वाराणसी में नहीं दर्ज होगा Rahul Gandhi के खिलाफ केस, 173 (4) के तहत आवेदन निरस्त
लोअर कोर्ट ने कहा सिर्फ आशंका पर की गयी थी मांग, ठोस साक्ष्य नहीं, आवेदन निरस्त

नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के खिलाफ वाराणसी के सारनाथ थाने में अमेरिका में दिये गये बयान के आधार पर केस दर्ज नहीं किया जायेगा. वाराणसी की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश नीरज कुमार त्रिपाठी ने बीएनएसएस की धारा 173 (4) के तहत आवेदन पत्र दाखिल करने वाले नागेश्वर मिश्रा का प्रार्थना पत्र निरस्त करते हुए पत्रावली दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया है. इस फैसले पर कांग्रेस नेताओं और Rahul Gandhi के समर्थकों ने राहत की सांस ली है. बता दें कि यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट तक भी पहुंचा था. हाई कोर्ट से Rahul Gandhi को कोई राहत नहीं मिली थी.
यह प्रकरण पिछले साल सामने आया था जब Rahul Gandhi अमेरिका के दौरे पर गये थे. वहां उन्होंने सिख समुदाय के लोगों से संवाद किया था. इस दौरान उनके द्वारा कहे गये शब्दों को बेहद आपत्तिजनक बयान करार देते हुए वाराणसी जिले के सारनाथ के रहने वाले नागेश्वर मिश्रा ने Rahul Gandhi के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास शुरू कर दिया था.
उनका कहना था कि Rahul Gandhi के बयान से भारत में सिक्खों के बीच असुरक्षा का माहौल है. Rahul Gandhi ने कथित तौर पर कहा था कि एक सिक्ख के तौर पर उन्हें पगड़ी पहनने की अनुमति मिलेगी या नहीं? और क्या यह गुरुद्वारे जा सकेंगे? उन्होंने अपने कार्यक्रम में उपस्थित एक सिक्ख पत्रकार भलिन्दर सिंह का नाम पूछने के बाद यह बात कही. नागेश्वर मिश्र का दावा था कि जिस पर खुद भलिन्दर सिंह और अन्य सिक्खों ने भी आपत्ति जताई. यह बयान उकसावे और अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोगों को लडाने भिड़ाने वाला है.
उनके मुताबिक Rahul Gandhi का बयान इतना भड़काऊ है कि खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने उनके कथन को सही करार दिया. खालिस्तानी आंतकी उनके इस बयान का सहारा लेकर भारत में हिंसा व अराजकता फैलाने का प्रयास करेंगे और दुनिया में भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार करेंगे.
उनका कहना था कि Rahul Gandhi ने सीएए के विरुद्ध 14.12.2019 को दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली को सम्बोधित करते हुए ऐसा ही दुष्प्रचार करके दिल्ली के शाहीनबाग में व्यापक धरना प्रदर्शन को अजाम दिया था. जिसका दु:खद अंत हिंसा और अराजकता से हुआ था, जिसमें 100 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी थी.
उनके अनुसार राहुल गांधी का उक्त बयान भारत के विरुद्ध गृह युद्ध भड़काने की साजिश है. जिसका प्रमाण है कि विगत दिनों राहुल गांधी के चहेते व कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने बयान दिया कि भारत में भी बांगलादेश जैसी स्थिति हो सकती है जो दण्डनीय अपराध है.

उन्होंने थाने से लेकर पुलिस कमिश्नर वाराणसी तक के यहां आवेदन दिया लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला तो उसने वाराणसी की कोर्ट में आवेदन दिया. कोर्ट ने इसे 28 नवंबर 2024 को खारिज कर दिया. इसके बाद श्री मिश्र ने वाराणसी की एमपीएमएलए कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की. कोर्ट ने पत्रावली विचारण न्यायालय को इस निर्देश के साथ प्रेषित किया कि विद्वान मजिस्ट्रेट सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संप्रेषित सिद्धांतों के दृष्टिगत पुनः सुनवाई कर विधिनुसार आदेश पारित करना सुनिश्चित करें.
इस फैसले को राहुल गांधी की तरफ से हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी जिस पर कोर्ट ने कमेंट किया कि संबंधित मजिस्ट्रेट के लिए आवश्यक है कि वह निष्कर्ष दर्ज करे कि उक्त व्यक्ति के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं, ताकि एफआईआर दर्ज की जा सके और मामले की जांच की जा सके. इसके बाद मामला फिर से लोअर कोर्ट पहुंचा था.
तथ्यों के आधार पर Rahul Gandhi के खिलाफ किसी सज्ञेय अपराध का कारित किया जाना प्रकट नहीं
अपना फाइनल डिसीजन सुनाते हुए लोअर कोर्ट ने कहा कि एक भाषण के आधार पर आवेदक द्वारा खालिस्तानी संगठन द्वारा भारत में हिंसा व अराजकता फैलाने का प्रयास एवं दुनिया में भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार करने की आशंका मात्र व्यक्त की गई है.
आवेदक द्वारा उक्त आशंका के अतिरिक्त ऐसा कोई ठोस आधार या ऐसी किसी घटना का उल्लेख प्रार्थना पत्र में वर्णित नहीं किया है जिससे आवेदक के इस कथ्य को बल मिलता हो कि विपक्षी के उपरोक्त भाषण के अंश भारत गणराज्य के सम्प्रभुता, एकता व अखण्डता को प्रदील करने वाली प्रकृति का है. अथवा विपक्षी द्वारा दिया गया भाषण आरत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने का कोई दुष्प्रेरण अथवा षडयंत्र की श्रेणी में आता हो.
प्रार्थी द्वारा प्रार्थना पत्र में विपक्षी की अमेरिका यात्रा के दौरान दिए गए भाषण की तिथि, समय एवं स्थान का उल्लेख भी नहीं किया गया है. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न जजमेंट में दी गयी रूलिंग का हवाला देते हुए कहा कि प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर किसी सज्ञेय अपराध का कारित किया जाना प्रकट नहीं होता है.
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