Death के 1 साल बाद टीचर को नौकरी से निकालने का आदेश, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

कोविड-19 के समय दिवंगत हो चुके शिक्षक को Death के एक साल बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरु किये जाने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन बेसिक को पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है. जस्टिस प्रकाश पाडिया की बेंच ने कहा कि Death व्यक्ति के खिलाफ जांच शुरू ही नहीं की जा सकती है. कोर्ट ने जिम्मेदारों से पूछा है कि उन्होंने कानून के किन प्रावधानों के तहत एक मृत (Death) कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश जारी किया.
हाई कोर्ट में रिट फर्रूखाबाद की प्रीति सक्सेना की ओर से दाखिल की गयी थी. वह स्व. मुकुल (Death) सक्सेना की विधवा हैं. मृतक मुकुल सक्सेना प्राइमरी स्कूल में असिस्टेंट टीचर के तौर पर काम करते थे. 24 अक्टूबर 1996 को डाइंग-इन-हार्नेस नियमों के तहत उन्हें जॉब मिली थी. मई, 2021 में COVID-19 के कारण अपनी मृत्यु (Death) तक काम करना जारी रखा.
उनकी मृत्यु (Death) के बाद याचिकाकर्ता जो कानूनी तौर पर उनकी पत्नी थीं को फैमिली पेंशन मिलने लगी जो नवंबर 2022 तक जारी रही. दिसंबर 2022 में फर्रुखाबाद के बीएसए ने फाइनेंस और अकाउंट ऑफिसर को भेजे गए एक पत्र के कारण पेंशन रोक दी गई.
इस पत्र में डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन बेसिक द्वारा 18 जुलाई, 2022 को जारी एक अन्य पत्र का हवाला दिया गया जिसमें मृत (Death) कर्मचारी की सेवाओं को समाप्त करने का निर्देश दिया गया. दिसंबर 2022 में एडिशनल डायरेक्टर ट्रेजरी और पेंशन कानपुर मंडल द्वारा याचिकाकर्ता की फैमिली पेंशन रोकने का आदेश पारित किया गया.
इस कार्रवाई को विधवा ने याचिका के जरिए चुनौती दी. कोर्ट में बेसिक एजुकेशन ऑफिसर के वकील ने रिकॉर्ड पर निर्देश देते हुए दावा किया कि उनके पति ने जाली दस्तावेज जमा करके अपनी नियुक्ति प्राप्त की थी और उनकी नियुक्ति को शुरुआती नियुक्ति की तारीख से ही अमान्य माना गया है. जस्टिस पाडिया की बेंच ने विभाग के रुख को खारिज कर दिया.
Death इंसान के खिलाफ कोई जांच शुरू नहीं की जा सकती
कोर्ट ने कहा कि पूरे निर्देशों में ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया जिससे यह पता चले कि इन कार्रवाइयों से पहले किसी भी अथॉरिटी द्वारा नियुक्ति को अमान्य घोषित करने वाला कोई आदेश पारित किया गया था. कोर्ट ने कहा कि डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (बेसिक) को ही पता होगा कि उन्होंने एक मरे (Death) हुए इंसान को नौकरी से निकालने की कार्यवाही क्यों शुरू की जबकि यह तय कानून है कि मरे हुए इंसान के खिलाफ कोई जांच शुरू नहीं की जा सकती.
कोर्ट ने कहा कि वह बहुत हैरान और अचंभित है कि किन हालात में जुलाई 2022 में कर्मचारी के खिलाफ यह लेटर लिखा गया जबकि वह मई 2021 में ही मर (Death) चुका था. हाईकोर्ट ने डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (बेसिक) को व्यक्तिगत एफिडेविट फाइल करने और अपने काम का कारण बताने का निर्देश दिया. कोर्ट ने आदेश दिया कि एफिडेविट एक हफ्ते के अंदर फाइल किया जाए ऐसा न करने पर डायरेक्टर मामले में अगली तारीख पर इस कोर्ट के सामने मौजूद रहेंगे. सुनवाई 16 दिसंबर को होगी.