ग्राम प्रधान का Financial और प्रशासनिक अधिकार सीज करने का डीएम प्रयागराज का आदेश रद, 1 माह में नया आदेश पास करें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायत सराय लीलाधर @ बरचनपुर, ब्लॉक बहरिया, प्रयागराज के ग्राम प्रधान के फाइनेंशियल (Financial) और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर को सीज कर देने का डीएम का आदेश रद कर दिया है. जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने डीएम को निर्देश दिया है कि वह पिटीशनर के एक्सप्लेनेशन पर विचार करने के बाद, इस ऑर्डर की सर्टिफाइड कॉपी पेश करने की तारीख से एक महीने के अंदर, कानून के अनुसार, पिटीशनर के खिलाफ फॉर्मल इंक्वायरी करने के लिए अपनी पहली नजर में संतुष्टि दर्ज करते हुए नया ऑर्डर पास करें.
पिटीशन में रेस्पोंडेंट डीएम प्रयागराज के 01.11.2025 के ऑर्डर को चैलेंज किया गया था. यह ऑर्डर यूपी पंचायत राज एक्ट, 1947 के सेक्शन 95(1)(g) के तहत पावर का इस्तेमाल करके पास किया गया था. इसमें पिटीशनर की ग्राम पंचायत सराय लीलाधर @ बरचनपुर, डेवलपमेंट ब्लॉक बहरिया, डिस्ट्रिक्ट प्रयागराज के ग्राम प्रधान के तौर पर फाइनेंशियल (Financial) और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर को सीज कर दिया गया था.
कोर्ट में पेश किये गये रिकॉर्ड से पता चलता है कि दिलीप कुमार नाम के एक व्यक्ति की कंप्लेंट के बाद, डीएम के ऑर्डर के मुताबिक, पिटीशनर के खिलाफ U.P. पंचायत राज (प्रधान, उप-प्रधान और मेंबर्स को हटाना) इंक्वायरी रूल्स, 1997 के तहत एक शुरुआती इंक्वायरी का ऑर्डर दिया गया था.
26.05.2025 की जांच रिपोर्ट के अनुसरण में याचिकाकर्ता को दिनांक 06.08.2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब याचिकाकर्ता ने दिनांक 22.09.2025 को दिया. इसके बाद 01.11.2025 के आपत्तिजनक आदेश द्वारा याचिकाकर्ता की वित्तीय (Financial) और प्रशासनिक शक्तियों को जब्त कर लिया और याचिकाकर्ता के खिलाफ औपचारिक जांच का निर्देश दिया.
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि आपत्तिजनक आदेश द्वारा डीएम कारण बताओ नोटिस में उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कोई प्रथम दृष्टया संतुष्टि दर्ज किए बिना उसके खिलाफ औपचारिक जांच का निर्देश दिया. स्टैंडिंग काउंसिल ने रेस्पोंडेंट ऑर्डर का बचाव करने की कोशिश की लेकिन पिटीशनर के खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में उसमें दर्ज कोई भी पहली नजर में संतुष्टि बताने में नाकाम रहे.
कोर्ट ने कहा कि ऑर्डर दिखाता है कि इसमें केवल शिकायत दर्ज करने, जांच रिपोर्ट जमा करने, कारण बताओ नोटिस जारी करने और पिटीशनर के स्पष्टीकरण जमा करने से संबंधित तारीखों का जिक्र है, जिसके बाद, पिटीशनर की फाइनेंशियल (Financial) और एडमिनिस्ट्रेटिव शक्तियों को जब्त करने का ऑर्डर पास किया गया है और फॉर्मल जांच का निर्देश दिया गया है.
विवादित आदेश को पढ़ने से यह नहीं पता चलता कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कारण बताओ नोटिस में लगाए गए आरोपों पर कोई ध्यान दिया गया है, न ही उसके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर कोई विचार किया गया है.
DM का Financial और एडमिनिस्ट्रेटिव शक्तियों को जब्त करने का ऑर्डर इंक्वायरी रूल्स का उल्लंघन
कोर्ट ने माना कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, प्रयागराज का 01.11.2025 का ऑर्डर, जिसमें ग्राम प्रधान के तौर पर पिटीशनर के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर आखिरी फैसला सुनाया गया था, इंक्वायरी रूल्स, 1997 का उल्लंघन है, इसलिए यह टिकने लायक नहीं है और इसे रद्द किया जा सकता है.
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