1978 के नियमों के नियम 4(2) में बताए गए ‘Teaching Experience’ के अनुसार पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर नहीं बनाये जा सकते स्कूल में हेडमास्टर
पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर का अनुभव रेगुलर टीचिंग Experience के बराबर नहीं है. इसे हेडमास्टर के पद पर नियुक्ति के लिए जरूरी पाँच साल के टीचिंग Experience में नहीं गिना जा सकता. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि हेडमास्टर, जो संस्थान का एकेडमिक हेड होता है, उसके लिए अनुभव जरूरी है और इसमें किसी भी कैज़ुअल, पार्ट-टाइम, मानद या नॉन-कैडर पद पर मिले Experience को शामिल नहीं किया जा सकता. इस कमेंट के साथ जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने हेडमास्टर पद पर नियुक्ति के लिए याचिकाकर्ताओं के दावे को आवश्यक टीचिंग Experience की कमी के आधार पर खारिज करने की कार्रवाई को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी.

कोर्ट ने कहा हेडमास्टर का पद एक प्रमोशन का पद है. इस पद के लिए न्यूनतम अवधि तक मान्यता प्राप्त संस्थान में टीचिंग Experience जरूरी है. नियमों में जानबूझकर टीचिंग Experience शब्द का इस्तेमाल रेगुलर शिक्षकों के संदर्भ में किया गया है जो स्वीकृत पदों पर नियुक्त हैं और वैधानिक सेवा शर्तों द्वारा शासित होते हैं. नियमों को पढ़ने से यह साफ है कि पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर उक्त नियमों के तहत शिक्षकों के कैडर का हिस्सा नहीं हैं.
याचिकाकर्ताओं ने सर्कुलर के परिशिष्ट-3 में दिए गए Experience प्रमाण पत्र के निर्धारित फॉर्मेट को रद्द करने की प्रार्थना के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने नोटिफिकेशन के अनुसार पूरी तरह से योग्य मानने और उन्हें चयन की शेष प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देने की प्रार्थना की. कोर्ट में तर्क दिया गया कि बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू किया जा चुका है.
अधिनियम को लागू करने के लिए 31.01.2013 को सरकारी आदेश जारी किया गया था. इसके बाद, संबंधित जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के रूप में नियुक्ति के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करते हुए विज्ञापन प्रकाशित किया.

उक्त पदों के लिए योग्य होने के कारण, याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया और अधिनियम 2009 की धारा 19 के शेड्यूल-1(b)(3)(ii) के अनुसार पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के रूप में नियुक्त किए गए. कला शिक्षा, स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा पढ़ाने के लिए पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने के लिए थे.
इनकी नियुक्ति सिर्फ उन स्कूलों में की जानी थी जहां छात्र संख्या 100 से अधिक थी. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि विवादित सर्कुलर में दी गई शर्त में असिस्टेंट टीचर/हेडमास्टर के रूप में अनुभव की आवश्यकता है, हालांकि यह 19.02.2021 के सरकारी आदेश के क्लॉज-4 के तहत परिकल्पित नहीं है.
1978 के नियमों के नियम-4, जैसा कि वर्ष 2019 में संशोधित किया गया था और साथ ही 19.02.2021 के सरकारी आदेश के क्लॉज 4 के अनुसार Experience प्रमाण पत्र जमा करने के लिए एक फॉर्मेट निर्धारित करके असिस्टेंट टीचर/हेडमास्टर के रूप में Experience की अतिरिक्त शर्त शामिल करने का कोई तर्कसंगत औचित्य नहीं है.
स्टेट की ओर से कहा गया कि प्राइमरी/अपर प्राइमरी स्कूल में टीचर के तौर पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति के पास NCTE के 23.08.2010 के नोटिफिकेशन के प्रावधानों के अनुसार न्यूनतम योग्यता होनी चाहिए. चूंकि पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर टीचर के पदों पर पार्ट-टाइम या फुल-टाइम काम नहीं कर रहे थे, इसलिए 1978 के नियमों के नियम 4(2) में बताए गए ‘Teaching Experience’ शब्द की कोई भी व्याख्या असमान लोगों को समान मानने जैसा होगा और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन होगा.
कोर्ट ने साफ किया कि 1978 के नियम जूनियर हाई स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए थे, जिसमें विशेष रूप से हेडमास्टर की भूमिका को एक प्रमोशनल पद के रूप में संबोधित किया गया था जिसमें शैक्षणिक और प्रशासनिक दोनों कर्तव्य शामिल थे. 2019 में संशोधित नियम 4 के अनुसार, इन पदों के लिए कुछ खास न्यूनतम योग्यताएं जरूरी हैं.
जरूरी Experience में किसी भी कैज़ुअल, पार्ट-टाइम, मानद या नॉन-कैडर पद पर प्राप्त Experience को शामिल नहीं किया जा सकता
कोर्ट ने कहा, नियमों की एक सामंजस्यपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण व्याख्या से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि उसमें बताए गए टीचिंग अनुभव का मतलब एक मान्यता प्राप्त जूनियर हाई स्कूल या सीनियर बेसिक स्कूल में, जो रेगुलर टीचिंग कैडर का हिस्सा हो, विधिवत नियुक्त टीचर के रूप में प्राप्त Experience होना चाहिए. हेडमास्टर का पद संस्थान का एकेडमिक हेड होता है, इसलिए जरूरी Experience में किसी भी कैज़ुअल, पार्ट-टाइम, मानद या नॉन-कैडर पद पर प्राप्त Experience को शामिल नहीं किया जा सकता.
वैधानिक भर्ती नियमों के तहत निर्धारित पात्रता शर्तों की सख्ती से व्याख्या की जानी चाहिए और उनका पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए. न तो नियुक्ति करने वाला अधिकारी और न ही कोर्ट जरूरी योग्यताओं को कम कर सकता है, उनमें ढील दे सकता है, या उन्हें बदल सकता है, जब तक कि नियमों में खुद ऐसा करने की शक्ति स्पष्ट रूप से न दी गई हो. हेडमास्टर के पद के लिए टीचिंग अनुभव निर्धारित करने का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता, एकेडमिक नेतृत्व और रेगुलर सेवा के माध्यम से प्राप्त संस्थागत जिम्मेदारियों से परिचित होना सुनिश्चित करना है.
कोर्ट ने कहा
केस: कुमारी डिंपल सिंह और 12 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य.
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