‘मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी’ POCSO Act के सेक्शन 7 और 8 के तहत केस से जुड़ी पूरी कार्रवाई रद्द
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपी और पीड़िता की शादी हो जाने पर सुनाया फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट, 2012 (POCSO) के तहत दर्ज केस रद्द कर दिया है, क्योंकि आरोपी और पीड़िता ने एक-दूसरे से शादी कर ली थी. कोर्ट संत कबीर नगर जिले के थाना बखिरा में दर्ज उस अर्जी पर फैसला कर रहा था जिसमें आईपीसी के सेक्शन 363, 366, 504, और 506 और POCSO एक्ट के सेक्शन 7 और 8 के तहत केस से जुड़ी पूरी कार्रवाई को रद्द करने की मांग की गई थी.
जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने कहा, मामले की जड़ यह है कि दोनों पार्टियों ने शादी कर ली है और वे पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे हैं और 09.08.2018 को एक बेटा हुआ. कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूटर अब एप्लीकेंट के साथ उसकी कानूनी रूप से शादीशुदा पत्नी के तौर पर रह रही है.
ऐसा कोई सबूत रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया है जिसके आधार पर दोनों पार्टियों की शादी पर शक किया जा सके. बाद के डेवलपमेंट को देखते हुए एप्लीकेंट्स ने अगर कोई क्रिमिनल (POCSO) काम किया है तो वह अब खत्म हो गया है. ऐसे में एप्लीकेंट्स के क्रिमिनल केस को लंबा खींचने का कोई फायदा नहीं होगा. ऊपर बताए गए फैक्ट्स के कारण एप्लीकेंट्स के दोषी ठहराए जाने की उम्मीद अब न केवल बहुत कम है बल्कि बहुत कम है.
POCSO केस जारी रहने दिया जाता है, तो आरोपी और पीड़ित का खुशहाल परिवार टूट जाएगा

बेंच ने कहा कि अगर आरोपी पर क्रिमिनल केस (POCSO) जारी रहने दिया जाता है, तो आरोपी और पीड़ित का एक खुशहाल परिवार टूट जाएगा. साल 2016 में इस कथित घटना के बारे में एप्लीकेंट्स के खिलाफ FIR (POCSO) दर्ज की गई थी. शिकायत करने वाले ने आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग बेटी को आरोपी और उसके परिवार के दूसरे सदस्यों, जिसमें एप्लीकेंट्स भी शामिल थे, ने बहला-फुसलाकर भगा दिया.
पीड़िता को इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर ने बरामद किया तो उसका बयान दर्ज किया गया. उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी और उसने खुद को बालिग लड़की बताया. उसने कहा कि वह आरोपी के साथ शादी करना चाहती थी और उसके परिवार वालों ने एप्लीकेंट्स के खिलाफ झूठी FIR (POCSO) दर्ज कराई. उसने साफ कहा कि उनके बीच कोई सेक्सुअल इंटरकोर्स नहीं हुआ था और जब उसे (POCSO) FIR दर्ज होने के बारे में पता चला, तो वह अपने घर वापस आ गई.
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के शरीर पर कोई चोट नहीं मिली. इसके अलावा सीएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की उम्र 18 साल थी. हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, बेशक आवेदक और दूसरी पार्टी की बेटी की शादी बहुत पहले हो चुकी है और 09.08.2018 को एक बच्चा भी हुआ.
शादीशुदा जोड़ा बहुत लंबे समय से एक ही छत के नीचे रह रहा है. पार्टियों ने 08.10.2025 को मीडिएशन और सुलह सेंटर में झगड़ा सुलझा लिया है और लड़ने वाले पक्ष मौजूदा केस समेत क्रिमिनल केस (POCSO) छोड़ने पर सहमत हो गए हैं.
कोर्ट का मानना था कि इस ट्रायल से सिर्फ कोर्ट का समय बर्बाद होगा और यह बेकार की कोशिश होगी, खासकर तब जब केसों की बाढ़ कोर्ट को इतने सारे कामों में डुबो दे कि सोचा भी नहीं जा सकता. हाई कोर्ट ने एप्लीकेशन को मंजूरी दे दी और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी.
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