फॉर्म online भरने में हुई गलती सुधारने का मौका दिया तो पंडोरा बॉक्स खुल जाएगा, 2022 में इंस्ट्रक्टर के पद पर चयन से संबंधित मामला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेरिट रहित याचिका को खारिज किया

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि online आवेदन फॉर्म में उम्मीदवार द्वारा की गई लापरवाही को बाद में सुधारने का अवसर दिया गया, तो इससे “पंडोरा बॉक्स” खुल जाएगा. यह आदेश जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित इंस्ट्रक्टर भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए यह सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने याचिकाकर्ता रेखा पाल द्वारा दायर रिट याचिका को मेरिट रहित पाते हुए खारिज कर दिया.
यह मामला 2022 में इंस्ट्रक्टर के पद पर चयन से संबंधित था, जिसके लिए याचिकाकर्ता ने आवेदन किया था. याचिकाकर्ता रेखा पाल के पास इंस्ट्रक्टर पद के लिए आवश्यक योग्यता, डिप्लोमा और नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (एनटीसी) दोनों थी, और प्रत्येक श्रेणी के लिए 50% आरक्षण निर्धारित था. हालांकि, याचिकाकर्ता ने online आवेदन जमा करते समय केवल कॉस्मेटोलॉजी में डिप्लोमा का विवरण दिया और एनटीसी का उल्लेख नहीं किया. याचिकाकर्ता ने निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन में कोई सुधार भी नहीं किया.
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि जब उन्होंने दस्तावेज (online) जमा किए तो एनटीसी की योग्यता भी जमा कर दी गई थी और उसका सत्यापन भी हुआ था. इसलिए उनकी उम्मीदवारी पर एनटीसी धारकों की श्रेणी में विचार किया जाना चाहिए था. जिसमें वह कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त कर रही थीं.
जवाब में, प्रतिवादियों के वकील ने विज्ञापन के संबंधित खंडों का हवाला देते हुए कहा कि उम्मीदवार का कर्तव्य था कि वह online आवेदन में सही विवरण प्रस्तुत करे क्योंकि अन्य दस्तावेजों का सत्यापन भी केवल online आवेदन में दिए गए विवरणों के आधार पर ही किया जाता है. उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर डिप्लोमा योग्यता के आधार पर विचार किया गया, जिसमें उसे कट-ऑफ अंकों से कम अंक मिले.
online फॉर्म जमा करते समय निश्चित रूप से लापरवाही की
रिकॉर्ड्स और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद, कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता ने online फॉर्म जमा करते समय निश्चित रूप से लापरवाही की थी. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल डिप्लोमा के आधार पर आवेदन करना चुना और उसी के अनुसार प्रतिस्पर्धा की. कोर्ट ने जोर दिया कि अगर इस तर्क को स्वीकार कर लिया जाता है कि एक लापरवाह उम्मीदवार भी, जो सही विवरण जमा करने और सुधार करने में विफल रहा, बाद में कोर्ट आ सकता है, तो इससे एक विस्तृत समस्या (पंडोरा बॉक्स) पैदा हो जाएगी.
कोर्ट ने कोऑर्डिनेट बेंच के एक पूर्व फैसले, आशुतोष कुमार श्रीवास्तव बनाम स्टेट ऑफ यू.पी. के सिद्धांत का हवाला दिया, जो याचिकाकर्ता के दावे के विपरीत था. इन कारणों से, कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि एनटीसी के आधार पर उसकी नियुक्ति पर विचार किया जाए और रिट याचिका को खारिज कर दिया.
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