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Arms Rules 2016 के तहत रूल 32 का उल्लंघन साबित किए बिना निरस्त नहीं कर सकते असलहा लाइसेंस

Arms Rules 2016 के तहत रूल 32 का उल्लंघन साबित किए बिना निरस्त नहीं कर सकते असलहा लाइसेंस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आर्म्स रूल्स (Arms Rules) 2016 के रूल 32 के अनुसार असलहे (Arms) का लाइसेंस कैंसिल करने से पहले यह जरूरी है कि फैसला करने वाली अथॉरिटी तय करे कि संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं. जस्टिस कुणाल रवि सिंह की बेंच ने कहा कि रूल (Arms) 32 के तहत लाइसेंस कैंसिल करने से पहले अथॉरिटी को यह राय बनानी होगी कि क्या असलहा (Arms) सही प्रोटेक्टिव गियर में नहीं ले जाया गया.

उसे लहराया गया, चलाया गया या पब्लिक प्लेस पर यूज किया गया. फायरआर्म (Arms) फ्री जोन में खाली फायरिंग की गई. ऐसे विचार और राय रूल्स 2016 के तहत रूल (Arms) 32 को लागू करने के लिए बहुत जरूरी हैं. कोर्ट ने आर्म्स (Arms) लाइसेंस बहाल कर दिया है.

याचिकाकर्ता ने आर्म्स (Arms) एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में कमिश्नर, वाराणसी डिवीजन और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, गाजीपुर द्वारा पास किए गए विवादित ऑर्डर को रद्द करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जस्टिस कुणाल रवि सिंह की सिंगल बेंच ने कहा, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने रूल (Arms) 32 के तहत बताई गई किसी भी कंडीशन के बारे में कोई फाइंडिंग नहीं दी है.

रूल 32 के तहत यह खास तौर पर जरूरी है कि या तो हथियार को होल्स्टर में रखा जाए या कोई ऐसा इक्विपमेंट जो उसे ले जाने के लिए बनाया गया हो, जैसा कि जरूरी था. रूल 32 के जरूरी इंग्रीडिएंट्स के बारे में कोई फाइंडिंग नहीं है, जिसका उल्लंघन करने पर अथॉरिटी को कैंसलेशन और सीज करने का ऑर्डर पास करने की इजाजत मिल जाए. इस वजह से, पूरा ऑर्डर रद्द किया जा सकता है.

पिटीशनर को N.P.B. रिवॉल्वर .32 बोर का आर्म्स (Arms) लाइसेंस दिया गया था, जिसे समय-समय पर सक्षम अधिकारी द्वारा रिन्यू किया गया और यह 14 सितंबर 2020 तक वैलिड था. थाने की रिपोर्ट पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, गाजीपुर ने नोटिस जारी किया. उस नोटिस में निर्देश दिया गया था कि पिटीशनर का Arms लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया था.

Arms लाइसेंस की किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हुए कभी भी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया

उसे अपना हथियार (Arms) पुलिस स्टेशन में जमा करने का निर्देश दिया गया था और उसे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश होने का भी निर्देश दिया गया था. पिटीशनर ने अपने जवाब में खास तौर पर कहा कि उसने Arms लाइसेंस की किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हुए कभी भी हथियार (Arms) का इस्तेमाल नहीं किया था. उसने हमेशा अपनी पर्सनल सेफ्टी के लिए हथियार का इस्तेमाल किया था.

नोटिस के पालन में पिटीशनर का हथियार SHO, पुलिस स्टेशन मोहम्मदाबाद, गाजीपुर ने अपने कब्जे में ले लिया. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने पिटीशनर का गन लाइसेंस कैंसल कर दिया. अपना लाइसेंस कैंसिल करने के इस ऑर्डर से नाराज होकर, पिटीशनर ने कमिश्नर के सामने अपील की. अपील भी खारिज हो गई. इसके बाद पिटीशनर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

बेंच ने कहा कि रूल 32 में पब्लिक जगह पर हथियार (Arms) ले जाने पर रोक का जिक्र है और इसका एक नेगेटिव मतलब है कि कोई भी व्यक्ति पब्लिक जगह पर हथियार तब तक नहीं ले जा सकता जब तक कि हथियार होलस्टर में न हो या किसी दूसरे इक्विपमेंट के होल्डर में न हो जिसे हथियार ले जाने के लिए डिजाइन, बनाया या अपनाया गया हो.

यह भी देखा गया कि रूल 32 का सब-रूल 3 पब्लिक जगह या फायरआर्म-फ्री जोन में हथियार (Arms) दिखाने या खाली फायर करने पर रोक लगाता है. बेंच ने देखा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास किए गए ऑर्डर में अथॉरिटी ने लाइसेंस कैंसल करने के लिए आर्म्स रूल, 2016 के रूल 32 पर भरोसा किया था. यह भी देखा गया कि पिटीशनर ने कहा था कि कार्ट्रिज सिर्फ हथियार की टेस्टिंग और सफाई के दौरान ही खर्च हुए थे.

पिटीशनर ने इस बात से भी साफ मना किया था कि उसने कभी किसी शादी या किसी दूसरी पब्लिक जगह पर पब्लिक फायरिंग के लिए हथियार का इस्तेमाल किया था.

बेंच ने कहा, रूल 32 को पढ़ने से यह साफ है कि रूल 32 के तहत लाइसेंस कैंसिल करने से पहले यह जरूरी है कि अथॉरिटी इस बारे में राय बनाए कि क्या कोई लाइसेंसी फायर आर्म या तो सही प्रोटेक्टिव गियर में नहीं था या उसे लहराया गया, फायर किया गया या किसी पब्लिक जगह या फायर आर्म फ्री जोन में कोई ब्लैंक फायरिंग हुई.

बेंच ने कहा कि सिर्फ इसी आधार पर विवादित ऑर्डर रद्द किया जा सकता है. यह साफ़ तौर पर बताए बिना कि रूल 32 के तहत कौन से सब-रूल का उल्लंघन पिटीशनर कर रहा है, पिटीशनर पर उसका लाइसेंस कैंसल करने और उसका हथियार जब्त करने की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती.

डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास किए गए ऑर्डर को देखने से यह भी साफ है कि पिटीशनर के दिए गए जवाब पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने विवादित ऑर्डर पास करने से पहले ठीक से ध्यान नहीं दिया है. इस तरह यह मानते हुए कि पिटीशनर का बंदूक लाइसेंस कैंसल करने के लिए रूल 32 का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी था, बेंच ने अपील मान ली और विवादित ऑर्डर रद्द कर दिए.

Case : Yogendra Prasad v. State Of U.P. And 4 Others

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