बयान से पलटी पीड़िता, हाईकोर्ट ने Government compensation 4.5 लाख वापस करने का निर्देश दिया
कोर्ट ने कहा यह एससी एसटी एक्ट का दुरूपयोग, आरोपी अपीलार्थियों पर भी लगाया पांच लाख रुपए हर्जाना

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट का पीड़िता द्वारा दुरुपयोग कर सरकारी मुआवजा (Government compensation) लेने पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने पीड़िता राम कली और उनकी दो बहुओं कविता और सविता को सरकार से झूठे केस कर लिये गये 4.5 लाख रुपये सरकारी मुआवजा (Government compensation) तत्काल वापस लौटाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आरोपी अपीलार्थियों पर भी 5 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है. जिसे हाईकोर्ट कल्याण समिति में जमा करना होगा.
कोर्ट ने विचारण अदालत को मुकदमे का निस्तारण बिना बदले बयान से प्रभावित हुए गुण-दोष के आधार पर तय करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस शेखर कुमार यादव ने रामेश्वर सिंह व 18 अन्य की अपील को खारिज करते हुए दिया है. अपील में केस कार्यवाही रद करने की मांग की गई थी.
प्रयागराज की राम कली (पीड़िता) ने एससी/एसटी एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत रामेश्वर सिंह समेत 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. हाई कोर्ट में दिए बयान में कहा कि उसके अंगूठे के निशान खाली कागज पर लिए गए थे, जबकि पहले उसने और उसकी बहुओं ने कोर्ट में कहा था कि उन्होंने ने एफआईआर दी है और आरोपों की पुष्टि की थी. इसके आधार पर उन्होंने सरकार से डेढ़ डेढ़ लाख रुपये का मुआवजा (Government compensation) भी लिया था. अब कहा कि एफआईआर नहीं की थी, सादे कागज पर अंगूठा निशान लिया गया था.
Government compensation लेने के बाद आरोपों से पलटना दयालु व्यवस्था का घोर दुरुपयोग
हाई कोर्ट ने कहा कि यह “कानूनी प्रक्रिया और एससी/एसटी एक्ट की दयालु व्यवस्था का घोर दुरुपयोग” है. कोर्ट ने इसे “राज्य के साथ धोखाधड़ी” बताया. कोर्ट ने मुकदमे की सच्चाई पर कोई राय नहीं दी, लेकिन पीड़िता के विरोधाभासी बयान और मुआवजा (Government compensation) लेने के बाद आरोपों से पलटने को गंभीरता से लिया है.
कोर्ट ने कहा कि राम कली, कविता और सविता को कुल 4,50,000 रुपये का मुआवजा (Government compensation) तुरंत सरकार को वापस करना होगा. आरोपी अपीलकर्ताओं पर पांच लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है, जो 20 दिनों में हाई कोर्ट वेलफेयर फंड में जमा करना होगा. कोर्ट ने कहा अगर रकम नहीं लौटाई गई तो रजिस्ट्रार जनरल कानूनी कार्रवाई कर वसूली करेगे.
ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह पीड़िता के नए बयान से प्रभावित हुए बिना मुकदमा कानून के मुताबिक आगे बढ़ाएं. हाई कोर्ट ने अभियुक्तों की अपील खारिज कर दी और कहा कि ऐसे मामले कानून की मंशा के खिलाफ हैं और दंडात्मक कार्रवाई के योग्य हैं.
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