गोवध निरोधक कानून में DM के Order की अपील का समय तय नहीं
देरी से दाखिल अपील खारिज करने का आदेश हाई कोर्ट ने किया रद, कमिश्नर को मेरिट पर अपील तय करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोवध निरोधक कानून के तहत जिलाधिकारी के वाहन जब्ती आदेश (Order) के खिलाफ दाखिल करने में देरी के आधार पर कमिश्नर द्वारा अपील खारिज करने के आदेश (Order)को रद कर दिया है और अपील नये सिरे से तय करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने कहा जिलाधिकारी के आदेश (Order) के खिलाफ अपील दाखिल करने की समय सीमा तय नहीं है और 15 अक्टूबर 24 की अधिसूचना में देरी माफी की अर्जी का उपबंध नहीं है. ऐसे में कमिश्नर का आदेश (Order) विधि सम्मत नहीं है. यह आदेश जस्टिस अविनाश सक्सेना ने अंगद मौर्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता ईशान मेहता ने बहस की.
इनका कहना था कि जब्त वाहन किराये पर दिया गया था. गोरखपुर के खोरावर थाने में दर्ज आपराधिक मामले में जिलाधिकारी के आदेश (Order) पर वाहन जब्त कर लिया गया है. इसके खिलाफ अपील कमिश्नर ने देरी से दाखिले के कारण खारिज कर दी. जिसे याचिका में चुनौती दी गई है. सरकारी वकील का कहना था कि याचिका के बजाय कमिश्नर के आदेश (Order) के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी देनी चाहिए. याचिका पोषणीय नहीं है.
याची के अधिवक्ता का कहना था कि 15 अक्टूबर 24 की अधिसूचना में मियाद माफी की धारा 5 उपलब्ध नहीं है. याची की आपत्ति निरस्त कर दी गई. जबकि अधिसूचना में जिलाधिकारी के आदेश (Order) के खिलाफ अपील की समय सीमा निर्धारित नहीं है और अधिसूचना में कमिश्नर को पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार दिया गया है. कोर्ट ने कमिश्नर के आदेश को सही नहीं माना और अपील मेरिट पर यथाशीघ्र तय करने का निर्देश दिया तथा कहा कि समय बीतने के साथ वाहन में जंग लग सकती है.
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