छल से प्राप्त Teacher की नौकरी जारी रखने की अनुमति देना पूरी प्रणाली को दूषित करने जैसा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छल से प्राप्त नौकरी को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, यह पूरी प्रणाली को दूषित करती है. यह आदेश जस्टिस मंजू रानी चौहान ने Assistant teacher कृष्णकांत की याचिका पर दिया है. याची Teacher की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में मार्च 1998 में हुई थी. 20 साल नौकरी करने के बाद छोटी बहन स्नेहलता से उसका विवाद हुआ. स्नेहलता ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की कि कृष्णकांत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की है.
विभागीय जांच में शिकायत सही पाई गई और बीते जुलाई माह में याची की सेवा समाप्त कर दी गई. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि छल के आधार पर नियुक्ति को संवैधानिक संरक्षण प्रदान नहीं किया जा सकता. ऐसा व्यक्ति अपने पक्ष में किसी राहत की उम्मीद नहीं कर सकता. वह वेतन प्राप्त करने का हकदार भी नहीं है.
स्कूल में Teacher की अटेंडेंस पर निगरानी का तंत्र तैयार करें, 10 नवंबर को पेश करें रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में Teachers की समय से उपस्थिति तंत्र तैयार करने का आदेश दिया है ताकि गांव के गरीब छात्रों को शिक्षा मिल सके और उनके शिक्षा पाने के अधिकार सहित जीवन व समानता के अधिकारों की पूर्ति हो सके. कोर्ट को बताया गया कि मुख्य सचिव इसी मुद्दे को लेकर आज बैठक कर रहे हैं. इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 10 नवंबर नियत करते हुए जानकारी मांगी है.

यह आदेश जस्टिस पीके गिरि ने Teacher इंद्रा देवी व श्रीमती लीना सिंह चौहान की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि सरकार ऐसी नीति लागू करें जिससे विभागो में कर्मचारियों व शिक्षण संस्थानों में Teachers की समय से उपस्थिति सुनिश्चित हो सके ताकि गांव के गरीब बच्चे शिक्षा पाने से वंचित न हो.
कोर्ट ने कहा दैश की आजादी के बाद से सरकार ने जमीनी स्तर पर Teachers की समय से स्कूल कालेज में उपस्थिति का तंत्र नहीं बनाया जिससे हाईकोर्ट में याचिकाएं आ रही. आज के तकनीकी युग में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समय से हाजिरी दी जा सकती है. यदि कोई कभी देरी से आता है तो दस मिनट की देरी की छूट दी जा सकती है बशर्ते यह आदतन न हो.
सभी Teacher को हर दिन तय समय पर संस्थानों में हाजिर होना चाहिए. कोर्ट ने सरकार को इसका ठोस हल निकालने का आदेश दिया है. कोर्ट ने याचीगण की पहली गलती और भविष्य में गलती न दुहराने के आश्वासन पर माफी दे दी. याची ने कहा भविष्य में वह पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करती रहेगी. कोर्ट ने याची के विरुद्ध की गई कार्यवाही रद कर दी.