Passport आवेदकों का वेरीफिकेशन 30 दिन में निबटाए पुलिस
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जारी किये निर्देश, अपर मुख्य सचिव गृह कराएं अनुपालन

नया Passport जारी करने का मामला हो या फिर Passport के नवीनीकरण का पुलिस वेरीफिकेशन के लिए कोई तय समयसीमा न होने से लंबित आवेदन का निपटारा करने का निर्देश देने की माँग वाली याचिकाओं की बाढ़ आ गई है. Passport आवेदन स्वीकृत करने के संबंध में किसी भी मुद्दे की स्थिति में Passport चाहने वाले Passport कार्यालय से नोटिस का भी इंतजार नहीं करते और कई बार तो वे नोटिस का उत्तर दिये बिना ही निर्देश के लिए सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा देते हैं. यह कमेंट इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अजित कुमार और स्वरूपमा चतुर्वेदी की बेंच ने किया है.
कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिकाकर्ता द्वारा प्रतिवादी को आदेश देने वाले परमादेश की प्रकृति में निर्देश मांगने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, जिला बरेली को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पीलीभीत द्वारा जारी एनओसी के अनुसरण में याचिकाकर्ता को दस साल की अवधि के लिए पासपोर्ट फिर से जारी करने के लिए की मांग की गयी थी.
मामले की पृष्ठभूमि के तथ्यों के अनुसार याचिकाकर्ता ने पहले रिट सी संख्या 30083/2024 (रहीमुद्दीन बनाम भारत संघ और अन्य) दायर करके इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और उसके पक्ष में Passport जारी करने का निर्देश देने की मांग की थी. क्योंकि मामला एक आपराधिक मामले के लिए पासपोर्ट कार्यालय के समक्ष लंबित था, जो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 447 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत एफआईआर संख्या 181/2016 से उत्पन्न हुआ था.
डिवीजन बेंच ने पवन कुमार राजभर बनाम भारत संघ और 2 अन्य के मामले में फैसले के बाद, 10.09.2024 के अपने आदेश के माध्यम से निर्देशों के साथ उपरोक्त याचिका का निपटारा किया था. आदेश के अनुपालन में, याचिकाकर्ता ने अनापत्ति/स्वीकृति/अनुमोदन के लिए आवेदन किया, जो उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पीलीभीत द्वारा 10.10.2024 को प्रदान किया गया और परिणामस्वरूप, याचिकाकर्ता को Passport जारी किया गया, जो एक वर्ष के लिए 20.01.2025 से 19.01.2026 तक वैध था.
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में हमें इस स्तर पर Passport की अवधि 19.1.2026 से आगे बढ़ाने के लिए कोई और निर्देश जारी करने का कोई औचित्य नहीं दिखता है. याचिकाकर्ता कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार, पासपोर्ट की समाप्ति के तुरंत बाद या उससे पहले भी पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए बार-बार आवेदन कर सकता है.

यदि याचिकाकर्ता कानून में निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन करके अपने पासपोर्ट की वैधता को समाप्त होने से ठीक पहले बढ़ाने के लिए संबंधित प्राधिकारी से संपर्क करता है तो प्रतिवादी पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के प्रावधानों के अनुसार और पासपोर्ट नियम, 1980 और समय-समय पर विदेश मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं और ऊपर चर्चा किए गए कानून के आलोक में आवेदन पर विचार करेगा.
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने र्को का ध्यान विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित नागरिक चार्टर जून 2025 की ओर दिलाया है, जहाँ साधारण Passport जारी करने की समय-सीमा तीस कार्यदिवसों तक की है. जिसमें पुलिस सत्यापन अवधि शामिल नहीं है. पुनः जारी करने के लिए अपेक्षित समय-सीमा सात कार्यदिवसों तक है और वहाँ भी यह अपवाद दिया गया है कि जिन मामलों में पुलिस सत्यापन आवश्यक है, वहाँ पुलिस सत्यापन में लगने वाली समय-सीमा शामिल नहीं है.
यह दर्शाता है कि पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया के लिए दिशानिर्देश या अपेक्षित समय-सीमा बनाते समय पुलिस सत्यापन में लगने वाले समय का उल्लेख नहीं किया गया है. संवैधानिक अधिदेश के आलोक में कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारियों, विशेषकर पुलिस विभाग से अपेक्षा की है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पासपोर्ट आवेदनों से संबंधित सभी सत्यापन फाइलों का समुचित तत्परता से निपटान किया जाए और विदेश मंत्रालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए.
ऐसे प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी से सख्ती से बचना चाहिए, जब तक कि असाधारण परिस्थितियों द्वारा उचित न ठहराया जाए. पुलिस सत्यापन में देरी, जो किसी भी अभियुक्त के लिए एक आवश्यक प्रक्रिया है, यात्रा के अधिकार के प्रयोग में बाधा उत्पन्न कर रही है, विशेष रूप से उन मामलों में जहाँ पासपोर्ट पुनः जारी करने में एक वर्ष की अवधि लगती है.
Passport को लेकर कोर्ट ने दिये निर्देश
- यदि Passport आवेदकों को अपने आवेदन के निपटान में देरी होती है, तो उन्हें सबसे पहले नोटिस का उत्तर देना चाहिए
- यदि उन्हें लगता है कि उनका Passport आवेदन आपराधिक मामले में शामिल होने के कारण लंबित है, तो उन्हें सबसे पहले संबंधित न्यायालय, पुलिस या आपराधिक न्यायालय, जैसी भी स्थिति हो, से आवश्यक अनापत्ति/अनुमोदन/स्वीकृति के लिए आवेदन करना चाहिए.
- Passport कार्यालय को भी अपने मामलों में देरी नहीं करनी चाहिए क्योंकि पासपोर्ट आवेदक के लिए यह अत्यावश्यक हो सकता है.
- ऐसी सभी परिस्थितियों में जहाँ पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता, संबंधित क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को पासपोर्ट आवेदन जमा करने के एक महीने के भीतर आवेदक को इसकी सूचना देनी चाहिए और जैसे ही उचित अनापत्ति/अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्त होकर जमा हो जाए, एक महीने की अतिरिक्त अवधि के भीतर पासपोर्ट आवेदन का अंतिम रूप से निपटान करना चाहिए.
- पासपोर्ट के लिए प्रस्तुत आवेदन के मामलों में पुलिस को बिना किसी अनावश्यक देरी के चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए. उपरोक्त टिप्पणियों और निर्देशों के साथ, यह याचिका निपटाई जाती है.
- रजिस्ट्रार अनुपालन को निर्देश दिया जाता है कि इस निर्णय की एक प्रति उत्तर प्रदेश राज्य के सभी क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों और उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव गृह को आवश्यक अनुपालन हेतु भेजें.