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शादी शुदा पुरुष जानता था कि शादी का Promise False है, BNS की धारा 69 के तहत चार्जशीट रद्द करने से इलाहाबाद हाई कोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादी के कथित झूठे वादे (Promise) पर शारीरिक संबंध बनाए रखने के आरोप में चल रही केस कार्रवाई रद्द करने से इनकार कर दिया है. जस्टिस अवनीश सक्सेना की बेंच ने विपिन कुमार और तीन की तरफ से दाखिल याचिका खारिज करते हुए कहा कि सेक्शन 482 CrPC या 528 BNSS के तहत हाई कोर्ट की शक्तियों का दायरा बहुत बड़ा है, लेकिन इसका इस्तेमाल सावधानी से और रेयरेस्ट ऑफ रेयर और सही मामलों में किया जाना चाहिए. यह शक्ति मनमाना अधिकार क्षेत्र नहीं देती है और इसका इस्तेमाल कानून की प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जाता है.

शादी शुदा पुरुष जानता था कि शादी का Promise False है, BNS की धारा 69 के तहत चार्जशीट रद्द करने से इलाहाबाद हाई कोर्ट का इनकार

कानून की यह बात कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी बनाम हरियाणा राज्य और हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल के मामलों में कही गई है. सोम मित्तल बनाम कर्नाटक सरकार के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने सेक्शन 482 CrPC का दायरा बताते हुए ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस’ कहा है. सुप्रीम कोर्ट आज तक लगातार इस बात पर कायम है, जिसे कई फैसलों से पक्का किया गया है, जिनमें सबसे नए हैं नरेश पॉटरीज बनाम आरती इंडस्ट्रीज और पुनीत बेरीवाला बनाम दिल्ली राज्य (NCT)10. इसलिए, सेक्शन 528 BNSS के तहत एप्लीकेशन में कोई दम नहीं है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट में यह केस धारा 528 बीएनएसएस के तहत चार आरोपी-आवेदकों द्वारा 22 जुलाई 2025 के आरोप पत्र, 26 अगस्त 2025 के समन आदेश और केस संख्या 554/2025 (राज्य बनाम विपिन कुमार और अन्य) की कार्यवाही को रद्द करने की प्रार्थना के साथ दाखिल किया गया था जो अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देवबंद, सहारनपुर की अदालत के समक्ष केस अपराध संख्या 312/2025 से उत्पन्न हुआ था. बीएनएस की धाराओं 69, 115 (2), 352, 351 (3) के तहत शादी का झूठा वादा (Promise) करके यौन संबंध बनाने का मुख्य आरोप लगाया गया था. इसमें आरोपी के साथ उसकी पत्नी, बहन और बहनोई को भी आरोपित बनाया गया था.

2018 से लगातार शादी के झूठे Promise पर शारीरिक संबंध में थी

तथ्यों के अनुसार पीड़िता फेसबुक के माध्यम से आरोपी के संपर्क में आई और मई 2018 से लगातार शादी के झूठे वादे (Promise) पर शारीरिक संबंध में थी. चार बार पीड़िता गर्भवती हुई और हर बार उसका गर्भपात कराया गया. वह पांचवीं बार फिर गर्भवती थी. जब भी उसने शादी के Promise की याद दिलाई तो आरोपी जवाब देने से बचने में कामयाब रहा.

पीड़िता के गर्भवती होने की बात सुनकर आरोपी ने उस पर बच्चा गिराने का दबाव बनाया. आवेदक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया है और उसे जान से मारने, जानबूझकर चोट पहुंचाने और गाली-गलौज करने की धमकी दी. इसके बाद पहली आवेदक की पत्नी, बहन और बहनोई ने उसे जान से मारने की धमकी देना शुरू कर दिया, उसे पैसे देने का लालच दिया और उसके परिवार पर भारी रकम पर समझौता करने का दबाव बनाया.

“पीड़िता को पहले से पता था कि आरोपी उस समय शादीशुदा था जब उसने उसके साथ सेक्स किया था, यह ट्रायल का मामला है, क्योंकि रिकॉर्ड इस बात पर साफ और साफ है कि पीड़िता को आरोपी मैरिटल स्टेटस के बारे में नहीं पता था. इसके अलावा, आरोपी को पीड़िता के साथ सेक्स करते समय पता था कि वह एक शादीशुदा आदमी है और पीड़िता से किया गया उसका शादी का झूठा वादा (Promise) टूट जाएगा, इसलिए, धोखे का आरोप सेक्स करने की शुरुआत से ही है.”
जस्टिस अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच ने कहा

पीड़िता ने धारा 180 बीएनएसएस के तहत अपने बयान में एफआईआर में बताई गई उसी घटना को दोहराया है. उसने कहा कि वह 26 वर्ष की है, उसने स्नातक (कला स्नातक), जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) का कोर्स किया है और बयान दर्ज करते समय वह छह महीने की गर्भवती थी. पीड़िता ने धारा 183 बीएनएसएस के तहत अपना बयान दिया जिसमें उसने फिर से एफआईआर में किए गए कथनों को दोहराया.

आवेदकों के वकील का तर्क था कि आरोपी ने महिला के साथ यौन संबंध बनाने के लिए कोई धोखाधड़ी का तरीका नहीं अपनाया. उन्होंने कहा कि महिला वर्ष 2016 में अपने परिवार के साथ आरोपी की शादी में शामिल हुई थी और जानती थी कि आरोपी आवेदक शादीशुदा है, इसके बावजूद उसने आरोपी आवेदक नंबर से वित्तीय सहायता लेने के लिए यौन संबंध बनाए.

कोर्ट ने पार्टियों की तरफ से की गई आमने-सामने की दलीलों पर विचार किया है और रिकॉर्ड देखा. कोर्ट ने कहा, इस एप्लीकेशन में चिंता की बात यह है कि क्या पहली नजर में पीड़िता द्वारा आरोपी आवेदक पर लगाए गए आरोप ट्रायल को आगे बढ़ाने के लिए काफी हैं या ट्रायल जारी रखना कानून के प्रोसेस का गलत इस्तेमाल होगा?

  • कोर्ट ने कुलदीप वर्मा बनाम स्टेट ऑफ यूपी और अन्य पांच (जिसे अवनीश सक्सेना, जस्टिस ने लिखा है) के केस पर फैसला करते हुए भारतीय न्याय संहिता, 2023 के नए सेक्शन 69 पर विचार किया है. इससे जुड़े पैराग्राफ नंबर 15, 16 और 21 नीचे दोहराए गए हैं:
  • “15. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के सेक्शन 69 में यह प्रावधान है कि “जो कोई भी धोखे से या किसी महिला से शादी का वादा (Promise)  करके, उसे पूरा करने के इरादे के बिना, उसके साथ सेक्सुअल इंटरकोर्स करता है, ऐसा सेक्सुअल इंटरकोर्स रेप का अपराध नहीं माना जाएगा, उसे दस साल तक की जेल की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी देना होगा.”
  • 16. बीएनएस की धारा 69 में निहित प्रावधान दंड कानून में एक नया समावेश है, जिसमें शादी का झूठा वादा (Promise) सहित धोखे से किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाना ‘बलात्कार’ नहीं है, बल्कि इसे दंडनीय बनाया गया है. अधिनियम के लागू होने से पहले न्यायालय धारा 375 आईपीसी (बलात्कार) के प्रावधानों के साथ धारा 90 आईपीसी (डर या गलतफहमी के तहत दी गई सहमति) के प्रावधान के मद्देनजर पक्षों के आचरण की व्याख्या करते थे.
  • 69 बीएनएस के तहत ‘धोखेबाज साधनों’ के लिए दिए गए स्पष्टीकरण में “नौकरी या पदोन्नति का झूठा वादा, प्रलोभन, या पहचान छिपाकर शादी करना शामिल होगा.

बेंच ने कहा, वर्तमान मामले में आरोपी आवेदक एक विवाहित व्यक्ति है और सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से पीड़िता के संपर्क में आया था. पीड़िता को एक होटल में बुलाया जहां आरोपी  ने पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाए. पीड़िता का मामला यह है कि वह नहीं जानती थी कि आरोपी विवाहित है. उसे यह भी नहीं पता था कि आरोपी उसके गांव की किसी लड़की का पति है या नहीं.

पीड़िता को पहले से पता था कि आवेदक उस समय विवाहित था जब उसने उसके साथ यौन संबंध बनाए, यह मुकदमे का विषय है. इसके अलावा, पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाते समय आरोपी जानता था कि वह एक विवाहित व्यक्ति है और पीड़िता से किया गया शादी का उसका झूठा वादा (Promise) टूट जाएगा, इसलिए, धोखे का आरोप यौन संबंध बनाने के शुरू से ही है. यह भी ट्रायल का मामला है और दूसरे सह-आरोपियों पर लगाए गए क्रिमिनल इंटिमिडेशन के आरोप भी रिकॉर्ड में साफ और स्पष्ट हैं और ट्रायल का विषय हैं. इसलिए केस की कार्रवाई रद नहीं की जा सकती.

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