SARFAESI Act की धारा 14 के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क करने का अधिकार एक ठोस वैधानिक उपाय, 30 दिन में पूरी करें कार्यवाही

जिससे धारा 26E के तहत स्पष्ट रूप से मान्यता प्राप्त वैधानिक प्राथमिकता कमजोर हो जाएगी. ऐसा परिणाम विधायी डिजाइन के पूरी तरह से असंगत होगा. इस कमेंट के साथ जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की बेंच ने आधा दर्जन याचिकाओं को एलाउ करते हुए आदेश दिया है कि सभी सक्षम न्यायालय 30 दिन के भीतर कार्यवाही पूरी करें.
यह रिट सी याचिका मे. हिन्दुजा हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की तरफ से दाखिल की गयी थीं. इसमें संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मजिस्ट्रेटों को सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एक्ट, 2002 (SARFAESI Act 2002) की धारा 14 के तहत उनके द्वारा दायर आवेदनों पर एक समय-सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया था ताकि याचिकाकर्ताओं को संपत्ति का भौतिक कब्जा मिल सके.
सभी याचिकाओं में याचिकाकर्ता एक ही था जो एक पंजीकृत हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है और SARFAESI Act, 2002 के तहत एक अधिसूचित वित्तीय संस्थान है. याचिकाओं में संबंधित मजिस्ट्रेटों द्वारा वैधानिक कर्तव्यों के प्रयोग में प्रशासनिक देरी को चुनौती दी गई थी जो याचिकाकर्ता के अनुसार, SARFAESI Act 2002 के तहत निर्धारित अनिवार्य समय-सीमा और समय-सीमा सुनिश्चित करने के लिए इस न्यायालय द्वारा विभिन्न रिट याचिकाओं में जारी निर्देशों का उल्लंघन है. सभी याचिकाओं में कानून का एक सामान्य प्रश्न इनवाल्व था इसलिए कोर्ट ने इनकी सुनवाई एक साथ की और सामान्य निर्णय द्वारा तय किया.
SARFAESI Act 2002 की धारा 13(2) के तहत मांग नोटिस जारी किए गए
मामले में उधारकर्ताओं ने याचिकाकर्ता से ऋण लिया. इससे संबंधित संपत्तियों पर एक इक्विटेबल मॉर्गेज बनाया गया. पुनर्भुगतान में चूक के बाद ऋण खातों को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स घोषित कर दिया गया. वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, SARFAESI Act 2002 की धारा 13(2) के तहत मांग नोटिस जारी किए गए. ऋण का भुगतान नहीं किया गया तो याचिकाकर्ता ने धारा 13(4) के तहत संपत्तियों का प्रतीकात्मक कब्जा ले लिया.
इसके बाद उसने सुरक्षित संपत्तियों का असल कब्जा पाने के लिए सक्षम कोर्ट में एप्लीकेशन दायर कीं. सभी याचिकाओं में शिकायत यह है कि एप्लीकेशन पर तय समय सीमा के अंदर फैसला नहीं किया गया है, और संबंधित अधिकारियों पर आरोप है कि वे बिना कोई ठोस आदेश दिए, सिर्फ तारीखें तय कर रहे हैं.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कानून डीएम और मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पर यह अनिवार्य जिम्मेदारी डालता है कि वे ऐसे आवेदनों पर तय समय-सीमा के अंदर फैसला करें. वकील ने कहा कि सेक्शन 14 के तहत कार्यवाही में, अक्सर कर्जदारों के कहने पर बार-बार सुनवाई टालना गलत है और ऐसी देरी SARFAESI Act के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देती है.

प्रतिवादियों की ओर से पेश वकील ने कहा कि सेक्शन 14 के तहत आवेदनों के निपटारे में देरी का कारण पूरी तरह से मजिस्ट्रेटों और संबंधित अधिकारियों को नहीं ठहराया जा सकता. तर्क दिया गया कि अचल संपत्ति के कब्जे को प्रभावित करने वाले आदेश पारित करने से पहले पर्याप्त अवसर दिया जाना आवश्यक है.
कोर्ट ने कहा कि सभी रिट याचिकाएं SARFAESI एक्ट, 2002 के सेक्शन 14 के तहत उत्पन्न होने वाले कानून का एक सामान्य प्रश्न उठाती हैं. रिट C संख्या 42639/2025 को छोड़कर सभी याचिकाओं में, याचिकाकर्ता वित्तीय संस्थानों द्वारा सक्षम मजिस्ट्रेटों के समक्ष दायर भौतिक कब्जे के लिए आवेदनों पर फैसला करने में देरी को चुनौती दी गई है, इसके बावजूद कि कानून में निपटारे के लिए एक समय-सीमा निर्धारित है.
रिट C संख्या 42639/2025 में, आवेदन पर फैसला हो गया है, हालांकि वित्तीय संस्थान अभी भी प्रभावी भौतिक कब्जे में नहीं है क्योंकि जिस दिन याचिकाकर्ता को कब्जा सौंपा गया था, उसी दिन अतिक्रमण हो गया था. कोर्ट ने रिट सी संख्या 42608/2025, रिट सी संख्या 42610/2025, रिट सी संख्या 42622/2025, रिट सी संख्या 42645/2025 और रिट सी संख्या 42660/2025 स्वीकार करते हुए जिला मजिस्ट्रेट/मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के SARFAESI Act की धारा 14 के तहत दायर आवेदनों, केस संख्या 3239/2025, केस संख्या 3238/2025, केस संख्या 3236/2025, केस संख्या 3240/2025, और केस संख्या 3237/2025 पर तीस दिनों की अवधि के भीतर निर्णय लें.
कोर्ट ने रिट C नंबर 42639/2025 को भी स्वीकार कर लिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता पहले से पारित आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से आवेदन कर सकता है. कोर्ट ने कहा कि इस न्यायालय ने रिट सी संख्या 7126/2021, इंडियन बैंक (पूर्ववर्ती इलाहाबाद बैंक) बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 4 अन्य में 24.08.2021 को कई निर्देश जारी किये थे. इसका जिक्र वर्तमान रिट के जजमेंट में भी किया गया.
इस न्यायालय के समक्ष बड़ी संख्या में याचिकाएं आने के मद्देनजर, हम उत्तर प्रदेश राज्य के सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश देते हैं कि वे SARFAESI Act की धारा 14 के तहत दायर सभी लंबित आवेदनों का एक रिकॉर्ड/रजिस्टर रखें, जो जिला मजिस्ट्रेट को (पखवाड़े के आधार पर) उस जिले में किए गए ऐसे सभी आवेदनों और उस समय के भीतर उनके निपटान का विवरण स्पष्ट रूप से बताए.
उक्त रजिस्टर का जिला मजिस्ट्रेट द्वारा समय-समय पर विधिवत निरीक्षण किया जा सकता है और उस पर उनके द्वारा प्रतिहस्ताक्षर भी किए जा सकते हैं. ऐसे रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों के आधार पर, SARFAESI Act की धारा 14 के तहत दायर सभी आवेदनों की तिमाही रिपोर्ट, प्रत्येक आवेदन के लंबित रहने की अवधि के साथ, इस न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को सारणीबद्ध रूप में भेजी जाए, जो यह इंगित करे कि अधिनियम की आवश्यकता अक्षरशः और भावना से पूरी की जा रही है, जो इसे ऋण वसूली न्यायाधिकरणों और ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों के कामकाज से संबंधित उपयुक्त समिति के समक्ष रखेंगे.
बेंच ने दिया निर्देश
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में, ऐसा प्रतीत होता है कि आम तौर पर वास्तविक भौतिक कब्जा प्राप्त करने की कार्यवाही कानून द्वारा निर्धारित समय सीमा से बहुत अधिक विलंबित हो रही है. इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी होती है और अधिनियम का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है. इस आदेश की एक कॉपी रजिस्ट्रार जनरल द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को आगे की सूचना और राज्य के सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और डेट रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल, प्रयागराज द्वारा पालन के लिए भेजने का निर्देश दिया गया है.
M/S Hinduja Housing Finance Ltd V/s State Of U.P. And 3 Others
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