नोएडा में टेक्नीशियन के गड्ढे में डूबकर मरने का मामला, Arrest मेमो के क्लॉज 13 के उल्लंघन पर आरोपित को राहत, रिहा करने का आदेश

Arrest मेमो के क्लॉज 13 के उल्लंघन के चलते नोएड में टेक्निशियन की मौत के मामले में पुलिस द्वारा Arrest किये गये विजटाउन प्लानर्स के डायरेक्टर अभय कुमार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो जजों की बेंच से बड़ी राहत मिल गयी है. कोर्ट ने Arrest मेमो के क्लॉज की शर्तों को पूरी न करने के चलते आरोपित को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि Arrest मेमो की धारा 13 के तहत पुलिस को यह स्पष्ट रूप से दर्ज करना आवश्यक होता है कि आरोपी की भूमिका से संबंधित ठोस सामग्री क्या है.
साक्ष्य क्या इतने पर्याप्त थे कि उनके आधार पर Arrest अनिवार्य हो जाय. इस संबंध में कोई इलेक्ट्रॉनिक एवीडेंस भी है क्या. क्या अरेस्ट करने वाले पुलिस अफसरों ने Arrest मेमो आरोपित का उपलब्ध कराया था. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट ने उमंग रस्तोगी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य; 2026 SCC OnLine All 82 (हेबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 35/2026) के मामले में इस न्यायालय द्वारा पारित फैसले का जिक्र किया.
इस फैसले के अनुसार Arrest मेमो के क्लॉज 13 की शर्तों का पालन करना पुलिस के लिए अनिवार्य है जबकि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों को परखने के बाद पाया कि अभय कुमार की गिरफ्तारी उमंग रस्तोगी एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए निर्णय के विपरीत की गई.
Arrest मेमो की धारा 13 का पालन नहीं किया गया जो उत्तर प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू है

विशेष रूप से Arrest मेमो की धारा 13 का पालन नहीं किया गया जो उत्तर प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू है. कोर्ट ने कोट किया हम पाते हैं कि अनिवार्य शर्तों का पालन किए बिना की गई गिरफ्तारी कानून के विरुद्ध है. बेंच ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार कर लिया और संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता अभय कुमार को तत्काल रिहा करें.
बता दें कि यह मामला नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एक व्यावसायिक निर्माण स्थल से जुड़ा हुआ था जहां सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की एक पानी से भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई. बताया गया कि घने कोहरे के बीच युवराज ने एक तीखा मोड़ लिया और निर्माण स्थल के पास बने खुले व पानी से भरे गड्ढे में गिर गए. उन्होंने फोन कॉल करके अपने पिता को सूचना दी तो उन्होंने पुलिस को भी कॉल कर लिया.
घटना के समय मौके पर सभी पहुंच भी चुके थे लेकिन घने कोहरे के चलते युवराज को पानी से बाहर नहीं निकाला जा सका और उनकी जान चली गयी थी. घटना की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि निर्माणाधीन परियोजना के पास मौजूद इस गड्ढे पर कोई चेतावनी चिह्न, बैरिकेडिंग या स्पष्ट चिन्हांकन नहीं किया गया था. यह परियोजना विजटाउन प्लानर्स द्वारा डेवलप की जा रही थी.
जांच रिपोर्ट के आधार पर कंपनी के निदेशक अभय कुमार के खिलाफ 20 जनवरी को गैर-इरादतन हत्या लापरवाही से मृत्यु कारित करने और मानव जीवन को खतरे में डालने का मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने उन्हें Arrest किया. 2 फरवरी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज की, जिसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाइकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी.
कोर्ट में स्टेट के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे इस आदेश का पालन तुरंत करवाने के लिए संबंधित अधिकारियों को यह आदेश भेजें और इस आदेश की सर्टिफाइड कॉपी जारी होने का इंतजार न करें. कोर्ट ने कहा आदेश की सर्टिफाइड कॉपी आज ही जारी की जाएगी.