Prechargepay LLP के संरक्षक कादिर को नहीं मिला HC का संरक्षण
प्रयागराज के थोक पटाखा कारोबारी को नहीं मिली अग्रिम जमानत

Prechargepay LLP फर्म के कथित संरक्षण प्रयागराज के बड़े थोक कारोबारियों में से एक मो. कादिर को फ्रॉड के केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. कोर्ट ने उसके खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमों के इतिहास को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है. इससे फरारी काट रहे कादिर की समस्या और बढ़ गयी है. बता दें कि पुलिस पहले ही उसके घर नोटिस चस्पा कर चुकी है. इसमें चेतावनी दी गयी है कि जल्द पुलिस के सामने पेश न होने या कोर्ट में सरेंडर न करने की स्थिति में उसकी सम्पत्ति को कुर्क कर लिया जायेगा.
यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जितेन्द्र कुमार सिनहा ने मोरु कादिर की तरफ से दाखिल आपराधिक अग्रिम जमानत याचिका (Prechargepay LLP) पर दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद गुरुवार 16 अक्टूबर को सुनाया. वर्तमान आवेदन मुकदमा अपराध संख्या 86/2024, धारा 409, 504, 506, 34 भारतीय दंड संहिता थाना शाहगंज जिला प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए इस प्रार्थना के साथ प्रस्तुत किया गया था कि गिरफ्तारी की स्थिति में आवेदक को जमानत पर रिहा किया जाए.
इस मामले की सुनवाई मंगलवार को भी हुई थी. उस दिन सप्लीमेंट्री एफीडेविट में मुकदमों की संख्या कम दर्शाये जाने पर आपत्ति दर्ज कराये जाने के बाद कोर्ट नया सप्लीमेंट्री एफीडेविट दाखिल करने के साथ ही केस में सुनवाई की नयी तिथि 16 अक्टूबर मुकर्रर की थी. गुरुवार को आवेदक के अधिवक्ता द्वारा दाखिल पूरक शपथ पत्र अभिलेख पर लिया गया. मो. कादिर (Prechargepay LLP) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले के अधिवक्ता द्वारा भी प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया गया.

आवेदक का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आवेदक को वर्तमान अभियोजन में झूठा फंसाया गया है. आवेदक ‘Prechargepay LLP’ फर्म का भागीदार नहीं है. वह उक्त फर्म (Prechargepay LLP) के मामलों से कहीं से भी जुड़ा नहीं है. उनकी तरफ से तर्क दिया गया कि धन प्राप्त करने का आरोप सह-अभियुक्त मोहम्मद काशिफ और मोहम्मद आसिफ पर है.
दूसरी ओर, प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने वाले के अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत देने की प्रार्थना का विरोध किया है और कहा कि आवेदक लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया से बच रहा है. आवेदक (Prechargepay LLP के संरक्षक) के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका है और इसके बाद भी हाजिर न होने पर 7 अक्टूबर 2025 को उसके घर पर नोटिस चस्पा की जा चुकी है.
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अधिवक्ता ने यह तर्क भी दिया कि जाँच के दौरान कई निवेशकों ने कहा है कि आवेदक ही फर्म के मामलों के लिए जिम्मेदार था. सामने उसका चेहरा नहीं था लेकिन पर्दे के पीछे से पूरा प्रबंधन वही देखा करता था. मोरु कादिर का नाम इनवाल्व होने के चलते लोगों ने करीब 100 करोड़ रुपये तक इंवेस्ट कर दिये.
Prechargepay LLP के संरक्षक के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका
राज्य की ओर से AGA ने भी अग्रिम जमानत देने की प्रार्थना का विरोध किया है और प्रथम सूचक के अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों का समर्थन किया. बताया कि बड़ी संख्या में निवेशकों ने पुलिस की जांच में कहा है कि आवेदक (Prechargepay LLP के संरक्षक) ने उन्हें सह-अभियुक्त की फर्म में पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित किया. यह भी प्रस्तुत किया गया है कि आवेदक का नाम प्राथमिकी में है और जाँच अभी भी जारी है और आवेदक जाँच में सहयोग नहीं कर रहा है.
कोर्ट ने कहा कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता के साथ-साथ जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री पर विचार करते हुए यह न्यायालय इस स्तर पर अग्रिम जमानत देने के लिए इच्छुक नहीं है. इसी के साथ कोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया. बता दें कि हाई कोर्ट आने से पहले याची डिस्ट्रिक्ट जज के यहां से भी अग्रिम जमानत पाने का प्रयास किया था लेकिन सफलता नहीं मिली थी.