2 साल पहले दाखिल केस अभी तक Register क्यों नहीं, न्यायिक मजिस्ट्रेट से हाईकोर्ट ने मांगी सफाई

इनका कहना है कि याची ने 2023 में भास्कर यादव के खिलाफ कंप्लेंट केस दाखिल किया था. जिसका अभी तक कोई नंबर नहीं दिया गया है. आदेश सीट भी दाखिल की गई है. मालूम हो कि भास्कर ने याची से 20 लाख रूपए उधार लिए थे.वापस नहीं किया. चेक दिया था किन्तु वह बैंक से अनादर हो गया. कोर्ट ने कंप्लेंट केस में सम्मन जारी किया है. किंतु केस पंजीकृत नहीं किया गया है. जिसपर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.
Minor से दुष्कर्म के आरोपी की सशर्त जमानत मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग (Minor) से दुष्कर्म के आरोपी सजायाफ्ता अभियुक्त को सशर्त जमानत दे दी है. यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष चन्द्र शर्मा ने विनोद सिंह उर्फ मोनू परिहार की अर्जी पर दिया है. इनका कहना था कि याची पर आरोप है कि कानपुर नगर में उसने नाबालिग (Minor) पीड़िता के घर में घुसकर दुष्कर्म किया. जबकि मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर के किसी अंग में चोट नहीं पाई गई.
Minor पीड़िता के सैंपल में कोई खून आदि नहीं पाया गया. जिससे साबित हो कि दुष्कर्म किया गया है. घटना के समय छोटा भाई घर में ही था, किंतु ट्रायल कोर्ट में उसका बयान नहीं दर्ज किया गया. याची को झूठा फंसाया गया है. उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है.
एफआईआर दर्ज करने में आठ दिन की देरी की गई है. जिसका स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है. वह 18 अगस्त 23 से जेल में बंद हैं. उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं फिर भी विशेष अदालत ने उसे सजा सुनाई है. जिसके खिलाफ दाखिल अपील की शीघ्र सुनवाई की संभावना नहीं है.
सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया कहा कि Minor पीड़िता के भाई की गवाही न कराने व पीड़िता को चोट के निशान न पाये जाने से नहीं कहा जा सकता कि अपराध नहीं हुआ है. कोर्ट ने बिना गुण-दोष पर विचार किए याची की सशर्त जमानत मंजूर कर ली और जुर्माना राशि आधी जमा करने पर शेष की वसूली पर रोक लगा दी है.
हाईकोर्ट में 4 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश
इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार जनवरी 26 तक शीतकालीन अवकाश रहेगा. इस दौरान न्यायालयीन कार्य लगभग ठप रहेगा. 5 जनवरी 26 से हाईकोर्ट में नियमित न्यायिक कार्य पुनः शुरू होगा.
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