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वकील की Absence या चूक के तकनीकी आधार पर आपराधिक अपील खारिज करना सही नहीं

अपील खारिज करने का आदेश रद, गुण-दोष पर तय करने का निर्देश

वकील की Absence या चूक के तकनीकी आधार पर आपराधिक अपील खारिज करना सही नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक अपील को केवल अधिवक्ता की absence या चूक  के आधार पर खारिज करना सही नहीं है. यदि आरोपी का वकील उपस्थित नहीं होता (absence)  है, तो अदालत को न्याय मित्र नियुक्त कर मामले की सुनवाई कर गुण-दोष के आधार पर फैसला लेना चाहिए. यह आदेश जस्टिस अब्दुल शाहिद की सिंगल बेंच ने संजय यादव की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है.

याची संजय यादव को वर्ष 2022 में गोरखपुर की एक अदालत ने परक्राम्य विलेख अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था. इसके खिलाफ गोरखपुर के सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी. इस अपील को  26 अक्टूबर 2023 को वकील की absence के कारण ‘अदम पैरवी में खारिज कर दिया गया था. इसके बाद  देरी माफी की अर्जी के साथ दूसरी अपील दायर की गई., जिसे विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट), गोरखपुर ने 17 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया था. इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई.

हाईकोर्ट ने  कहा कि अपील को इस तरह खारिज करना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 425 (जो पूर्ववर्ती सीआरपीसी की धारा 384 के समान है) के प्रावधानों का उल्लघंन है.  हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2023 के आदेश को ‘शून्य’ करार देते हुए रद्द कर दिया और मूल अपील को उसके पुराने नंबर पर बहाल  करने का आदेश दिया.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब पहली अपील समय सीमा के भीतर थी, तो दूसरी अपील दाखिल करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं थी. न्यायालय ने निर्देश दिया कि आपराधिक अपील का निस्तारण केवल गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि तकनीकी आधार पर. हाईकोर्ट ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए अधीनस्थ अदालत को निर्देश दिया है कि वह बहाल की गई अपील पर तेजी से निर्णय ले.

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पुलिस अभिरक्षा में मौत की शिकायत करने वाले के खिलाफ आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के सिपरी बाजार थाना क्षेत्र के हेमंत सोनी उर्फ चिंटू के विरुद्ध सी जे एम झांसी की अदालत में चल रही आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और शिकायतकर्ता सहित राज्य सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है. यह आदेश जस्टिस एसके पचौरी की एकलपीठ ने याची अधिवक्ता अश्वनी कुमार ओझा को सुनकर दिया है.

इनका कहना है कि याची ने डीजीपी से 26 सितंबर 21 को पुलिस थाने में हुई अभिरक्षा में मौत की शिकायत की. जिससे नाराज पुलिस अधिकारियों ने शिकायतकर्ता रवींद्र कुशवाहा की मिलीभगत से याची के खिलाफ पांच महीने पहले घटित एक घटना की याची के खिलाफ झूठे आरोप में एफआईआर दर्ज कराई. पुलिस रिपोर्ट पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए याची को सम्मन जारी किया है.केस कार्यवाही को याचिका में यह कहते हुए चुनौती दी गई हैं कि पुलिस ने याची के खिलाफ दुरभिसंधि कर झूठी शिकायत कर केस कायम किया है. कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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