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पार्टियों ने आपसी सहमति से Marital dispute सुलझा लिया तो FIR पर जांच जारी रखना समय और धन की बर्बादी

पार्टियों ने आपसी सहमति से Marital disputes सुलझा लिया तो FIR पर जांच जारी रखना समय और धन की बर्बादी

पार्टियों ने आपसी सहमति से तलाक की शर्तों पर Marital dispute को सुलझा लिया हो और वे आगे मुकदमे की कार्रवाई से बचना चाहते हों तो एफआईआर के आधार पर जांच को आगे जारी रखने की अनुमति देना प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. Dispute पर FIR जांच जारी रखना समय, धन और संसाधनों की बर्बादी होगी. जांच का मुकदमे से कुछ भी सार्थक नहीं निकलेगा, भले ही पुलिस जांच में किसी तरह की सामग्री शामिल करके चार्जशीट दाखिल कर दे. इस स्थिति में एफआईआर को रद कर देना ही बेहतर होगा.

इस कमेंट के साथ इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने प्रयागराज जिले के उतरांव थाने में दर्ज केस क्राइम नंबर 0193/2023 वाली एफआईआर को रद कर दिया है. इस केस में आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 448, 452, 323, 504 और 506 के तहत केस दर्ज कराया गया था.

बेंच ने आदेश दिया है कि थाना उतरांव की जीडी में प्रविष्टि की जाए कि एफआईआर (Dispute) और उससे संबंधित सभी कार्यवाही न्यायालय के आदेशों के तहत रद्द कर दी गई हैं. आदेश को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रयागराज द्वारा एक सप्ताह के भीतर लागू करवाया जाएगा. कोर्ट ने रजिस्ट्रार (कंप्लायंस) को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश को मंगलवार 27 जनवरी तक सीजेएम के जरिए पुलिस कमिश्नर और स्टेशन हाउस ऑफिसर उतरांव तक पहुंचा दें.

यह रिट याचिका पहले याचिकाकर्ता, मंगेश यादव जो प्रतिवादी कंचन यादव के पति हैं और उनके छह रिश्तेदारों ने दायर की थी. इसमें 16 मार्च 2023 की दर्ज करायी गयी एफआईआर को चुनौती दी गई थी. जिससे केस क्राइम नंबर 41 ऑफ 2023, भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498-A, 323, 406, 326-B और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3/4 के तहत (Marital dispute), पुलिस स्टेशन उतरांव, जिला प्रयागराज में मामला दर्ज कराया गया.

हाईकोर्ट मध्यस्थता और सुलह केंद्र में भेजा गया ताकि Marital dispute का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके

जब यह याचिका सुनवाई के लिए आई तो पक्षों को 15 अप्रैल 2023 के आदेश के तहत हाईकोर्ट मध्यस्थता और सुलह केंद्र में भेजा गया ताकि Marital disputes का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके. कोर्ट के निर्देश के अनुसार दोनों पक्ष मध्यस्थता केंद्र के सामने पेश हुए. मध्यस्थता केन्द्र की रिपोर्ट से पता चलता है कि मध्यस्थता पूरी हो गई थी लेकिन पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए. इसी तरह यह मामला इस न्यायालय के बोर्ड पर रखा गया.

अब पहले सूचना देने वाले और पीड़ित कंचन यादव की ओर से संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दायर किया गया जिसमें कहा गया है कि पक्षों ने अदालत के बाहर आपसी समझौते से अपने मतभेदों (Marital dispute) को सुलझा लिया है. याचिकाकर्ता  और प्रतिवादी ने 19 नवंबर 2025 को प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, इलाहाबाद के समक्ष अपनी आपसी सहमति से हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B के तहत आवेदन दायर किया है, जिसका हिंदू विवाह याचिका नंबर 2409/2025 है, जिसमें सभी नियम और शर्तें बताई गई हैं.

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B के तहत याचिकाकर्ता और प्रतिवादी द्वारा संयुक्त रूप से दायर किए गए आवेदन की सर्टिफाइड कॉपी भी कोर्ट में पेश की गयी. इसके अनुसार प्रतिवादी मामले को कोर्ट में आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं रखते हैं क्योंकि Marital dispute आपसी सहमति से सुलझ गया है.

तथ्यों को परखने पर कोर्ट ने पाया कि मामले में अभी तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गयी है. यदि केस अपराध संख्या 41/23, धारा 498A, 323, 406, 326B आईपीसी और 3/4 दहेज निषेध अधिनियम थाना उतरांव से उत्पन्न एफआईआर को रद्द कर दिया जाता है तो प्रतिवादी को कोई आपत्ति नहीं है. यह हलफनामा याचिकाकर्ता की पत्नी और उसके पिता, पहले शिकायतकर्ता, शिवपूजन यादव द्वारा संयुक्त रूप से दिया गया है.

इसमें बताया गया ​है कि कुल 13 लाख रुपये की Marital dispute की सेटलमेंट राशि का भुगतान किया जाना है. जिसमें से 8 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है और 5 लाख रुपये बकाया हैं. जिसका भुगतान हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-B के तहत आपसी सहमति से तलाक की याचिका में अंतिम डिक्री पारित होने के समय किया जाएगा, जो प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, प्रयागराज के समक्ष लंबित है. कुछ अन्य चल संपत्ति पहले ही पहले शिकायतकर्ता की बेटी, यानी पहले याचिकाकर्ता की पत्नी को वापस कर दी गई है.

सभी परिस्थितियों को देखते हुए हमारी राय है कि विवादित एफआईआर के आधार पर जांच या मुकदमा (Marital dispute) जारी रखने की अनुमति देना प्रक्रिया का दुरुपयोग और सार्वजनिक समय, धन और संसाधनों की बर्बादी होगी, क्योंकि जांच या मुकदमे से कुछ भी सार्थक नहीं निकलेगा, भले ही पुलिस जांच में किसी तरह की सामग्री शामिल करके चार्जशीट दाखिल कर दे.
कोर्ट ने किया कमेंट

CRIMINAL MISC. WRIT PETITION No. – 5705 of 2023;  Mangesh Yadav and others Versus State of U.P. and others

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