यह याचिकाकर्ता का मामला नहीं है कि दावा (उसके पति (Deceased) द्वारा प्रदान की गई सेवा के संबंध में) सात साल की देरी से किया गया था. क्षेत्रीय नियमितीकरण समिति के 2019 के प्रस्ताव के आलोक में, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि Deceased त्रिलोक नाथ तिवारी के नियमितीकरण की तारीख 30.12.2000 से बदलकर 07.08.1993 की जाए, निर्णय पहले ही लिया जा चुका था. इसलिए, दावा करने में देरी का कोई मुद्दा नहीं था.

कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि क्षेत्रीय नियमितीकरण समिति के 21.07.2019 के प्रस्ताव से उत्पन्न होने वाले मौद्रिक लाभ के भुगतान के लिए दावा करने में देरी के संबंध में, फिर से, हम पाते हैं कि कोई देरी नहीं है. प्रस्ताव के अनुसरण में Deceased  त्रिलोक नाथ तिवारी ने अपने जीवनकाल में इस मामले को आगे बढ़ाया था, जिसके परिणामस्वरूप वित्त और लेखा अधिकारी, डीआईओएस कार्यालय प्रयागराज द्वारा 01 जुलाई 2019 का कम्युनिकेशन जारी किया गया और डीआईओएस द्वारा डीएवी इंटर कॉलेज प्रयागराज के प्रबंधक/प्रधानाचार्य को 12 मार्च 2025 को संचार पत्र जारी किया गया.

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पर लगाई गई तीन साल की देरी के संबंध में, हम अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील द्वारा उठायी गयी आपत्ति से प्रभावित नहीं हैं, क्योंकि आदेश पहले ही दिया जा चुका था और याचिकाकर्ता की आपत्ति प्रतिवादी के पास लंबित थी. यह डीआईओएस प्रयागराज द्वारा जारी किए गए अंतिम संचार/स्वीकृति 12 मार्च 2025 से तीन साल के भीतर किया गया था. चूंकि धन का दावा सक्रिय विचार के तहत है इसलिए इस पर निर्णय लिया जाना चाहिए.

SPECIAL APPEAL DEFECTIVE No. – 3 of 2026; Madhuri Tiwari v. State of U.P. & Ors.
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